Moral Stories in Hindi For Class 7 / भरोसा करिये यह हैंडपैंप चलता है हिंदी कहानी

Moral Stories in Hindi For Class 7 Short एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में फंस गया .उसके पास मौजूद खाने – पीने की वस्तुएं धीरे – धीरे समाप्त होने लगीं और कुछ ही दिनों में उसके पास पानी की एक बूंद भी नहीं बची थी.

 

 

 

 

वह मन ही मन यह जान चुका था कि अगर कुछ घंटों में उसे पानी नहीं मिला तो उसकी मृत्यु निश्चित है. लेकिन उसे भगवान् पर यकीं था. उसे भरोसा था की कोई ना कोई चमत्कार अवश्य होगा और उसे पानी जरुर मिलेगा.

 

 

 

 

Moral Stories in Hindi For Class 7 With Moral

 

 

 

 

वह कुछ दूर किसी तरह चला तो उसे एक झोपड़ी दिखाई दी. उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था क्योंकि इसके पहले वह कई बार रेगिस्तान में भ्रम के कारण धोखा खा चुका था और इससे वह और भी अधिक रेगिस्तान में फंसता चला गया.

 

 

moral stories in hindi for class 7 Written

 

 

 

लेकिन अब उसके पास भरोसा करने के आलावा कोई चारा नहीं बचा था. वह किसी तरह उस झोपड़ी की तरफ बढ़ने लगा. वह जैसे जैसे आगे बढ़ता गया, उसकी उम्मीद बढती गयी.

 

 

 

उसे लगा कि इस बार भाग्य उसका अवश्य ही साथ देगा.  वह मंजिल तक पहुँच चुका था. सचमुच वहाँ झोपड़ी थी . पर यह क्या ? वह झोपड़ी तो सालों से वीरान प्रतीत हो रही थी.

 

 

 

 

फिर भी पानी की उम्मीद में वह झोपड़ी में घुसा और अन्दर का नजारा देख वह चौंक गया.    अन्दर एक हैंडपंप लगा हुआ था. उसके अन्दर एक नयी ऊर्जा आ गयी थी.

 

 

 

 

प्यास से तड़प रहा वह व्यक्ति जल्दी जल्दी हैन्डपम्प चलाने लगा. लेकिन यह क्या? वह हैन्डपम्प तो कब का सुखा हुआ प्रतीत हो रहा था.  वह बहुत निराश हो गया और निढाल होकर वहीँ बैठन गया और ऊपर आसमान की तरफ देखकर शायद यह सोचने लगा कि अब उसे कोई नहीं बचा सकता है.

 

 

 

 

तभी उसकी नजर झोपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल पर पड़ी.   वह किसी तरह से उसे निकाला और पानी पीने ही वाला था कि उसने बोतल पर चिपके एक कागज़ को देखा.

 

 

 

 

जिसपर लिखा था कि इस पानी का प्रयोग हैंडपंप को चलाने में करें और वापस पानी भरकर रखना ना भूलें. अब वह एक अजीब सी स्थिति में फंस गया था. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

 

 

 

 

फिर उसने उस बोतल का पानी इस यकीं इस भरोसा के साथ हैंडपंप में डालना शुरू किया कि किसी ना किसी ने तो इसका इस्तेमाल अवश्य ही किया होगा.

 

 

 

पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और दो तीन बार पम्प चलाने के बाद उसमें से ठंडा पानी निकलने लगा. यह उसके लिए किसी अमृत से कम नहीं था.

 

 

 

 

उसने जी भरकर पानी पीया और फिर उस बोतल को भरकर वही टांग दिया. जब वह उस बोतल को टांग रहा था तो उसे सामने एक कांच की बोतल दिखाई दी . उसमें पेन्सिल और कागज़ रखा हुआ था.

 

 

 

 

उत्सुकतावाश उसने उसे खोला तो उसमें उस रेगिस्तान से निकालने का नक्शा बनाया हुआ था. उसने उस रास्ते को याद कर लिया और झोपड़ी से बाहर गया.

 

 

 

 

वह कुछ दूर आगे बढ़ा ही था कि कुछ सोचकर वापस झोपड़ी में आया और उस पानी से भरी हुई बोतल को उतार कर उसके कागज़ पर लिखा “मेरा भरोसा करिए , यह हैंडपंप चलता है “.

 

 

 

अनुशासन और करुणा में सामंजस्य

 

 

 

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2- Small Moral Stories in Hindi For Class 7- एक युवक ने इस दुनिया से तंग होकर साधू बनने की सोची. वह एक मठ में पहुंचा और साधू जी से बोला ” महाराज , मैं इस दुनिया से तंग आ चुका हूँ और अब मैं मोह – माया त्यागकर साधू बनना चाहता हूँ. लेकीन बाबा एक दिक्कत है.

मुझे शतरंज की बुरी लत है और यह किसी कीमत पर नहीं छूट रही है और मुझे लगता है कि शतरंज खेलना पाप है. अब आप ही बताओ मैं क्या करूँ “.

 

बाबा बोले , हाँ यह पाप तो है, लेकिन उनसे मन भी बहलता है. बाबा बोले चल आ जा बेटा थोड़ा शतरंज ही खेल लिया जाए . पहले तो युवक बड़े ही आश्चर्य में पडा .
फिर उसने शतरंग की विसात बिछाई और बाबा से पहला दाव चलने को कहा. इसपर बाबा ने कहा बेटा पहला डाव तू ही चल लेकिन मेरी एक शर्त है कि हम शतरंज की एक बाजी खेलेंगे और अगर मैं हार गया तो सदा के लिए मठ छोड़कर चला जाऊँगा और तुम्हे मेरा स्थान लेना होगा.
युवक ने देखा साधू बाबा वास्तव में गंभीर थे. अब तो यह शतरंज की बाजी युवक के लिए जिंदगी और मौत के सामान हो गयी. क्योंकि वह साधू बनना चाहता था और इससे बढियां मौक़ा क्या मिलता , इसलिए उसे यह डर भी सता रहा था कि कहीं वह हार नहीं जाए.
खेल शुरू हो गया. युवक के माथे पर दबाव साफ़ जाहिर हो रहा था. वह बार बार पसीना पोंछ रहा था. युवक कई कठोर चालें चली और महंत की शुरू मीन तो कुछ ठीक खेली लेकिन फिर उनका खेल कमजोर हो गया.
युवक इस खेल का पारंगत था, लेकिन जब उसने देखा साधू की कई चालें कमजोर रहीं तो वह जानबूझकर खराब खेलने लगा और तभी महंत ने बिसात ठोकर मार कर जमीन पर गिरा दी.
 महंत ने युवक से कहा ” तुम्हे जितना सिखाया गया था तुम उससे कहीं अधिक जानते हो . पहले तुमने अपना पूरा ध्यान अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए लगाया, लेकिन तभी तुम्हारे मन में करुणा जाग उठी और तुमने जानबूझ कर खराब खेलना शुरू कर दिया “.

 

महंत ने फिर कहा तुम्हारा इस मठ में स्वागत है क्योंकि तुम जानते हो कि कैसे अनुशासन और करुणा में सामंजस्य बिठाना है और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन कार्य है.

Very Short Moral Stories in Hindi For Class 7 साधू और डाकू 

 

 

3- एक साधू और एक डाकू यमलोक पहुंचे . यमराज ने कहा बताईये आपको नरक और स्वर्ग में से क्या दिया जाए और क्यों. दोनों आश्चर्य में पड़ गए कि क्या माजरा है.

इन सब का निर्णय तो स्वयं यमराज करते हैं. कुछ सोचकर डाकू ने यमराज से कहा प्रभु मैंने जिंदगी भर पाप कर्म किये, लोगों को तड़पाया तो यहाँ किस अधिकार से स्वर्ग की मांग कर सकता हूँ .
अतः दंड की कामना करता हूँ और साधू ने कहा प्रभु मैंने जप – तप किये , पूण्य का कार्य किया अतः मुझे स्वर्ग की सुख सुविधाएं चाहिए .
यमराज ने डाकू को साधू की सेवा करने का आदेश दे दिया. डाकू ने सिर झुकाकर यम की आज्ञा स्वीकार कर ली. लेकिन साधू ने इसपर आपत्ति की. उसने कहा प्रभु! इस पापी के स्पर्श मात्र से ही मैं अपवित्र हो जाऊँगा. मेरी सारी तपस्या तथा भक्ति का पुण्य निरर्थक हो जाएगा.
यह सुनते ही यमराज जी क्रोधित होते हुए बोले – इतने पाप करनेवाला और भोले व्यक्तियों को लुटने वाला इतना विनम्र हो गया और तुम्हारी सेवा करने को तैयार हो गया और एक तुम हो जो इतने वर्षों तक तपस्या करने के बाद भी अहंकार से मुक्त नहीं हो सके और यह न जान सके कि सबमें एक ही आत्मतत्व समाया हुआ है. तुम्हारी तपस्या अधूरी है. अतः अब तुम इस डाकू की रोज सेवा करोगे. यही तुम्हारा प्रायश्चित होगा .
इस कहानी का सन्देश यह है कि तपस्या वही प्रतिफलित होती है , अहंकार मुक्त हो . वस्तुतः अहंकार का त्याग ही तपस्या का मूल मंत्र है और यही भविष्य में प्रभु कृपा प्राप्ति का आधार बनाता है.

4- Moral value stories in Hindi for class 7 –जुता इसे हर कोई पहनता है. जुते से आदमी का रंग और ढंग दोनों ही बदल जाता है. अगर यह पैरों में रहे तो आदमी का ढंग बदल जाता है और अगर यह सर पर पड़े तो रंग बदल जाता है. वैसे भी आजकल जुटा बड़े ही फॉर्म में है.

 

कब ना जाने किस नेता का रंग बिगाड़ दे कुछ कहा नहीं जा सकता है. चलिए छोडिये यह बाते….क्या आपने कभी गौर किया है कि रंग और ढंग बिगाड़ने वाला यह जुता आया कहां से….चलिए हम आपको एक कहानी बताते है…जिससे आपको पता चलेगा कि यह जूता आया कहां से.

 

बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक बहुत ही बड़ा राजा था. उसके राज्य की प्रजा बहुत ही खुश थी. वह अक्सर अपने क्षेत्रों मीन देख-रेख के लिए जाता है.
इस बार वह राज्य के उत्तरी क्षेत्र में बहुत दिनों सी नहीं गया था. उसे अपने खबरियों के माध्य्यम से उत्तरी क्षेत्र में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी मिल रही थी.

एक दीन राजा ने अचानक ही उत्तरी क्षेत्र में जाने की योजना बनाई. वह जब राज्य के उत्तरी क्षेत्र में पहुंचा तो उसे बहुत सी खामियां दिखीं. उसने मंत्रियों और दरबारियों को खूब फटकार लगाई और तुरन्त ही सारे कार्यों को पूरा करने का आदेश दिया.

 

उन  सभी कमियों में से एक बड़ी कमी थी  कि सड़कें बहुत ही खराब हो गयी थीं. जगह-जगह कंकड़ – पत्थर निकल आये थे. तब उसने अपने मंत्रियों को तुरंत ही पूरी की पूरी सड़क पर चमडा बिछाने का आदेश दे दिया.

अब सभी मंत्री चिंता में  पड़ गए. आखिर इतने जल्दी इतनी बड़ी सड़क पर चमडा कैसे बिछाया जाए. तब एक दरबारी ने हिम्मत करके कहा राजन अगर गुस्सा ना करें तो एक बात कहूँ. तब राजा ने कहा ठीक है बोलो.

 

 

 

 

तब उस दरबारी ने कहा कि महाराज रोड को बनाने का प्रस्ताव पारित हो गया है. अगर रोड को अन्य तरीकों से बेहतर करके लोगों को के पैरों को चमड़े के टुकड़ों से ढकवा दिया जाए तो अच्छा रहेगा और उससे लोगों को गर्मियों में जलती हुयी सडकों, बारिश में फिसल न और सर्दियों में भी आराम मिलेगा.

राजा को यह बात पसंद आई और उन्होंने उस दरबारी को सम्मानित किया. इसका  मोरल  यह है कि कोई भी आइडिया छोटी नहीं होती, बस उसे समझाने और समझने वाला चाहिए.

 

 

Moral stories in Hindi for class 7th

 

 

5- एक धर्मात्मा ने गाँव के मोड़ पर एक राहगीरों के लिए एक धर्मशाला का निर्माण किया. जिससे आने जाने वाले लोग इसमें आराम करके अपनी थकान मिटा सके . लोग आते जाते रहे और वहाँ का दरबार जब कोई व्यक्ति वहाँ से जाता तो उससे यह जरुर पूछता कि आपको यहाँ कैसा लगा और इसे बनाने वाले का उद्देश्य क्या है.

 

 

उसने किस उद्देश्य से इस धर्मशाला का निर्माण कराया है. इसपर सबके अपने – अपने विचार थे. सभी अपनी दृष्टि , अपनी सोच के हिसाब से इसके निर्माण का उद्देश्य बताते.

 

 

चोरो ने कहा कि चोरी करके यहाँ चोरी के सामन को गुप्त रखा जा सकता है. व्यभिचारियों ने कहा यहाँ भोग विलास कहा जा सकता है. कर चोरों ने कहा कि छपे से बचने के लिए यहाँ कुछ दिन छुप कर रहा जा सकता है. साधू स्संतों ने कहा कि यहाँ बैठकर शान्ति से साधना की जा सकती है. चित्र कलाकारों ने कहा यहाँ एकांत का है अतः हम अच्छी कलाकृति बना सकते हैं.

 

 

 

कवियों ने कहा कि यहां विरह के गीत लिखे जा सकते हैं . विद्यार्थियों ने कहा कि यहाँ बहुत अच्छे ढंग से अध्ययन किया जा सकता है. इसी तरह हर कोई अपनी दृष्टि , अपनी सोच के आधार पर अपने अनुभव साझा करता.

 

 

यह बात दरबान ने धर्मात्मा को बतायी . धर्मात्मा ने कहा जिसका जैसा व्य्याक्तित्व होता है वैसी ही उसकी दृष्टि , उसकी सोच होती है. वह हर चीज को उसी नजरिये से देखता है .

 

 

लेकिन एक बात तो तय है कि धर्मशाला बनाने का का हमारा उद्देश्य जरुर सफल हो गया, लेकिन हमें इस बात को ध्यान रखना होगा की यह कुकर्मों का अड्डा ना बनकर सत्कर्मों की पाठशाला बने, जहां अनेक सोच और उद्देश्य को रखने वाले लोग अपनी सोच और उद्देश्य को साझा कर सके.

 

 

 

मित्रों यह Long Moral Stories in Hindi For Class 7 है।  यह बहुत ही अच्छी कहानी है।  उम्मीद है कि आप लोगों को अच्छी लगी होगी।Best Moral Stories in Hindi For Class 7 की तरह की दूसरी कहानी नीचे पढ़ें और Moral Stories in Hindi For Class 7 को अपने फेसबुक पर शेयर भी करें।

 

 

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