Story in Hindi With Moral / स्टोरी इन हिंदी / परियों की कहानी

Story in Hindi एक गाँव में एक परिवार रहता था।  वह तीन लोगों का परिवार था।  माँ – बाप और उनका बेटा।  बेटे का नाम गौरव था।  वह २३ साल का सुन्दर युवक था।

 

 

उसके माँ – बाप उसकी शादी करना चाहते थे, लेकिन वह कोई ना कोई बहाना करके इसे ताल देता था।  उसके माँ – बाप इसके बारे में  उसे बहुत समझाते लेकिन वह नहीं मान रहा था।  वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर गौरव ऐसा क्यों कर रहा है ?

 

 

 

Story in Hindi For Kids

 

 

दरअसल, उस गाँव से सत्कार एक नदी बहती थी।  उसमें ढेर सारे कमल के फूल खिलते थे और उसमें एक विशेष कमल का फूल था जो बाकी समय तो अदृश्य रहता, लेकिन रात को १२ बजे के बाद जब लालपरी आसमान से आती तो वह कमल नदी में से निकलता और बड़ा हो जाता।

 

 

 

लालपरी उस फूल के पार आती और काफी देर तक वहीँ रुकती और फिर चली जाती।  गौरव रोह रात को यह नज़ारा देखता।  एक दिन की बात है लालपरी काफी देर हो जाने के बाद भी नहीं आई और वह फूल अपने समय पर नदी से निकला और कुछ देर बाद किनारे पर आ गया।

 

 

Story in Hindi pdf

 

 

 

जब काफी देर तक Lalpari नहीं आई तो गौरव नदी किनारे पहुंचा।  तब उसने देखा की लालपरी भी अपने उड़नखटोले से आ रही हैं। गौरव ने मन ही मन सोचा, ” आखिर यह लालपरी इस कमल के फूल के अन्दर क्या देखती है ? मुझे इसका पता लगाना चाहिए।  ” ऐसा सोचकर वह उस कमल के विशाल फूल के पास पहुंचा।  उतने में वहाँ लालपरी भी आ गयी।

 

 

 

गौरव ने लालपरी  से कहा, ” मैं बहुत दिनों से देखता हूँ आप रोज इस नदी पर आती हैं और इस विशाल कमल पुष्प के पास काफी देर तक रहती हैं और उसके बाद आप चली जाती हैं।  आपके जाते ही यह कमल पुष्प अदृश्य हो जाता है।  आखिर इसका राज क्या है ?

 

 

लालपरी मुस्कुराई और कहा, ” यह राज हमारे पिछले जन्म से जुदा हुआ है।  दरअसल मैं एक बड़े देश की राजकुमारी और तुम राजकुमार थे।  हम दोनों आपस में बहुत प्रेम करते थे और हमारी शादी होने वाली थी।

 

 

 

शादी के कुछ दिन पहले  जब हम दोनों इसी नदी किनारे मिलाने पहुंचे तो उसी समय यहाँ एक ऋषि आये, लेकिन  हमें उनका भान नहीं हुआ।  इससे ऋषि ने क्रोधित होते शाप दे दिया कि हमारा प्यार अधूरा रह जाएगा।

 

 

काफी अनुनय – विनय के बाद उन्होंने कहा कि इस जन्म में नहीं लेकिन दुसरे जन्म में इसी नदी किनारे तुम्हारा प्यार मिलेगा।  मृत्यु के पश्चात तुम परीलोक में लालपरी बनोगी और राजकुमार इसी नदी किनारे एक घर में जन्म लेंगे।

 

 

तुम रोज इस नदी किनारे पर आना और यहाँ एक विशाल कमल पुष्प खिलेगा जिस दिन राजकुमार इस पुष्प के पास आयेंगे और पुष्प को छुएंगे उन्हें सब याद आ जाएगा।  उसके बाद आप दोनों का विवाह होगा।  कमल पुष्प के छूते ही उसमें से ढेर सारे हीरे – जवाहरात निकलेंगे और आप भी लालपरी से साधारण युवती बन जाओगी।  ”

 

 

 

लालपरी ने यह कहने के बाद गौरव से वह पुष्प छूने का आग्रह किया।  पुष्प के छूते ही गौरव को सारी बात याद आ गयी और उसमें देर सारे हीरे – जवाहरात निकले।  उसके बाद गौरव और लालपरी का विवाह हो गया और दोनों गौरव के माता – पिता संग सुखी से रहने लगे।

 

 

Story in Hindi With Moral

 

 

 

2- सुबह सुबह मिया बीवी के झगड़ा हो गया। बीवी गुस्से मे बोली – बस, बहुत कर लिया बरदाश्त, अब एक मिनट भी तुम्हारे साथ नही रह सकती।

पति भी गुस्से मे था, बोला “मैं भी तुम्हे झेलते झेलते तंग आ चुका हुं। पति गुस्से मे ही दफ्तर चले गया पत्नी ने अपनी मां को फ़ोन किया और बताया के वो सब छोड़ छाड़ कर बच्चो समेत मायके आ रही है, अब और ज़्यादा नही रह सकती इस जहन्नुम मे।
मां ने कहा – बेटी बहु बन के आराम से वही बैठ, तेरी बड़ी बहन भी अपने पति से लड़कर आई थी, और इसी ज़िद्द मे तलाक लेकर बैठी हुई है, अब तुने वही ड्रामा शुरू कर दिया है, ख़बरदार जो तुने इधर कदम भी रखा तो… सुलह कर ले पति से, वो इतना बुरा भी नही है।
मां ने लाल झंडी दिखाई तो बेटी के होश ठिकाने आ गए और वो फूट फूट कर रो दी, जब रोकर थकी तो दिल हल्का हो चुका था, पति के साथ लड़ाई का सीन सोचा तो अपनी खुद की भी काफ़ी गलतियां नज़र आई।
मुहं हाथ धोकर फ्रेश हुई और पति के पसंद की डीश बनाना शुरू कर दी, और साथ स्पेशल खीर भी बना ली, सोचा कि शाम को पति से माफ़ी मांग लुंगी, अपना घर फिर भी अपना ही होता है।
पति शाम को जब घर आया तो पत्नी ने उसका अच्छे से स्वागत किया, जैसे सुबह कुछ हुआ ही ना हो पति को भी हैरत हुई। खाना खाने के बाद पति जब खीर खा रहा था तो बोला डिअर, कभी कभार मैं भी ज़्यादती कर जाता हुं, तुम दिल पर मत लिया करो, इंसान हुं, गुस्सा आ ही जाता है”।
पति पत्नी का शुक्रिया अदा कर रहा था, और पत्नी दिल ही दिल मे अपनी मां को दुआएं दे रही थी, जिसकी सख़्ती ने उसको अपना फैसला बदलने पर मजबूर किया था, वरना तो जज़्बाती फैसला घर तबाह कर देता।

Story in Hindi Written लाल परी की कहानी 

3-  Story in Hindi For Class 5 – रश्मि ७ साल की बच्ची थी।  उसकी माँ की मृत्यु हो चुकी थी। रश्मि हर रोज अपनी दादी  से परियों की कहानियां सुनती थी।  उसकी सौतेली माँ उसे बिलकुल भी प्यार नहीं करती थी।

 

 

एक दिन सभी लोग पिकनिक के लिए जाते हैं।  रात को रश्मि अपने पापा से कहती है, ” पापा मुझे माँ बिलकुल प्यार नहीं करती है।  मैं उनका हर कहना मानती हूँ , लेकिन फिर भी वो मुझसे प्यार नहीं करती हैं। ”

 

 

 

रश्मि के मासूम सवालों से उसके पापा को बड़ा ही दुःख होता है और वे रश्मि को समझाते हुए कहते हैं, ” बेटा आप उनसे प्यार करते हो न तो देखना एक दिन वे भी आपसे प्यार करने लगेंगे।  ”

 

 

 

पिकनिक के आस – पास का क्षेत्र जादुई रहता है और रश्मि के माता – पिता सभी इस बात से अनभिज्ञ रहते हैं।  रश्मि जब अपने भाई भाई सोहन के साथ खेलती है तो उसकी सौतेली माँ उसे डांटने हुए दूर कर देती है।

 

 

रश्मि उदास होकर जंगल की तरफ चली जाती है।  वह बहुत उदास थी और उसे अपनी माँ की याद भी बहुत आ रही थी। चलते – चलते जंगल में काफी अंदर तक चली गयी।

 

 

 

उसने वहाँ देखा एक तालाव जिसका पानी एकदम स्वच्छ है और उसके चारो तरफ रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं और वहा एक चमकदार रोशनी बिखरी हुई है।

 

 

 

वह वहाँ बैठकर कभी फूलों को निहारती तो कभी तालाव के स्वच्छ जल को।  तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी।  ५ उड़नखटोले पर पांच परियां वहा उपस्थित हुई।

 

 

उनमें से एक परी जिसने लाल रंग की पोशाक पहनी थी वह सबसे आगे थी।  थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर वे अचानक से रुक गयीं और आपस में बाते करने लगीं।

 

 

 

लाल परी ने कहा, ” यहां किसी मानव के होने की खुशबु आ रही है।  हमें उसे ढूंढना चाहिए।  ” बाकी परियों ने भी  हाँ में हाँ मिलाई और ढूंढने लगे।

 

 

 

थोड़ी ही समय में उन्होंने रश्मि को देख लिया।  रश्मि उन्हें देखते ही चौंक गयी और डरने लगी।  लाल परी मुस्कुरायी और बोली, ” डरो मत, मैं लालपरी हूँ।  मैं परीलोक में रहती हूँ।  तुम यहां कैसे आयी ? ”

 

 

 

रश्मि ने पूरी बात विस्तार से बता दी।  लालपरी को बहुत दुःख हुआ।  उसने कहा, ” मैं तुम्हे कुछ जादुई शक्तियां दे रही हूँ।  जिससे तुम मुझसे जब चाहे बात कर सकती हो और दूसरी शक्तियों  से तुम लोगों की जान बचा सकती हो।  यह जंगल बहुत भयानक है।  यहाँ एक बड़ा सा राक्षस रहता है। उसे वरदान है कि कोई छोटी बच्ची ही उसे मार सकती है, इसलिए वह धोखे से बच्चों को मार देता है।  अतः तुम्हे सावधान भी रहना होगा। ”

 

 

 

उसके बाद लालपरी ने रश्मि को कई सारी शक्तियां दे दी और कहा, ” अब तुम अपने घर चले जाओ। ” . रश्मि ने यात्रा सूचक यंत्र का प्रयोग किया और उसे बाहर जाने का रास्ता मिल गया।

 

 

 

 

वह थोड़ी ही आगे बढ़ी थी कि इतने में एक बाघ वहाँ आ गया।  वह बहुत भूखा था।  उसे देखते ही रश्मि ने माहौल को समझ लिया और उसने अपनी जादुई शक्तियों से पांच शेर प्रकट किये और वे शेर बाघ पर टूट पड़े। थोड़ी ही देर में उन्होंने बाघ को मार दिया।

 

 

 

कुछ समय में वह फिर से उस स्थान पर आ जाती है जहां वह अपने मम्मी – पापा के साथ ठहरी हुई थी।  वहाँ पहुंचने पर रश्मि के पिता उससे पूछते हैं, ” बेटा कहाँ चली गयी थी।  मैं आपको कब से ढूंढ रहा था।  ”

 

 

 

 

तब रश्मि ने कहा, ” पिता जी अब हमें यहां से चलना चाहिए।  यह क्षेत्र ठीक नहीं है।  ”

 

 

 

” क्यों ? क्या हुआ ? तुम इस तरह क्यों बात कर रही हो ? ” रश्मि के पिताजी ने आश्चर्य से पूछा।  तभी वहाँ अचानक से अंधेरा हो गया।  अचानक हुए अँधेरे से सभी लोग भयभीत होने लगे।

 

 

 

तभी एक लाल रोशनी दिखाई दी और एक भयानक राक्षस प्रकट हुआ।  उसे देखकर सबकी हालत खराब हो गयी।  वह  एक – एक कर सभी बच्चों को अपने पिजड़े में  बंद  करने लगा।

 

 

 

उसे पता था कि उसकी मृत्यु छोटे बच्चे के हाथो ही लिखी है और इसीलिए वह सभी छोटो बच्चों को मार डालना चाहता था।  सभी बच्चों के माता – पिता उस राक्षस से बच्चों को छोड़ने की मिन्नत करने लगे।

 

 

 

लेकिन वह निर्दयी राक्षस किसी की एक नहीं सुन रहा था।  अंत में रश्मि का नंबर आया।  रश्मि को परियों की बात याद थी।  उसने तुरंत ही उस राक्षस पर एक तेज रोशनी फेंकी।

 

 

 

राक्षस को धक्का लगा और वह गिर पड़ा।  तभी रश्मि ने एक जादुई रोशनी से सभी बच्चों को आज़ाद करा लिया।  उसकी इस जादुई शक्तियों से सभी लोग आश्चर्यचकित थे।

 

 

 

 

अब राक्षस को भी समझ आ गया था कि जिस बच्ची का उसे इन्तजार था वह रश्मि ही थी।  उसने अपने कई रूप धारण करके एक साथ रश्मि पर आक्रमण किया।

 

 

 

 

तब रश्मि ने परी के द्वारा दी हुई शक्ति से रक्षा कवच तैयार कर लिया और उसके बाद उसने जादुई रोशनी से उसके रूपों को नष्ट कर दिया।  इस तरह से उसकी और राक्षस की लड़ाई काफी देर तक चली।

 

 

 

उसके बाद रश्मि ने एक ताकतवर रोशनी का इस्तेमाल करके उस राक्षस को मार दिया।  राक्षस के मरते ही वहाँ पर फिर से उजाला हो गया।  सभी लोगों ने रश्मि के सम्मान में तालियां बजाई।

 

 

 

तभी उसकी सौतेली माँ ने उसे गले लगाते हुए बोली, ” बेटी मुझे माफ़ कर दो।  आज तुमने यहां बहुत लोगों की  जान बचाई है और साथ ही अपने भाई की भी जान बचाई है।  मैं हमेशा तुमसे प्यार करुँगी।  ”

 

 

रश्मि भी अपनी सौतेली माँ से लिपट कर रोने लगी।  सभी आखों में आंसू थे लेकिन वह ख़ुशी के आंसू थे।

 

Story in Hindi Love  सच्चे प्यार की कहानी 

 

 

 

४- एक गाँव में एक परिवार रहता था।  वह तीन लोगों का परिवार था।  माँ – बाप और उनका बेटा।  बेटे का नाम गौरव था।  वह २३ साल का सुन्दर युवक था।

 

 

 

 

उसके माँ – बाप उसकी शादी करना चाहते थे, लेकिन वह कोई ना कोई बहाना करके इसे  टाल देता था।  उसके माँ – बाप इसके बारे में  उसे बहुत समझाते लेकिन वह नहीं मान रहा था।  वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर गौरव ऐसा क्यों कर रहा है ?

 

 

 

दरअसल, उस गाँव से सत्कार एक नदी बहती थी।  उसमें ढेर सारे कमल के फूल खिलते थे और उसमें एक विशेष कमल का फूल था जो बाकी समय तो अदृश्य रहता, लेकिन रात को १२ बजे के बाद जब लालपरी आसमान से आती तो वह कमल नदी में से निकलता और बड़ा हो जाता।

 

 

 

लालपरी उस फूल के पार आती और काफी देर तक वहीँ रुकती और फिर चली जाती।  गौरव रोह रात को यह नज़ारा देखता।  एक दिन की बात है लालपरी काफी देर हो जाने के बाद भी नहीं आई और वह फूल अपने समय पर नदी से निकला और कुछ देर बाद किनारे पर आ गया।

 

 

 

जब काफी देर तक लालपरी नहीं आई तो गौरव नदी किनारे पहुंचा।  तब उसने देखा की लालपरी भी अपने उड़नखटोले से आ रही हैं। गौरव ने मन ही मन सोचा, ” आखिर यह लालपरी इस कमल के फूल के अन्दर क्या देखती है ? मुझे इसका पता लगाना चाहिए।  ” ऐसा सोचकर वह उस कमल के विशाल फूल के पास पहुंचा।  उतने में वहाँ लालपरी भी आ गयी।

 

 

 

 

गौरव ने लालपरी  से कहा, ” मैं बहुत दिनों से देखता हूँ आप रोज इस नदी पर आती हैं और इस विशाल कमल पुष्प के पास काफी देर तक रहती हैं और उसके बाद आप चली जाती हैं।  आपके जाते ही यह कमल पुष्प अदृश्य हो जाता है।  आखिर इसका राज क्या है ?

 

 

 

लालपरी मुस्कुराई और कहा, ” यह राज हमारे पिछले जन्म से जुड़ा  हुआ है।  दरअसल मैं एक बड़े देश की राजकुमारी और तुम राजकुमार थे।  हम दोनों आपस में बहुत प्रेम करते थे और हमारी शादी होने वाली थी।

 

 

 

शादी के कुछ दिन पहले  जब हम दोनों इसी नदी किनारे मिलाने पहुंचे तो उसी समय यहाँ एक ऋषि आये, लेकिन  हमें उनका भान नहीं हुआ।  इससे ऋषि ने क्रोधित होते शाप दे दिया कि हमारा प्यार अधूरा रह जाएगा।

 

 

 

काफी अनुनय – विनय के बाद उन्होंने कहा कि इस जन्म में नहीं लेकिन दुसरे जन्म में इसी नदी किनारे तुम्हारा प्यार मिलेगा।  मृत्यु के पश्चात तुम परीलोक में लालपरी बनोगी और राजकुमार इसी नदी किनारे एक घर में जन्म लेंगे।

 

 

 

तुम रोज इस नदी किनारे पर आना और यहाँ एक विशाल कमल पुष्प खिलेगा जिस दिन राजकुमार इस पुष्प के पास आयेंगे और पुष्प को छुएंगे उन्हें सब याद आ जाएगा।  उसके बाद आप दोनों का विवाह होगा।  कमल पुष्प के छूते ही उसमें से ढेर सारे हीरे – जवाहरात निकलेंगे और आप भी लालपरी से साधारण युवती बन जाओगी।  ”

 

 

 

लालपरी ने यह कहने के बाद गौरव से वह पुष्प छूने का आग्रह किया।  पुष्प के छूते ही गौरव को सारी बात याद आ गयी और उसमें देर सारे हीरे – जवाहरात निकले।  उसके बाद गौरव और लालपरी का विवाह हो गया और दोनों गौरव के माता – पिता संग सुखी से रहने लगे।

 

 

 

 

मित्रों यह Story in Hindi Written in Short आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Story in Hindi For Class 8  की तरह की दूसरी   Story in Hindi For Class 6  नीचे की लिंक पर क्लिक करके जरूर पढ़ें।

 

 

 

1-  Hindi Moral Story Pdf 

 

 

 

 

 

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