Moral Stories in Hindi For Class 9 PDF / मत्स्य अवतार की कहानी

Moral Stories in Hindi For Class 9 जब पृथ्वी परमहाप्रलय आया।  पृथ्वी पूरी तरह जलमग्न हाे रही थी. हर जगह सिर्फ और सिर्फ जल ही दिखायी दे रहा था।  तब भगवान श्री विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण करके सर्व प्रकार के जीव जन्तुओं, पेड़ पाैधाे मानव आदि काे राजा सत्यव्रत मनु के द्वारा इकठ्ठा करवाया। यह श्री मत्स्य अवतार  नारायण हरि का प्रथम अवतार है… यह कथा इस प्रकार है…..

 

 

 

 

एक बार जब ब्रह्मा जी साे रहे थे ता उनकी नाक से “हयग्रीव” नामक राक्षस निकला और वाे वेदाे काे चुराकर गहरे अथाह सागर में जा छुपा। इधर पृथ्वी पर प्रलय का समय निकट आ गया था।

 

 

 

 

Moral stories in Hindi for class 9 with moral मत्स्य अवतार की कहानी 

 

 

 

 

तब वेदाे काे बचाने के लिए प्रभु विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया  और उन्हाेने राजा सत्यव्रत मनु की परीक्षा लेने की साेची क्याेकि वेदाे के चाेरी हाे जाने के कारण चाराे तरफ अधर्म का बाेलबाला हाे गया था।

 

 

लेकिन राजा तक अधर्म पाप रूपी अंधकार नही पहुंच सका था। वे पुण्य रूपी प्रकाश से चमक रहे थे। राजा सत्यव्रत बहाेत ही पुण्यात्मा और दयालु हृदय के थे।

 

 

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एक राेज प्रतिदिन की भांति राजा कृतमाला नामक नदी के किनारे ध्यान कर रहे थे।  ध्यान के बाद राजा नदी मे स्नान हेतु गये। स्नान के पश्चात उन्हाेने तर्पण के लिए अंजलि में जल लिया ताे जल के साथ ही एक छाेटी सी मछली उनके हाथ मे आ गयी।

 

 

 

सत्यव्रत ने मछली काे नदी में छाेड़ दिया ताे मछली विनम्रता पूर्वक बाेली …..हे राजन! नदी के बड़े जीव हम जैसे छाेटे जीवाें काे मारकर खा जाते हैं।

 

 

 

मुझे यहां बहाेत डर लग रहा है।   कृपा कर के मेरे प्राणाे की रक्षा करें। मुझे किसी सुरक्षित स्थान पर ले चलें। मैं आपके शरण में आयी हूं। राजा काे उस पर दया आ गयी।

 

 

 

उन्हाने उस मछली काे कमंडल में रख लिया लेकिन कुछ ही देर मे मछली ने कहा, ” महाराज मुझे यहा से निकालिये… निकालिये महाराज।  “राजा ने देखा ताे वे आश्चर्यचकित रह गये। जाे मछली अभी एकदम छाेटी सी थी। वह अब इतनी बड़ी हाे गयी थी कि कमंडल में उसका रहना मुश्किल हाे गया था।

 

 

 

 

अब राजा ने उसे कमंडल से निकालकर एक पानी भरे घड़े में रख दिया लेकिन यह क्या कुछ देर के बाद फिर मछली का शरीर बढ़ गया और उसने फिर से आवाज लगायी।

 

 

 

 

अब सत्यव्रत ने उसे घड़े से निकालकर एक सराेवर में रख दिया लेकिन यह क्या सराेवर भी छाेटा पड़ गया। राजा आश्चर्यचकित हाे गये. लेकिन वह मछली उनके शरण में आयी थी ऐसे में उनका कर्तव्य था कि वे उसकी रक्षा करें।

 

 

हिंदी कहानी 

 

 

 

उन्हाेने उसे सराेवर से निकालकर नदी में रख दिया लेकिन वहा भी वही हाल रहा। अब राजा दुविधा में पड़ गये कि अब कहा रखा जाये। उन्हाेने साेच विचार कर मछली काे नदी से निकालकर समुद्र मे डाल दिया।

 

 

 

 

लेकिन वह मछली इतनी बड़ी हाे गयी कि सागर भी उसके लिए छाेटा पड़ गया। फिर मछली ने आग्रह किया कि हे राजन! यह समुद्र भी अब छाेटा पड़ रहा है… मेरे रहने की कुछ और व्यवस्था करें।

 

 

 

अब राजा सत्यव्रत मनु पूरी तरह विस्मृति हाे गये।  वे विस्मयाभिभूत हाेकर हाथ जोड़कर बाेले। आपने ताे मुझे दुविधा में डाल दिया है।  जिस तीव्रता से आपका शरीर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है उससे यह प्रतीत हाेता है कि आप काेई साधारण मछली नही हैं।

 

 

 

आप जरूर काेई अवतार हैं। आप अपने दिव्य रूप का दर्शन देकर मेरी दुविधा का निवारण करें। मै आपकी शरण मे आया हूँ। तब भगवान श्री नारायण हरि ने अपना दिव्य रूप प्रकट किया और अपने इस अवतार की वजह बतायी।

 

 

 

श्री हरि ने कहा कि सत्यव्रत इस समय सम्पूर्ण जगत में पाप अधर्म का साम्राज्य फैला है। चाराे तरफ भयंकर घृणा भरी हेै।  लाेग एक दूसरे के खून के प्यासे हाे गये हैं। व्यभिचार, मादक पदार्थाे का सेवन आम बात हाे गयी है।

 

 

 

हे राजन मै आपकी परीक्षा ले रहा था। आप उन अधर्माे से दूर है। आपमें दया भाव है। हे राजन! ठीक सातवे दिन यह पृथ्वी जलमग्न हाे जायेगी। जल के सिवा यहा और कुछ दृष्टिमान नही हाेगा।

 

 

 

 

साे पुन: जीवन चक्र शुरू करने हेतु आप सभी जीव जन्तुओं, पशु पक्षियाें के एक एक जोडे़ तथा अनाजाे औषधियाें और सप्तरिषियाे के साथ  नाव पर बैठ जाइयेगा।

 

 

 

मेरी प्रेरणा से नाव आपके पास आ जायेगी और वासुकि नाग के माध्यम से उस नाव काे मेरे मत्स्य रूपी अवतार से बांध लेना। मैं  उसी समय आपकाे फिर दिखुगां और आपकाे आत्मतत्व की ज्ञान  दूगां।

 

 

 

उसके बाद प्रभु अंतर्ध्यान हाे गये। सत्यव्रत ने यह बात रानी और सप्तर्षि काे बतायी और तैयारियाे में जुट गये। समुद्र के दूसरी तरफ हयग्रीव वेदों की रक्षा कर रहा था।  उसने जब इतनी विशालकाय मछली देखी तो वह डर  गया।

 

 

 

वह कुछ कर पाटा इसके पहले मछली ने उस पर हमला कर दिया।  इससे वह काफी घायल हो गया, लेकिन फिर भी लड़ता रहा।  कुछ ही देर में भगवान् विष्णु के मत्स्य अवतार ने  हयग्रीव काे मारकर उससे वेदाे काे आजाद करा लिया।

 

 

 

इसके बाद मछली ने वेदों को पी लिया और ब्रह्मा जी के पास गए जो कि अभी भी सो रहे थे। ठीक सातवे दिन प्रलय का दृश्य उतप्न हाे गया।  भयंकर वर्षा हाेने लगी। ऐसा प्रतीत हाे रहा था मानाे आकाश और धरती के बीच वर्षा रूपी सेतु बन गया हाे।

 

 

 

सब कुछ जल मे समा जाने काे आतुर था। सत्यव्रत सप्तरिषियाे काे लेकर जीव जन्तुओं, अनाज आदि के बीजाे के साथ तट पर आ गये। तब प्रभु की प्रेरणा से नाव तट पर आ पहुंची। सब लाेग उसमे सवार हाे गये।

 

 

 

प्रलय रूपी सागर मे नाव हिचकाेले खाने लगी। सभी सप्तर्षि, सत्यव्रत मनु  श्री नारायण हरि की प्रार्थना करने लगे।  प्रार्थना से प्रसन्न हाेकर भगवान ने सबकाे दर्शन दिया।

 

 

 

उसके बाद उन्होंने कहा कि वासुकि नाग के माध्यम से नाव को मेरे सींगों से बाँध दो।  नाव के बंध जाने के बाद भगवान् विष्णु के मत्स्य अवतार ने तूफ़ान के समय नाव को सुरक्षित रखा और वेदों का ज्ञान मनु और सप्तऋषियों को दिया।

 

 

 

जब तूफ़ान समाप्त हुआ तो हर जगह जल ही जल था। जब कुछ समाप्त हो चुका था। मछली ने नौका को हिमवन नामक पर्वत पर छोड़ दिया और उसके बाद उस पर सवार लोगों ने पुनः नए युग का आरम्भ किया। इस तरह से भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर वेदाे की रक्षा की और सृष्टि की रचना की।

 

 

 

Moral – जब – जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है भगवान उस पाप को ख़त्म करने के लिए अवतार लेते हैं।  अतः हमें भगवान पर विश्वास करते हुए अपने कार्य करते रहना चाहिए।  

 

 

 

Long Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

 

2-  भारत चमत्कारों और आस्था का देश है।  यहां आपको तमाम ऐसे मंदिर, स्थान, साधु – संत मिल जाएंगे जो कि अपने आप में अन्य से अलग होंगे।

 

 

चाहे वह बिजनौर का काली मंदिर हो या वाराणसी के ऐसे तमाम चमत्कारी जगह है या फिर हिमाचल के बिजली महादेव का मंदिर सभी अपने – आप में रहस्यों से भरे हैं।

 

 

आज हम ऐसे एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आश्चर्य से भरा हुआ है।  बात हो रही है राजस्थान के बाड़मेर जिले के किराडू मंदिर की।  राजस्थान ना जाने ऐसे कितने रहस्यों को खुद में समेटे है।

 

 

 

किराडू मंदिर राजस्थानके बाड़मेर से 39 किलोमीटर दूर हाथमा गांव मे है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहाे की शैली में बना है. यह 5 मंदिराे की श्रृंखला है। जिसमें एक भगवान् विष्णु के और बाकी भगवान् शिव का है। इसे राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है।

 

 

 

इतिहास में हाथमा काे किरततूप के नाम से जाना जाता है जाे कि परमार वंश की राजधानी थी। यह शहर एक समय में खूब फला फूला था।  यहा लाेग खुशी खुशी रहते थे। धन-धान्य से भरा पूरा शहर था और किराडू मंदिर भी अन्य मंदिराे की भाति ही था।

 

 

 

एक किवदंती के अनुसार  एक साधु के श्राप के कारण किराडू का यह मंदिर शापित हाे गया। किवदंती के अनुसार इस मंदिर में एक साधू अपने शिष्य के साथ रहते थे जाे की महा तपस्वी थे।

 

 

 

एक बार उन्हाेने भिक्षाटन के लिए मंदिर से बाहर जाते समय अपने शिष्य काे मंदिर के देखभाल के लिए वही छोड़ दिया और गांव वालों से आग्रह किया कि जिस तरह से वे मेरी सेवा करते थे, वैसे ही मेरे शिष्य की भी करें। फिर वे भिक्षाटन के लिए प्रस्थान कर गये।

 

 

 

लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत। इसी बीच शिष्य की तबीयत बहाेत ज्यादा खराब हो गयी। गांव वालों ने शिष्य की तरफ काेई ध्यान नहीं दिया। केवल एक कुम्हारन शिष्य की सेवा में लगी रही।

 

 

 

जब साधु मंदिर वापस मंदिर आये ताे देखा कि उनके शिष्य की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गयी है और वह बहुत ही कमजोर हाे गया है। उन्हाेने देखा कि उस कुम्हारन के अलावा गांव के किसी भी व्यक्ति ने शिष्य की सुध नहीं ली थी।

 

 

 

साधु बहाेत क्रोधित हाे गये। उन्हाेने क्रोध में कुम्हारन से कहा “तूने मेरे शिष्य की सेवा की, तेरे हृदय में करुना का भाव है… जा भाग जा… अब मेरे क्रोध से इस गांव का काेई व्यक्ति नही नहीं बचेगा।

 

 

 

सबका हृदय पत्थर का हाे गया है ताे यही सही…. अब सब लाेग पत्थर के हाे जायेंगे..जा भाग जा.. पीछे मुड़कर मत देखना नही ताे तू भी पत्थर की हाे जायेगी।

 

 

 

साधु के इन कथनाे काे सुन कुम्हारन डर के मारे भाग खड़ी हुयी लेकिन कुछ दूर जाने पर उसके मन में काैतुहल हुआ। उसे यह जानने की जिज्ञासा  हुई कि लाेग पत्थर के हुये कि नहीं  कहीं साधु का श्राप झूठा ताे नही हाे गया।

 

 

 

Small Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

वह इस दृश्य काे देखने के लिए जैसे ही पीछे की ओर मुड़ी… वह भी पत्थर की हाे गयी। आज भी उसकी वह पत्थर की मूर्ति शापित किराडू मंदिर के भयावह अतीत काे बयां करती है।

 

 

 

कहा जाता है कि आज भी अगर काेई उस किराडू मंदिर में शाम ढलने के बाद रुक जाता है ताे वह पत्थर बन जाता है…… 900 वर्षाें के बाद भी यह मंदिर आज भी शापित है।

 

 

 

Moral – यदि आप कोई कार्य नहीं कर पाने की स्थिति में हों तो उसे मना कर देना चाहिए।  यदि गाँव वालों ने पहले ही साधू से यह कह दिया होता कि हम आपके शिष्य की सेवा कर पाने में असमर्थ हैं तो शायद यह घटना नहीं होती। 

 

 

 

 

3- Moral Stories in Hindi For Class 9 Wikipesia एक कंजूस धोबी के पास एक गधा था. धोबी उस गधे से खूब काम लेता, लेकिन गधे के चारे का कोई प्रबंध नहीं करता. बस रात को गधे को चरने के लिए खुला छोड़ देता. निकट में कोई चारागाह नहीं था.

 

 

 

जंगल में बड़े जानवरों का भय था. इससे गधा बहुत ही कमजोर हो गया था. एक रात उसकी मुलाक़ात एक गीदड़ से हुई. गीदड़ बोला, ” अरे, गद्धूराम तू तो बड़ा कमजोर हो गया है बे. तेरा मालिक खाने-पीने को कुछ नहीं देता है क्या?”

 

 

 

गधे ने दुखी स्वर में सारी रामकहानी कह सुनाई.गीदड़ को बड़ी दया आई. वह बोला, ” सुन भाई! आज से अपुन तेरा दोस्त है. अब समझ तेरे गरीबी के दिन ख़त्म हो गेले हैं.अभी अपुन जैसा बोलरेला है वैसा इच का. तू मस्त मोटा-तगड़ा आइटम हो जाएगा बॉस.”

 

 

 

गधा गीदड़ के पीछे चल पड़ा. एक गुप्त मार्ग से होते हुए दोनों एक सब्जी के बाग में आ पहुंचे. वहाँ तरह- तरह की सब्जियां उगी हुई थीं. खीरे, ककड़ी, टोरी, गाजर, बैगन की बहार थी. गधा तो दंग रह गया. उसने पेट भरकर सब्जिया खाई और डकार लेते हुए बोला,” भाई मज़ा आ गया. बड़े दिनों बाद पेट भरा है”.

 

 

 

अबे धीरे बोल नहीं तो इधर का वाचमैन लोग बहुत डेंजर है. इधर इच तेरी समाधि बना देंगा. अभी उन दोनों की यह रोज की आदत हो गयी. धीरे- धीरे गधे की तबियत सुधरने लगी. यह देखकर गधे का मालिक भी बड़ा खुश था. अब गधा दोगुना काम करता. वह अपनी भुखमरी के दिन भूल गया था.

 

 

 

एक रात गधे खूब छककर सब्जियां खायी. उसकी तबियत एकदम मस्त हो गयी.वह झूमने लगा और अपना मुंह ऊपर उठाकर कान फड़फडाने लगा. यह देखकर गीदड टेंशन में आ गया. वह बोला, “ब्रो, क्या होरेला है तुमको. तबियत तो बराबर है ना”.

 

 

 

“ओये यार, आज अपुन का गाने का मन कररेला है”. गधा बोला

 

 

 

ओये तुम तो हमारी भाषा बोलता है रे बाबा.बात इधर गाने का नहीं रे. तुमको अपुन बताया था ना इधर का वाचमैन लोग बहुत डेंजर है. सिर्फ खाने का पीने का मस्त रहने का. लेकिन गीदड़ के लाख समझाने पर भी गद्धूराम नहीं माना.

 

 

 

गधा गीदड़ से झगड़ा करने लगा. इधर गीदड़ को वाचमैनो के जागने का एहसास हो गया था. उसने गद्धूराम को बोला” भाई देख, अभी तक मैंने तेरा गाना कभी सूना नहीं. तू मेरे सामने पहली बार गायेगा तो तेरे सम्मान के वास्ते अपुन माला लेकर आता है.

 

 

 

मेरे आने के पहले तुम मत गाना.” यह कहकर गीदड़ तेजी से भागा और इधर गधे का तो मौसम बन गया था. उसने रेंकना शुरू किया. उसकी आवाज सुनकर चकिदार लाठी लेकर दौड़ पड़े और उसकी बड़ी पिटाई कर दी. अब गधा तो गया ही बेचारे गीदड़ का भोजन भी गया.

 

 

 

 

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