New Story in Hindi 2019 / Parilok Ki Kahani in Hindi / परीलोक की कहानी

New Story in Hindi बबली और बबलू दोनों भाई बहन थे।  वे दोनों अपनी मम्मी पापा के साथ में रहते थे।  बबली अपनी परी डॉल के साथ खेलती थी तो वहीं पर बबलू बैट बॉल खेलता था।

 

 

 

वह हमेशा बबली से कहता परियां वगैरह  कुछ नहीं होती तुम झूठे ही डॉल्स के साथ खेलती रहती हो।  इससे बबली गुस्सा हो जाती और दोनों में खूब झगड़ा होता।

 

 

 

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इसकी वजह से उसकी मम्मी ने बबली  और बबलू का का कमरा अलग कर दिया। एक  दिन की बात है बबलू ने देखा बबली के कमरे से कुछ रोशनी आ रही है जब उसने दरवाजा खोला तो देखा तो वहाँ एक परी थी।

 

 

 

वह आश्चर्यचकित रह गया। उसने कहा आप तो डाल  थी तो आप परी  कैसे बन गई ? तब परी ने कहा, ” हम जीवित डॉल हैं, जब कमरे में कोई नहीं रहता तो हम अपने रूप में आते हैं और परीलोक में चले जाते हैं। वहां हमारे परिवार के लोग रहते हैं।

 

 

 

 

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इस पर बबलू ने कहा, ” आप लोग  धरती पर क्यों आती  हो और परीलोक कहां है और परी लोक की फोटो है आपके पास  ? ” तब परी ने कहा, ” हमें अच्छे  बच्चों के साथ रहने के लिए कहा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर हम उनकी सुरक्षा कर सकें और बबली बहुत अच्छी बच्ची है और इसीलिए हम उसके साथ रहते हैं और परीलोक आसमान में है।  ”

 

 

 

परीलोक की कहानी

 

 

 

बब्लू  ने कहा, ” क्या यह बात मैं बबली को बता सकता हूं ? ” इस पर परी ने कहा, ” तुम यह बात बबली को मत बताओ क्योंकि हमें अपनी जानकारी छुपानी रहती है।  ”

 

 

 

बबलू ने कहा, ” वह आपको  पसंद करती है अगर उसे बताऊंगा तो वह बहुत खुश होगी।  ” इसपर परी  ने कहा, ” ठीक है उसे बता दो।  ” उसके बाद बबलू तेजी से बाहर गया और बबली का हाथ पकड़कर उसे कमरे में लेकर आया।

 

 

 

 

बबली  ने जब परियों को देखा तो  बड़ी खुश हुई।  तभी बबलू ने कहा, ” क्या आपके साथ हम परीलोक चल सकते हैं ? ”  उसके  बाद सभी परी लोक पहुंचते हैं।  उन्होंने परी से कहा, ” हम परीलोक की फोटो भी लेंगे।  ” परी ने हाँ कह दिया।

 

 

 

 

परीलोक बहुत ही खूबसूरत था।  वहाँ चीजें चमकदार थी और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी।   तरह – तरह के फूल खिले हुए थे। परियों को बच्चों के साथ और बच्चों को परियों के साथ खेलने में और बाते करने में बहुत मज़ा आ रहा था।

 

 

 

 

कुछ समय बाद परी  ने कहा, ” अब हमें वापस लौट जाना चाहिए। ”  तब बबलू ने कहा कि हम कुछ देर और नहीं खेल सकते।  तब परी  ने कहा, ” नहीं,  अब हमें जल्दी से जल्दी यहां से लौट जाना चाहिए।  ”

 

 

 

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बबलू  थोड़ा जिद करने लगा।  तब परी ने कहा, ” अच्छा ठीक है थोड़ा और भी खेल लो। ”  तभी अचानक वहां काले बादल छाने लगे और अंधेरा होने लगा।

 

 

 

 

सारी परियों में घबराहट छा गयी और इधर – उधर  भागने लगी।  तब बबलू ने पूछा , ”  यह क्या हो रहा है ? इतना अंधेरा क्यों छा रहा है ?  क्या यहां रात हो रही है ? ”

 

 

 

तब परी  ने कहा, ”  नहीं, यहाँ रात नहीं हो रही है।  यह काली डायन के आने का संकेत है।  वह परियों को खा जाती है।  इससे उसे ताकत मिलती है।

 

 

 

परी ने  बबलू और बबली  को छुपा दिया।  तब तक का काली डायन वहां पर तबाही मचाने लगी थी।  तभी बबलू के दिमाग में एक उपाय आया।  उसने परियों से कहा, ”  मैं और  बबली इस काली दायाँ  का ध्यान बटातें हैं और आप सभी लोग एक साथ उस पर हमला करो।  इससे  उसकी शक्तियां जरूर कम पड़ जायेंगी। ”

 

 

 

 

इस पर परी ने कहा, ”  नहीं हम रिस्क नहीं ले सकते।  हमें तुम्हारी भी तो रक्षा करनी है।  ”  तब बबलू और बबली ने कहा, ” इसमें कोई रिस्क नहीं है।  आप सब की शक्तियां इस डायन  की शक्तियों पर भारी पड़ेगी क्योंकि वह अकेली है।  अभी तक आप लोग अलग-अलग उससे लड़ती थीं, अब एक साथ लड़िये।  संगठन की शक्ति बहुत मजबूत होती है।  ”

 

 

 

 

उसके बाद बबलू और बबली ने ऐसा ही किया।  वह काली डायन के सामने आए और उसे  बातों में उलझा लिया।   तभी सभी परियों ने मिलकर एक शक्ति एकत्रित की और उसे काली दायाँ  पर फेंक दिया।

 

 

 

 

काली डायन मर गई।  उसके बाद सभी खुश हो गए और परियों ने कहा, ” हमें इंसानों से संगठन की शक्ति का महत्व की सीख मिली। अब हम संगठित ही रहेंगे।  ” उसके बाद सब खुशी से रहने  लगे और बब्लू और बबली को परी ने उनके घर पर छोड़ा और वे समय – समय पर उनसे मिलने जाने लगे। बब्लू और बबली आते समय परीलोक का फोटो भी ले आये।

2- New Story in Hindi 2019 Ki – एक नगर में एक मोची रहता था।  वह बहुत ही गरीब था।  वह जूते बनाता और उसे बाजार में बेचकर किसी तरह से अपना घर चलाता था।

 

 

 

लेकिन वह बहुत साहसी और ईमानदार था।  वह सोचता था एक ना एक दिन उसकी तकदीर भी जरूर बदलेगी।  भगवान उसकी भी सुनेगा और वह एक दिन अमीर आदमी बनेगा।

 

 

 

 

काफी दिन बीत गए लेकिन उसके हालात जस के तस रहे। इससे वह बहुत निराश हो गया।  वह अपनी दुकान बंद करके सारा सामान घर लाया और  निराश होकर सो गया।

 

 

 

 

कुछ समय बाद उसकी पत्नी आई और उससे भोजन करने के लिए कहा।  लेकिन मोची  ने मना कर दिया।  उसने कहा, ” इस तरह कब तक चलेगा।  अब हमारे पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं है।  क्या हम हमेशा गरीबी रहेंगे ? हमने क्या गलती की है ? मैं इतनी ईमानदारी से अपना धंधा करता हूं। इसके बावजूद भी उसमें कुछ फायदा नहीं हो रहा है।  ”

 

 

 

 

तब उसकी पत्नी ने कहा, ” भगवान पर भरोसा रखो। सब कुछ सही होगा।  इस तरह से भोजन छोड़ने से कुछ लाभ नहीं होगा।  “उसके बाद उसने  भोजन किया और सभी सो गए।

 

 

 

यह सब बातें सोनपरी सुन रही थी।  उसने सोचा यह तो बहुत गलत हो रहा है। मुझे इनकी मदद करनी चाहिए। उसके बाद  सोनपरी मोची के घर में आई और उसके जूते को एक शानदार  चमकदार जूता बना दिया।

 

 

 

New Story in Hindi 2019 Fairy Tales

 

 

 

सुबह जब जब मोची  उठा तो उसने चमकदार जूता देखा।  वह आश्चर्य से भर गया। उसने सोचा ऐसा कैसे हो सकता है ? यह जूता भला यहां कैसे आया ?

 

 

 

तब तक उसकी पत्नी थी वहां पर पहुंच गई। उसने पति से कहा, ‘ यह सब प्रभु की कृपा है।  भगवान ने हमारी बात सुन ली है। आप इसे बाजार ले जाएं और बेच दे। ”

 

 

 

 

 

तब मोची उस जुटे को बाजार ले गया।   वह जूता  बहुत ही महंगे दाम में बिका।  इससे मोची  बहुत खुश हुआ।  उसने और जूते बनाने के लिए कपड़ा भी खरीदा।

 

 

 

 

रात हुई और सोनपरी फिर वापस आई। उसने  ढेर सारे वैसे ही चमकीले जूते बना दिए।  मोची ने सुबह देखा वहां ढेर सारे वैसे ही चमकीले जूते रखे हुए थे।

 

 

 

 

 

 

उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने  सोचा ऐसा कौन कर रहा है। उसने अपनी पत्नी से कहा कि  हमें इस बारे में जरूर पता लगाना चाहिए। उसकी पत्नी भी इससे सहमत हुई।

 

 

 

 

उसके बाद मोची  बाजार गया और इस बार भी उसके जूते मंहगे दामों में बिक गए।  उसने और भी कपड़ा लिया  और घर लौटा। अब उसके पास कुछ पैसे भी इकट्ठा हो गए थे।

 

 

 

 

रात हुई।  पति – पत्नी छुपकर  उस कमरे पर नजर रखने लगे। उन्होंने देखा कि रात को सोनपरी आई और सारे कपड़ों को चमकदार जूते में तब्दील कर दिया।

 

 

 

 

पति पत्नी आश्चर्यचकित रह गए।  वे दोनों तुरंत ही उस कमरे में उनके आये। आते ही सोनपरी ने कहा कैसे हैं आप लोग? उम्मीद है अब आप लोग खुश होंगे।

 

 

 

 

तब मोची ने कहा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।  आपने हम गरीबों की बहुत मदद की है।  अब हम भी आपको कुछ भेंट  देना चाहते हैं।  उसके बाद मोची ने सोनपरी को छोटा खूबसूरत जूता दे दिया।

 

 

 

 

सोनपरी बहुत खुश हुई। उसने एक अंगूठी मोची को दी और कहा  जब भी किसी जूते को बनाओ तो उसमें इस अंगूठी को छुआ दो।  इससे वह जूता सुनहरा और चमकदार हो जाएगा और फिर आप उसे अच्छे दामों से मार्केट में बेच सकेंगे। यह कहकर सोनपरी वहां से  चली गई।  उसके बाद मोची ने ऐसा ही किया और जल्द ही वह बहुत ही अमीर व्यापारी बन गया.

 

 

 

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