Short Moral Story in Hindi For Class 3 / जिसकी जैसी सोच पढ़ें यह हिंदी कहानी

Moral Story in Hindi For Class 3  एक गाँव के दो साधु अपनी – अपनी झोपड़ियां बनाकर रहते थे।  दिन के समय वे दोनों गाँव में जाकर भिक्षा माँगते और बचे समय में ईश्वर का भजन करते।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
एक दिन भारी तूफ़ान आया और उनकी झोपड़ियां टूट गयी और काफी हद तक बर्बाद हो गयीं। पहला साधू यह सब देखकर दुःख के मारे विलाप करने लगा और बोला, ” हे प्रभु ! तुमने ऐसा क्यों किया? क्या मेरी पूजा, भक्ति का यही फल है? “
 
 
 
 
 

जिसकी जैसी सोच 

 
 
 
 
 
 
इस तरह वह पूरा दिन भगवान् कोसते  हुए एक पेड़ के नीचे बैठा रहा।  शाम को जब दूसरा साधु घर लौटा और अपनी झोपड़ी का यह हाल देख मुस्कुराते हुए भगवान् का धन्यवाद करते हुए कहने लगा, ” हे प्रभु ! ऐसे भीषण तूफ़ान में जब पक्के और मजबूत मकान ध्वस्त हो जाते हैं ऐसे में आपने मेरी झोपड़ी बचा ली।  इसे अधिक क्षति नहीं होने दी।  सचमुच आप महान हैं प्रभु। “
 
 
 
 
Moral Story in Hindi For Class 3 Written

Moral Story in Hindi For Class 3

 
 
 
 
 
 
इससे यह सीख मिलती है कि प्रत्येक घटना के दो पहलू होते हैं।  आप उसका बुरा निष्कर्ष निकालते हैं कि अच्छा निष्कर्ष निकालते हैं, यह आप पर निर्भर करता है।
 
 

 

Moral value stories in Hindi for class 3

 

 

2- एक जंगल में एक विशाल हाथी रहता था . उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था . सभी जानवर उससे डरते थे . यहाँ तक कि शेर भी उससे दस कदम दूर ही रहता था .      

 

 

 

एक दिन की बात है. एक मैना को ढेर सारा दाना रास्ते मिला . वह बड़ी खुश हुई और धीरे – धीरे सारा दाना अपने घोसले में जमा कर लिया . वह बहुत खुश थी और ख़ुशी का इज़हार करते हुए गाना गाने लगी . तभी उधर से वह हाथी गुजरा .      

 

 

 

 

उसे मैना की ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हुई . उसने बोला, ” ऐ मैना, आज तू बड़ी खुश दिख रही है . गीत गाना बंद कर . नहीं तो ……” हाथी अभी चुप भी नहीं हुआ था कि मैं बोल पड़ी, ” नहीं तो क्या ? मैं अपने घोसले में गा रही हूँ ना . तुम्हे क्या दिक्कत हो रही है भला . ”      

 

 

 

” अच्छा ऐसी बात है ले फिर अब घोसला ही तोड़ देता हूँ ” ऐसा कह कर हाथी पेड़ को हिलाने लगा . मैना डर गयी . उसने कहा , ” हाथी भैया, मुझे माफ कर दो . मुझसे गलती हो गयी . माफ़ कर दो प्लीज ”      

 

 

 

 

 

हाथी बड़ा खुश हुआ. उसे तो दूसरों को तकलीफ देने में बड़ा मजा आता था . ठंडी का मौसम शुरू होने वाला था . हलकी – हलकी ठंडी पड़ रही थी . सभी जानवर धुप सेंकने के लिए इकठ्ठा हुए थे .      

 

 

 

 

आपस में गपसप चल रही थी. तभी हाथी की चर्चा शुरू हो गयी . लोमड़ी ने कहा, ” हाथी से बड़ा बचकर रहना पड़ता है . जब देखो परेशान करता रहता है ” .      

 

 

 

 

तभी मैना ने भी अपनी बात बताई. तब तक खरगोश बोला, ” अभी परसों की बात है . हाथी ने मेरा गाजर छीन लिया. ” तब तक चींटी बोली, ” सही बात है . वह बहुत ही बदमाश है . उसे सबक सिखाना पडेगा . ”      

 

 

 

 

सभी जानवर एक – दुसरे का मुंह देखने लगे . बन्दर बोला, ” चींटी बहन, अरे सोच – समझ कर बोलो . वह हाथी है वह भी विशालकाय और ताकतवर . शेर भी उससे दस कदम दूर ही रहता है . ”      

 

 

 

 

 

” तो क्या हुआ?  मैं नहीं डरती हाथी से ” चींटी ने कहा . तभी वहाँ हाथी भी पहुँच गया . उसने कहा अच्छा तुम मुझसे नहीं डरती . अभी एक फूंक मारूंगा तो ना जाने कहाँ जाकर गिरोगी .      

 

 

 

 

” मैं भी चाहूँ तो आपको हिला सकती हूँ .  ना विश्वास हो तो रख लो मुकाबला . हो जाएगा फैसला . एक बात और अगर मैं जीत गयी तो तुम किसी जानवर को परेशान नहीं करोगे . बोलो मंजूर है . ” चींटी ने कहा .      

 

 

 

 

 

बाकी जानवर तो बस चींटी का मुंह ही देख रहे थे . हाथी जोर से हंसा और बोला एक बार और सोच लो . ” मैंने सोच लिया है . कल मुकाबला रखा जाएगा . तुम भी अपनी ताकत दिखाना और मैं भी . ” चींटी बोली .        

 

 

 

 

” ठीक है. ” हाथी ने भी हुंकार भरी.  कल दिन आया . सभी जानवर तय समय पर पहुँच गए . हाथी ने अपनी ताकत दिखाना शुरू किया. उसने पास खड़े पेड़ों को उखाड़ दिया. पत्थर इधर – उधर फेंक दिए . उसकी ताकत देखकर सभी हैरान रह गए . सबको यकीं हो गया चींटी तो हारेगी ही .      

 

 

 

 

 

अब चींटी की बारी आई. उसने कहा, ” हाथी भैया, ” आप एक जगह खड़े हो जाओ . मैं आपको हिलाकर रख दूंगी . ” हाथी घमंड में चूर था . वह एक जगह खडा हो गया .      

 

 

 

 

 

चींटी आगे बढ़ने लगी . अचानक वह इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि उसे कोई देख ही नहीं पाया . सब लोग हैरान हो गए कि आखिर चींटी कहाँ गयी . इतने में हाथी चिल्लाने लगा . अरे मेरे सूंड में क्या हो रहा है . बहुत दर्द हो रहा है .      

 

 

 

 

तब चींटी बोली, ”  हाथी भईया, मैं ही हूँ . बताओ क्या हाल है ? अब पता चला दूसरों को भी ऐसी ही तकलीफ होती है . और काटूँ ? ” अरे नहीं …बस मैं अपनी हार मानता हूँ . अब मैं किसी को भी परेशान नहीं करूंगा . तब चींटी सूंड से बाहर निकल आई और सबने चींटी की खूब प्रसंशा की .      

 

 

 

 

मित्रों सबके अन्दर एक ना एक ताकत छुपी होती है . जरुररत होती है उसे पहचानने की और सही जगह और सही समय पर उपयोग करने की . अगर हम ऐसा करने में सफल हो गए तो बड़े से बड़ा ताकतवर भी हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा .        

 

 

 

3- Small Moral stories in Hindi for class 3  स्वर्ण रसायन

 

 

 

एक बार की बात है. मगध देश के राजा अपने मंत्री संग राज्य के दौरे पर निकले . जंगल में उन्होंने एक संत को देखा . राजा उनके पास पहुंचकर बोले, ” मैं यहाँ का राजा हूँ. आप कुछ स्वर्ण मुद्राएँ अपने पास रख लीजिये और जंगल के बाहर सुखी से अपना जीवन बितायिये . ”      

 

 

 

 

 

इसपर ऋषि बोले, ” राजन ! मैं तो संत हूँ . मुझे इन स्वर्ण मुद्राओं से क्या लाभ . आप इसे किसी जरूरतमंद को दे दीजिये . उसका भला हो जाएगा . ”      

 

 

 

” लेकिन आपको भी अपनी जरुरत  के लिए धन की आवश्यकता होती होगी ? तो फिर आप इन स्वर्ण  मुद्राओं को क्यों ठुकरा रहे हैं ? ” राजा ने कहा .      

 

 

 

 

इसपर संत बोले, ” पुत्र, हम स्वर्ण रसायन से ताम्बे को स्वर्ण बना देते हैं  और इसी से अपनी आजीविका चलाते हैं . ” यह बात सुनकर राजा हैरान रह गये .      

 

 

 

 

इसपर राजा बोले, ” कृपया मुझे भी यह कला सिखा दीजिये . इससे मैं अपने राज्य को सुखी करूंगा . राज्य में कभी भी गरीबी नहीं होगी . प्रजा सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करेगी .”      

 

 

 

 

संत ने कहा, ” मैं आपको यह विद्या तो सिखा दूंगा लेकिन आपको मेरे साथ एक वर्ष रहकर साधना करनी पड़ेगी . ” राजा सोच- विचार कर राज्य का भार मंत्री को सौंप दिया और संत के साथ साधना में लीं हो गए .      

 

 

 

 

एक वर्ष के बाद संत ने राजा से कहा, ” राजन ! आईये अब मैं आपको विद्या सिखा दूँ  . ” इस पर राजा ने कहा, ” अब मुझे स्वर्ण रसायन सिखाने की आवश्यकता नहीं रह गयी है, क्योंकि इस एक वर्ष में आपने मेरे पुरे अस्तित्व को ही अमृत रसायन में परिवर्तित कर दिया है . अब आप मुझे बस आशीष दीजिये कि मैं प्रभु का नाम लेते हुए निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर सकूँ . ”      

 

 

 

 

संत से उन्हें आशीर्वाद दिया और राजा फिर से अपने राज – काज में लग गए . उनका राज तेजी से सुख – सुविधाओं से भरने लगा और प्रजा सुखी से रहने लगी .      

 

 

 

 

4- Short moral story in Hindi for class 3 – शीतलहर चल रही थी. मंगलवार का दिन था. मीलों चलकर एक किसान मंदिर पहुंचा तो देखा कि दरवाजा बंद था. किसान ने ऊँची आवाज लगाई ” अरे कोई है.पुजारी जी कहा हो ?”        

 

 

 

 

 

पुजारी जी बाहर आये तो किसान को देखकर हैरान थे. वे बोले ” आज ठण्ड बहुत अधिक थी. मुझे तनिक भी भी उम्मीद नहीं थी कि आज कोई प्रार्थना के लिए आएगा. अतः मैंने कोई तैयारी नहीं की.केवल भगवान की धूप अगरबत्ती ही दिखाई.”
 
 
 
 
 

अब तुम ही बताओ केवल एक आदमी के लिए इतना सबकुछ तैयारी करना ठीक रहेगा क्या ? क्यों ना आज हम बाकी पूजा रहने दें और घर जाकर आराम करें.          

 

 

 

 

इसपर किसान बोला ” पुजारी जी ! मैं तो एक साधारण  किसान  हूँ. मैं रोज कबूतरों को दाना खिलाने आता हूँ . अगर एक भी कबूतर होता है तो भी मैं दाना जरुर खिलाता हूँ.”      

 

 

 

 

पुजारी जी यह बात सुनकर थोड़े शर्मिंदा हुए और मन ही मन भगवान से क्षमा मांगी और तैयारी में लग गए. पूरा मंदिर साफ किया. आरती की थाली सजाई. प्रसाद तैयार किये.        

 

 

 

 

 

अन्य पूजा के सामान तैयार करने के बाद पुरे विधि-विधान से पूजा की. इस सबमें २-३ घंटे का समायी लग गया. पूजा खत्म होने के बाद पुजारी जी ने किसान कर्त्तव्य का भान कराने के लिए धन्यवाद दिया.          

 

 

 

 

इसपर किसान  कुछ नहीं बोला और चुपचाप वहाँ से जाने लगा. इसपर पुजारी जी बोले ” क्या हुआ, पूजा में कोई कमी रह गयी है क्या ?”  इसपर किसान बोला ” मैं क्या बताऊँ पुजारी जी, मैं तो एक साधारण सा  किसान  हूँ. लेकिन जब मैं कबूतरों को दाना डालने आता हूँ और अगर एक ही कबूतर आता है तो मैं सारा दाना एक ही कबूतर को नहीं खिला देता हूँ. ”      

 

 

 

 

 

पुजारी जी को अपनी गलती का एहसास हो गया था कि सिर्फ कर्त्तव्य निभाना ही जरुरी नहीं है बल्कि परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना भी आवश्यक है.        

 

 

 

 

उन्होंने सोचा कि मुझे एक आदमी के हिसाब से ही तैयारी करके पूजा शुरू कर देनी चाहिए थी, जबकि मैं तमाम लोगों के हिसाब से तैयारी करने लगा.          

 

 

 

 

मित्रों यह Short moral story in Hindi for class 3  आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Best moral stories in Hindi for class 3 की तरह की दूसरी कहानी को नीचे पढ़ें और moral story in Hindi class 3rd को शेयर भी करें।  

 

 

Submit Your Story / Guest Post  

 

 

1-

2-

3-

4- Moral Stories in Hindi For Class 10 / क्या होती है सच्ची मित्रता ? जरूर पढ़ें

5- Top 10 moral stories in Hindi

6- Hindi story with props for class 2  

 

 

 

 

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *