Very Short Moral Stories in Hindi To Write / दयालु परी सीखने वाली कहानी

Very Short Moral Stories in Hindi For Class 5 एक नगर में एक अमीर आदमी था. उसके पास बहुत अधिक पैसा था. पुरे नगर में उसका मान सम्मान था. लेकिन फिर भी उसके मन में नाम मात्र का घमंड नहीं था. वह बहुत ही दयालु था.

 

 

 

वह सदैव लोगों की सेवा करता था. दीन – दुखियों की सेवा करता था. लेकिन उसके बाद भी वह सदा उदास रहता था. वह ही नाहिंन उसकी पत्नी भी हमेशा चिंतित रहती थी और इसका सबसे बड़ा कारण था उनके घर में संतान ना होना. दोनो पति – पत्नी इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि आखिर इतने धन – दौलत का क्या होगा.

 

 

 

उनकी खुबसूरत हवेली में एक खुबसूरत बागीचा था. उस बगीचे कई बड़ी – बड़ी परियों की मूर्तियाँ थीं. अमीर की पत्नी को सलीके से जिंदगी बिताने का बेहद शौक था.

 

 

A Short Moral Stories in Hindi 

 

 

 

उसने उस बगीचे में परियों के बैठने के लिये खुबसूरत जगह बनवाई थी. जिसमें बहुत ही खुबसूरत रंग बिरंगे फूल लगे हुए थे. अमीर की पत्नी माली से फूलों की मालाएं बनवाती और स्वयं आकर परियों के गले में पहनाया करती थी.

 

 

 

एक दिन अमीर की पत्नी संतान की चिंता में बहुत उदास थी. वह चुपचाप बगीचे में आकर बैठ गयी और सोचने लगी ” बिना संतान के कोई गृहस्थ जीवन है भला.

 

 

 

 

बिना बच्चों के हवेली कितनी सूनी – सूनी सी दिखती है. अगर मुझे भी संतान तो उसकी किलकारियों , उसकी हंसी से हवेली में रौनक आ जाती. ” वह बहुत देर तक वैसे ही गम सुम से बैठी रही.

 

 

 

 

परियों के आने पर उसका ध्यान टूटा. आज उसके घर पर एक शुभ आयोजन था. वह जल्दी से उठी और जाने लगी. वह जैसे ही चलने को हुई उसे एक मीठी धुन सुनाई दी. वह चौंकी.

 

 

 

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अरे यह तो किसी छोटी बच्ची की आवाज है, लेकिन इस बगीचे में बच्ची कैसे आ गयी. वह इधर – उधर देखने लगी तभी उसे एक छोटी लड़की दिखाई दी. जिसने चमकदार श्वेत कपडे पहने हुए थे. उसके चहरे पर एक तेज था. वह मुस्कुरा रही थी.

 

 

 

अमीर आदमी की पत्नी उसे आश्चर्य से देख रही थी. तभी उस लड़की ने कहा …क्या हुआ ? मुझे आपने नहीं पहचाना.

 

 

 

गृहस्वामिनी चुप रही.उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे. कुछ देर बाद वह बोली…कैसे पहचानूंगी ? मैं तुम्हे पहली बार देख रही हूँ. तुम इस शहर की हो ? तुम्हारा घर कहाँ है ?

 

 

दयालु परी सीखने वाली कहानी

 

 

 

इस पर लड़की बोली मैं परी लोक की हूँ. लेकिन पूनम की रात को हम अक्सर यहाँ आते हैं. हमें ये प्रतिमाएं और खुबसूरत फूल बहुत पसंद आते हैं. हम आपको हर बार देखती थे, लेकिन आज आप बहुत उदास थीं और इसीलिए मैं आपसे इसका कारण पूछने आई हूँ.

 

 

 

यह सुनकर गृहस्वामिनी की पत्नी का दुःख उसकी आँखों में भर आया. उसकी आखों से आंसू टपक पड़े. फिर उसने अपने सारे दुःख परी के सामने उड़ेलकर रख दिया.

 

 

चिंता ना करो . मैं आपकी इच्छा पूरी कर दूंगी .

 

 

क्या ? आप मुझे संतान दे सकती हैं….गृहस्वामिनी चहककर बोली

 

 

हाँ, क्यों नहीं ? अब ध्यान से सुनो . तुम कल सुबह नहा धोकर, स्वच्छ वस्त्र धारण करके इसी स्थान पर आ जाना. उस सामने वाले पेड़ पर आपको दो सेब लटके हुए मिलेंगे . बिना किसी को बताये आप उसे छिलकर खा जाना . उसके बाद आपको दो संतान प्राप्त होगी.

 

 

गृहस्वामिनी ने परी लड़की को धन्यवाद दिया और तेजी से ख़ुशी – ख़ुशी हवेली की और चली. अगले दिन उसने वैसा ही किया जैसा उस लड़की ने कहा था. वहाँ दो सेब लटके हुए थे.

 

 

गृहस्वामिनी बहुत प्रसन्न हुई और सेब को तोड़कर उसे छिलने लगी और तभी उसे किसी के आने की आहात हुई. उसने जल्दी से सेब खा लिए . उसमें सेब छिला हुआ था और एक सेब वैसा ही था.

 

 

 

घबराहट में वह परी की बात भूल गयी थी. समय बीता और निश्चित समय पर गृहस्वामिनी ने दो पुत्र को जन्म दिया, लेकिन उसमें एक पुत्र तो बहुत ही खुबसूरत था पर दूसरा पुत्र बहुत ही कुरूप था.

 

 

 

समय बितता गया बच्चे बड़े होने लगे, लेकिन हर कोई केवल खुबसूरत बच्चे से प्यार करता कुरूप बच्चे की पास कोई नहीं जाता. इससे कुरूप बच्चे को बहुत ही दुःख होता और गृहस्वामिनी भी बहुत दुखी होती.

 

 

 

एक दिन उस कुरूप बच्चे ने पूछा ” मां, आखिर भाई इतने खुबसूरत और मैं इतना कुरूप क्यों हूँ ? लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं. उसक अधिक हाथ पर उसने सारी बात बता दी.

 

 

 

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इसके बाद पूर्णिमा की रात को कुरूप लड़का बाग़ में बड़ी बड़ी मूर्तियों के पास आकर खडा हो गया. उसने सोचा कि आज परियां आएँगी तो मैं उनसे विनती करूंगा और वे जरुर मेरी सहायता करेंगी. तभी वह परी लड़की वहाँ आई . वह उसे पहचान नहीं सका , लेकिन मां के बताये अनुसार उसने सोचा यही तो वह परी है.

 

 

 

Very Short Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

 

वह कुछ कहता कि उसके पहले ही उस परी ने कहा कि तुम मुझे नहीं पहचानते , लेकिन मैं तुम्हे जानती हूँ और तुम्हारा दुःख भी जानती हूँ. समझ लो तुम्हारा दुःख ख़त्म हो गया. तुम्हारी मां ने हमे घुमने के लिए यह खुबसूरत स्थान दिया है. इससे हम बहुत खुश हैं.

 

 

 

कल सुबह नहा धोकर यहाँ आना और अपनी मां को भी साथ लाना. यहाँ इस आम की पेड़ के नीचे एक गिलास दूध होगा , जिसे पी लेना और उसे पीते तुम्हारा दुःख ख़त्म हो जाएगा. व

 

 

 

ह लड़का धन्यवाद करके घर गया और अपनी मां को सारी बात बताई और अगले दिन उसने वैसा ही किया. दूध पीते ही वह एक खुबसूरत राजकुमार की तरह हो गया.

 

 

 

 

जब वे दोनों हवेली में गए तो हर कोई हैरान था. उसके बाद गृहस्वामिनी ने गृहस्वामी अर्थात अमीर को सारी बात बता दी. वह बहुत खुश हुआ और उसने उस बगीचे में और भी सुन्दर – सुन्दर फूल लगा दिए.

 

 

 

छोटी रानी ने पहले ही परी की सारी कहानी सुन ली थी.  वो भी राज्य से बाहर जा कर अनार के पेड़ के नीचे, नदी किनारे जा कर रोने लगी. पिछली बार जैसे ही इस बार भी परी प्रकट हुई.

 

 

 

परी ने छोटी रानी से भी उसके रोने का कारण पूछा.  छोटी रानी ने झूठ मूठ बड़ी रानी के ऊपर दोष लगाया और कहा कि उसे बड़ी रानी महल से बाहर निकाल दिया है.

 

 

 

तब परी बोली, ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम. पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो.” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी.

 

 

 

छोटी रानी ने ख़ुश हो कर नदी में डुबकी लगाई.  जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर आया.

 

 

 

दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर पर सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये. तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये. इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी.

 

 

 

जब छोटी रानी ने ये देखा तो उसे लगा कि अगर वो तीन डुबकी लगाने पर इतनी सुंदर बन सकती है, तो और डुबकिय़ाँ लगाने पर जाने कितनी सुंदर लगेगी.

 

 

 

इसलिये, उसने एक के बाद एक कई डुबकियाँ लगा लीं. मगर उसका ऐसा करना था कि रानी के शरीर के सारे कपड़े फटे पुराने हो गये, ज़ेवर गायब हो गये, सर से बाल चले गये और सारे शरीर पर दाग़ और मस्से दिखने लगी.

 

 

 

छोटी रानी ऐसा देख कर दहाड़े मार मार कर रोने लगी. फिर वो नदी से बाहर आई और अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा. उस अनार में से एक बड़ा सा साँप निकला और रानी को खा गया. इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि दूसरों का कभी बुरा नहीं चाहना चाहिये, और लोभ नहीं करना चाहिये.

 

 

Very Short Moral Stories in Hindi For Class 8

 

 

 

2- एक बार shekh chilli के भाई बीमार हो गए . इस बात की खबर जब sheikh chilli को पड़ी तो उन्होंने भाई की खैरियत पूछने के लिए चिट्ठी लिखने की सोची. पहले के समय में डाक व्यवस्था नहीं थी. उस समय चिट्ठियाँ मुसाफिरों अर्थात लोगों के हाथ ही भिजवाई जाती थी.

 

 

 

 

shekh chili ने नाई से चिठ्ठी पहुँचाने के लिए कहा, लेकिन नाई ने बहाना बना दिया क्योंकि मियाँshekh chilli पैसे देने में बड़े ही कंजूस थे. दुसरे मुसाफिरों ने फसल पकी होने के कारण जाने से मना कर दिया. अब shekh chilli का दिमाग काम नहीं कर रहा था तो उन्होंने सोचा कि वे खुद ही चिट्ठी देकर आ जाते हैं, क्यों किसी की सिफारिस करना.

 

 

 

अगले ही दिन shekh chilli चिट्ठी देने के लिए रवाना हो गए और शाम तक घर पहुँच गए. उन्होंने घर का दरवाजा खटखटाया तो उनका बीमार भाई बाहर आया. shaikh chilli ने उसे चिट्ठी पकड़ाई और तुरंत ही वहाँ से निकल लिए.

 

 

 

 

यह देखकर उनका भाई उनके पीछे दौड़ा और उन्हें रोकते हुए बोला ” भाई इतनी दूर से आया है तो घर में , मुझसे गले किल. नाराज है क्या मुझसे .” यह कहकर उनका भाई जैसे ही गले मिलने के लिए आगे बढ़ा shekh chilli ने उसे रोकते हुए कहा ” मैं आपसे बिलकुल भी नाराज नहीं हु. वह तो चिट्ठी पहुंचाने के लिए कोई मुसाफिर नहीं मिल रहा था सो मैं ही चला आया.”

 

 

 

 

ठीक है, अब जब आ ही गए हो तो दो चार दिन रुक जाओ..भाई ने समझाते हुए कहा

 

 

 

यह सुनते ही sheikh chikki का पारा चढ़ गया . उन्होंने नाराज होते हुए कहा ” भाई साहब आप अजीब इंसान हैं. आपको बात समझ ही नहीं आ रही है.

 

 

 

मैं यहाँ मुसाफिर की जगह पर आया हूँ . मुझे आपसे मिलने आना होता तो खुद ही आ जाता. मुसाफिर के बदले थोड़े ही आता.” उनका भाई माथा पिटता रह गया.

 

 

 

मित्रों यह Very Short Moral Stories in Hindi 7 है।  इसमें एक दयालु परी की कहानी है।  इस तरह की दूसरी Very Short Moral Stories in Hindi For Class 1 को पढ़ने के लिए नीचे की लिंक पर क्लिक जरूर करें और Very Simple Short Moral Stories in Hindi को शेयर भी करें।

 

 

 

 

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