moral story in hindi

moral story in hindi . प्रेरक कहानियां

moral story in hindi
Written by MoralAbhi

moral story in hindi  १- पापबुद्धि और धर्मबुद्धि   किसी गांव में दो मित्र रहते थे.  बचपन से उनमें बड़ी घनिष्टता थी. उनमें से एक का नाम था पापबुद्धि और दूसरे का धर्मबुद्धि . पापबुद्धि पाप के काम करने में हिचकिचाता नहीं था.

 

कोई भी ऐसा दिन नहीं जाता था, जबकि वह कोई-न-कोई पाप ने करे, यहां तक कि वह अपने सगे-सम्बंधियों के साथ भी बुरा व्यवहार करने में नहीं चूकता था.

 

दूसरा मित्र धर्मबुद्धि सदा अच्छे-अच्छे काम किया करता था.  वह अपने मित्रों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए तन, मन, धन से पूरा प्रयत्न करता था. वह अपने चरित्र के कारण प्रसिद्ध था. धर्मबुद्धि को अपने बड़े परिवार का पालन-पोषण करना पड़ता था. वह बड़ी कठिनाईयों से धनोपार्जन करता था.

 

एक दिन पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि के पास जाकर कहा, “मित्र! तूने अब तक किसी दूसरे स्थानों की यात्रा नहीं की. इसलिए तुझे और किसी स्थान की कुछ भी जानकारी नहीं है. जब तेरे बेटे-पोते उन स्थानों के बारे में तुझसे पूछेंगे तो तू क्या जवाब देगा? इसलिए मित्र, मैं चाहता हूं कि तू मेरे साथ घूमने चल.”

 

 

धर्मबुद्धि ठहरा निष्कपट. वह छल-फरेब नहीं जानता था. उसने उसकी बात मान ली. ब्राह्राण से शुभ मुहूर्त निकलवा कर वे यात्रा पर चल पड़े.

 

 

चलते-चलते वे एक सुन्दर नगरी में जाकर रहने लगे. पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि की सहायता से बहुत-सा धन कमाया. जब अच्छी कमाई हो गई तो वे अपने घर की ओर रवाना हुए.

 

 

रास्ते में पापबुद्धि मन-ही-मन सोचने लगा कि मैं इस धर्मबुद्धि को ठग कर इस सारे धन को हथिया लूं और धनवान बन जाऊं. इसका उपाय भी उसने खोज लिया.

 

दोनों गांव के निकट पहुंचे.  पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि से कहा, “मित्र, यह सारा धन गांव में ले जाना ठीक नहीं.”

 

यह सुनकर धर्मबुद्धि ने पूछा, “इसको कैसे बचाया जा सकता है?”

 

पापबुद्धि ने कहा, “सारा धन अगर गांव में ले गये तो इसे भाई बटवा लेंगे और अगर कोई पुलिस को खबर कर देगा तो जीना मुश्किल हो जायगा. इसलिए इस धन में से आवश्यकता के अनुसार थोड़ा-थोड़ा लेकर बाकी को किसी जंगल में गाड़ दें. जब जरुरत पड़ेगी तो आकर ले जायेंगे.”

 

 

यह सुनकर धर्मबुद्धि बहुत खुश हुआ. दोनों ने वैसा ही किया और घर लौट गए.

 

कुछ दिनों बाद पापबुद्धि उसी जंगल में गया और सारा धन निकालकर उसके स्थान पर मिटटी के ढेले भर आया. उसने वह धन अपने घर में छिपा लिया. तीन-चार दिन बाद वह धर्मबुद्धि के पास जाकर बोला, “मित्र, जो धन हम लाये थे वह सब खत्म हो चुका है. इसलिए चलो, जंगल में जाकर कुछ धन और लें आयें.”

 

 

धर्मबुद्धि उसकी बात मान गया और अगले दिन दोनों जंगल में पहुंचे. उन्होंने गुप्त धन वाली जगह गहरी खोद डाली, मगर धन का कहीं भी पता न था. इस पर पापबुद्धि ने बड़े क्रोध के साथ कहा, “धर्मबुद्धि, यह धन तूने ले लिया है.”

 

 

धर्मबुद्धि को बड़ा गुस्सा आया. उसने कहा, “मैंने यह धन नहीं लिया. मैंने अपनी जिंदगी में आज तक ऐसा नीच काम कभी नहीं किया .यह धन तूने ही चुराया है.”

 

 

पापबुद्धि ने कहा, “मैंने नहीं चुराया, तूने ही चुराया है. सच-सच बता दे और आधा धन मुझे दे दे, नहीं तो मैं न्यायधीश से तेरी शिकायत करूंगा.”

 

धर्मबुद्धि ने यह बात स्वीकार कर ली.  दोनों न्यायालय में पहुंचे. न्ययाधीश को सारी घटना सुनाई गई. उसने धर्मबुद्धि की बात मान ली और पापबुद्धि को सौ कोड़े का दण्ड दिया.

 

 

 

इस पर पापबुद्धि कांपने लगा और बोला, “महाराज, वह पेड़ पक्षी है. हम उससे पूछ लें तो वह हमें बता देगा कि उसके नीचे से धन किसने निकाला है.”

 

यह सुनकर न्यायधीश ने उन दोनों को साथ लेकर वहां जाने का निश्यच किया. पापबुद्धि ने कुछ समय के लिए अवकाश मांगा और वह अपने पिता के पास जाकर बोला, “पिताजी, अगर आपको यह धन और मेरे प्राण बचाने हों तो आप उस पेड़ की खोखर में बैठ जायं और न्यायधीश के पूछने पर चोरी के लिए धर्मबुद्धि का नाम ले दें.”

 

पिता राजी हो गये. अगले दिन न्यायधीश, पापबुद्धि और धर्मबुद्धि वहां गये. वहां जाकर पापबुद्धि ने पूछा, “ओ वृक्ष! सच बता, यहां का धन किसने चुराया है.”

 

खोखर में छिपे उसके पिता ने कहा, “धर्मबुद्धि ने.”

 

यह सुनकर न्यायधीश धर्मबुद्धि को कठोर कारावास का दण्ड देने के लिए तैयार हो गये. धर्मबुद्धि ने कहा, “आप मुझे इस वृक्ष को आग लगाने की आज्ञा दे दें. बाद में जो उचित दण्ड होगा, उसे मैं सहर्ष स्वीकार कर लूंगा.”

 

न्यायधीश की आज्ञा पाकर धर्मबुद्धि ने उस पेड़ के चारों ओर खोखर में मिटटी के तेल के चीथड़े तथा उपले लगाकर आग लगा दी. कुछ ही क्षणों में पापबुद्धि का पिता चिल्लाया “अरे, मैं मरा जा रहा हूं. मुझे बचाओ.”

 

पिता के अधजले शरीर को बाहर निकाला गया तो सच्चाई का पता चल गया. इस पर पापबुद्धि को मृत्यु दण्ड दिया गया. धर्मबुद्धि खुशी-खुशी अपने घर लौट गया.

 

moral story in hindi

 

२- Moral story in Hindi for education –   कर्मफल   एक लड़की थी.  वह बड़ी सुन्दर थी, शरीर उसका पतला था.  रंग गोरा था. मुखड़ा गोल था. बड़ी-बड़ी आंखें कटी हुई अम्बियों जैसी थीं.  लम्बे-लम्बे काले-काले बाल थे.  वह बड़ा मीठा बोलती थी. धीरे-धीरे वह बड़ी हो गई. उसके पिता ने कुल के पुरोहित तथा नाई से वर की खोज करने को कहा, उन दानों ने मिलकर एक वर तलाश किया. न लड़की ने होनेवाले दूल्हे को देखा, न दूल्हे ने होनेवाली दुल्हन को.

 

 

धूम-धाम से उनका विवाह हो गया.  जब पहली बार लड़की ने पति को देखा तो उसकी बदसूरत शकल को देखकर वह बड़ी दु:खी हुई. इसके विपरीत लड़का सुन्दर लड़की को देखकर फूला न समाया.

 

रात होती तो लड़की की सास दूध औटाकर उसमें गुड़ या शक्कर मिलाकर बहू को कटोरा थमा देती और कहती, “जा, अपने पति को पिला आ.” वह कटोरा हाथ में लेकर, पति के पास जाती और बिना कुछ बोले चुपचाप खड़ी हो जाती.

 

 

 

उसका पति दूध का कटोरा ले लेता और पी जाता. इस तरह कई दिन बीत गये. हर रोज ऐसे ही होता. एक दिन उसका पति सोचने लगा,आखिर यह बोलती क्यों नहीं. उसने निश्चय किया कि आज इसे बुलवाये बिना मानूंगा नहीं. जब तक यह कहेगी नहीं कि लो दूध पी लो, मैं इसके हाथ से कटोरा नहीं लूंगा.

 

 

उस दिन रात को जब वह दूध लेकर उसके पास खड़ी हुई तो वह चुपचाप लेटा रहा, उसने कटोरा नहीं थामा. पत्नी भी कटोरे को हाथ में पकड़े खड़ी रही, कुछ बोली नहीं. बेचारी सारी रात खड़ी रही, मगर उसने मुंह नहीं खोला. उस हठीले आदमी ने भी दूध का कटोरा नहीं लिया.

 

 

सुबह होने को हुई तो पति ने सोचा, इस बेचारी ने मेरे लिए कितना कष्ट सहा है. यह मेरे साथ रहकर प्रसन्न नहीं है. इसे अपने पास रखना इसके साथ घोर अन्याय करना है.

 

 

इसके बाद वह उसे उसके पीहर छोड़ आया. बेचारी वहां भी प्रसन्न कैसे रहती . वह मन-मन ही कुढ़ती. वह घुटकर मरने लगी. उसे कोई बीमारी न थी.

 

 

 

वह बाहर से एकदम ठीक लगती थी. माता-पिता को उसके विचित्र रोग की चिंता होने लगी. वे बहुत-से वैद्यों और ज्योतिषियों के पास गये, पर किसी की समझ में उसका रोग नही आया.

 

अंत में एक बड़े ज्योतिषी ने लड़की के रंग-रूप और चाल-ढाल को देखकर असली बात जान ली. उसने उसके हाथ की रेखाएं देखीं. ज्योतिषी ने बताया, “बेटी! पिछले जन्म में तूने जैसे कर्म किये थे, तुझे ठीक वैसा ही फल मिल रहा है.

 

 

 

इसमें न तेरा दोष है, न तेरे पति का.  तेरे पति ने पिछले जन्म में सफेद मोतियों का दान किया था और तूने ढेर सारे काले उड़द मांगने वालों की झोलियों में डाले थे.

 

 

सफेद मोतियों के दान के फल से तेरे पति को सुंदर पत्नी मिली है और तुझे उड़दों जैसा बदसूरत आदमी मिला है. ऐसी हालत में तेरे लिए यही अच्छा है कि तू अपने पति के घर चली जा और मन में किसी भी प्रकार की बुरी भावना लाये बिना उसी से सांतोष कर, जो तुझे मिला है, ओर आगे के लिए खूब अच्छे-अच्छे काम कर. उसका फल तुझे अगले जन्म में अवश्य मिलेगा.”

 

ज्योतिषी की बात उस लड़की की समझ में आ गई और वह खुश होकर अपने पति के पास चली गई. वे लोग आंनंद से रहने लगे.

 

 

moral story in hindi

 

३- new moral stories in hindi क साधु था , वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था ,”जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे.”

 

बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीँ देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे.

 

एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसनेँ उस साधु की आवाज सुनी , “जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे.” ,और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया.

 

उसने साधु से पूछा -“महाराज आप बोल रहे थे कि ‘जो चाहोगे सो पाओगे’ तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैं जो चाहता हूँ?”

 

साधु उसकी बात को सुनकर बोला – “हाँ बेटा तुम जो कुछ भी चाहता है मैँ उसे जरुर दूंगा, बस तुम्हे मेरी बात माननी होगी. लेकिन पहले ये तो बताओ कि तुम्हे आखिर चाहिये क्या?”

 

युवक बोला-” मेरी एक ही ख्वाहिश है मैं  हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूं.  “

 

साधू बोला ,” कोई बात ननहीं मैं  तुम्हे एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे मोती बनाना चाहोगे बना पाओगे .”

 

और ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ आदमी की हथेली पर रखते हुए कहा , ” पुत्र , मैं तुम्हे दुनिया का सबसे अनमोल हीरा दे रहा हूं, लोग इसे ‘समय’ कहते हैं, इसे तेजी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लो और इसे कभी मत गंवाना, तुम इससे जितने चाहो उतने हीरे बना सकते हो “

 

युवक अभी कुछ सोच ही रहा था कि साधु उसका दूसरी हथेली , पकड़ते हुए बोला , ” पुत्र , इसे पकड़ो , यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है , लोग इसे “धैर्य ” कहते हैं , जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम ना मिलेंटो इस कीमती मोती को धारण कर लेना , याद रखन जिसके पास यह मोती है, वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है. “

 

 

युवक गम्भीरता से साधु की बातों पर विचार करता है और निश्चय करता है कि आज से वह कभी अपना समय बर्वाद नहीं करेगा और हमेशा धैर्य से काम लेगा . और ऐसा सोचकर वह हीरों के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम शुरू करता है और अपने मेहनत और ईमानदारी के बल पर एक दिन खुद भी हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनता है.

 

मित्रों , ‘समय’ और ‘धैर्य’ वह दो हीरे-मोती हैं जिनके बल पर हम बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं. अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय को बर्वाद ना करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य से काम लें.

 

 

 moral story in hindi

 

4- moral story in hindi for speech – एक भिखारी किसी स्टेशन पर पेन्सिल  से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था.  एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे में  50 रूपये डाल दिया, लेकिन उसने कोई पेन्सिल नहीं  ली.

 

 

उसके बाद वह ट्रेन में  बैठ गया.  डिब्बे का दरवाजा बंद  होने ही वाला था कि व्यवसायी  एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और कुछ पेन्सिल  उठा कर बोला, “मैं कुछ पेन्सिल लूँगा.  इन पेंसिलों की कीमत है, आखिरकार तुम एक व्यापारी हो और मैं  भी.” उसके बाद वह युवा तेजी से ट्रेन में  चढ़ गया.

 

कुछ वर्षों बाद, वह व्यवसायी एक पार्टी में गया.  वह भिखारी भी वहाँ मौजूद था. भिखारी नेँ उस व्यवसायी को देखते ही पहचान लिया, वह उसके पास जाकर बोला-” आप शायद मुझे नहीं पहचान रहे है, लेकिन मैं  आपको पहचानता हूँ.”

 

उसके बाद उसने  उसके साथ घटी उस घटना का जिक्र किया.  व्यवसायी  ने  कहा-” तुम्हारे याद दिलाने  पर मुझे याद आ रहा है कि तुम भीख मांग रहे थे.  लेकिन तुम यहाँ सूट और टाई मेँ क्या कर रहे हो?”

 

भिखारी ने  जवाब दिया, ” आपको शायद मालूम नहीं  है कि आपने  मेरे लिए उस दिन क्या किया.  मुझे पर दया करने की बजाय मेरे साथ सम्मान के साथ पेश आये. आपने कटोरे से पेन्सिल  उठाकर कहा, ‘इनकी कीमत है, आखिरकार तुम भी एक व्यापारी हो और मैं  भी’

 

 

आपके जाने के बाद मैं  बहूत सोचा,  मैं  यहाँ क्या कर रहा हूँ? मैं  भीख क्यों मांग  रहा हूँ? मैंने अपनी जिंदगी  को सवारने  के लिये कुछ अच्छा काम करने  का फैसला लिया.

 

 

मैंने  अपना थैला उठाया और घूम-घूम कर पेंसिल बेचने लगा . फिर धीरे -धीरे मेरा व्यापार बढ़ता गया , मैं कॉपी – किताब एवं अन्य चीजें भी बेचने लगा और आज पूरे शहर में मैं इन चीजों का सबसे बड़ा थोक विक्रेता हूँ.

 

मुझे मेरा सम्मान लौटाने के लिये मैं  आपका तहेदिल से धन्यवाद देता हूँ क्योंकि उस घटना  ने आज मेरा जीवन ही बदल दिया .”

 

मित्रोंज , आप अपने बारे में  क्या सोचते है? खुद के लिये आप क्या राय खुद पर जाहिर करते हैं ? क्या आप अपनेँ आपको ठीक तरह से समझ पाते हैँ ? इन सारी चीजों  को ही हम indirect रूप से आत्मसम्मान कहते हैं.

 

 

दुसरे लोग हमारे बारे में  क्या सोचते हैं  ये बाते उतनी मायने नहीं  रखती या कहें  तो कुछ भी मायने नहीं  रखती लेकिन आप अपने बारे में क्या राय जाहिर करते हैं , क्या सोचते हैं  ये बात बहूत ही ज्यादा मायने  रखती है.

 

याद रखें  कि आत्म-सम्मान की वजह से ही हमारे अंदर प्रेरणा पैदा होती है या कहें  तो हम आत्मप्रेरित होते हैं.  इसलिए आवश्यक है कि हम अपने बारे में एक श्रेष्ठ राय बनाएं और आत्मसम्मान से पूर्ण जीवन जीएं.

 

 

 

मित्रों यह moral story in hindi . प्रेरक कहानियां  कहानी आपको कैसी लगी कमेन्ट में बताएं और moral story in hindi  की तरह की और भी कहानी के लिए इस ब्लॉग को सबस्क्राइब जरुर करें और दूसरी कहानी नीचे पढ़े.

 

1- hindi moral story for child ७ मोरल कहानियां

2- kids moral story in hindi . बच्चों की कहानियाँ

3- hindi moral story for child ७ मोरल कहानियां

4- hindi ki best kahaniya

 

 

 

About the author

MoralAbhi

Leave a Comment