Moral Stories in Hindi For Class 5 And 6 pdf / बच्चों की कहानियां नई

Moral Stories in Hindi For Class 5 एक जगह पर वेदिका नाम की एक धनी स्त्री रहती थी। वह बहुत शांत और सौम्य थी और इसलिए वह दूर – दूर तक प्रसिद्द थी।

 

 

 

उसके  घर में एक नौकर था।  उसका नाम विशाल था। वह बहुत ही कुशल और वफादार था। एक दिन नौकर ने सोचा, ” सभी लोग कहते हैं मेरी मालकिन बहुत ही सौम्य है।  वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं होती हैं।  ऐसा भला कैसे हो सकता है ? हो सकता है मैं अच्छा  काम करता हूँ इसलिए वह मुझपर गुस्सा  होती होंगी। मुझे यह पता लगाना होगा कि वह सच में गुस्सा होती हैं या नहीं। ”

 

 

 

 

अगले दिन नौकर काम पर  थोड़ा देर से आया। महिला ने पूछा, ” आज देर कैसे हो गयी ? ” इसपर वह बोला, ” कोई ख़ास बात नहीं थी। ” महिला ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसे नौकर की बात अच्छी नहीं लगी।

 

 

 

Very Short Moral Stories in Hindi For Class 5 

 

 

 

 

दूसरे दिन नौकर फिर से देर आया।  महिला ने फिर से उससे पूछा, ” आज देर क्यों हुई ? ” इसपर नौकर ने कहा, ” कोई ख़ास बात नहीं। ” महिला को बात बहुत बुरी लगी।  वह नाराज हो गयई, लेकिन कुछ नहीं बोली।

 

 

 

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तीसरे दिन नौकर फिर से देर से आया। महिला बहुत क्रोधित हो गयी और उसे एक डंडा दे मारा।  इससे नौकर का सर फट गया और वह तेजी बाहर की तरफ भागा। यह बात आग की तरह बाहर फ़ैल गयी और वेदिका की ख्याति मिट्टी में मिल गयी।

 

 

 

 

Moral – कठिन परिस्थितियों में भी जो दृढ़ रहता है, वही अपनी बुराइयों पर विजय पा सकता है। 

 

 

 

 

2- बादशाह अकबर जंग जाने की तैयारी कर रहे थे। फ़ौज युद्ध के लिए सज्ज हो चुकी थी।  बादशाह भी अपने घोड़े पर सवार होकर आ गए।  उनके साथ उनके विश्वस्त बीरबल भी थे।

 

 

 

बादशाह ने फ़ौज को जंग के मैदान में कूच करने का निर्देश दिया। बादशाह आगे -आगे और पीछे विशाल फ़ौज चल रही थी।  तभी रास्ते में बीरबल  को कुछ जिज्ञासा हुई।  उन्होंने बीरबल से पूछा, ” बता सकते हो युद्ध में विजय किसकी होगी? ”

 

 

 

 

इसपर बीरबल बोले, ” जहाँपनाह ! इस प्रश्न का उत्तर मैं जंग – ए – मैदान में ही दूंगा। ”

 

 

 

कुछ समय में फ़ौज जंग के मैदान में थी। वहा पहुँचने के बाद बीरबल बोले, ” महाराज! अब मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि जीत आपकी ही होगी। ”

 

 

 

 

यह तुम इतने विश्वास से कैसे कह सकते हो, जबकि दुश्मन बहुत मजबूत है और उसकी सेना भी बहुत विशाल और मजबूत है…बादशाह ने शंका जाहिर की।

 

 

 

 

तब बीरबल बोले, ”  महाराज दुश्मन हाथी पर सवार है और हाथी तो सूंड से मिटटी अपने ऊपर ही फेकता है और वह अपनी ही मस्ती में रहता है। जबकि आप घोड़े पर हैं।  घोड़ा कभी भी धोखा नहीं दे सकता है। घोड़ा गाज़ी मर्द होता है। ” बीरबल का कथन सत्य हुआ और उस युद्ध में विजय अकबर की ही हुई।

 

 

 

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3- Short Moral Stories in Hindi For Class 5 एक पुजारी थे।  लोग उनमें  अत्यंत ही श्रद्धा और विश्वास रखते थे। पुजारी प्रतिदिन मंदिर जाते और दिनभर वहीँ रहते।  सुबह से ही लोग मंदिर आने लगते और मंदिर में सामूहिक प्रार्थना होती थी।

 

 

 

जब प्रार्थना संपन्न हो जाती तो पुजारी उन्हें उपदेश देते।  उसी नगर  गाड़ीवान रहता था। वह  दिनभर अपने काम  में व्यस्त रहता था।  इसी से उसकी रोजी -रोटी चलती थी।

 

 

 

यह सोचकर उसे  बहुत दुःख होता था  .   वह सोचता था, ”  मैं हमेशा अपना पेट पालने  लिए काम – धंधे  रहता हूँ, मंदिर नहीं जा,  जबकि बहुत सारे लोग मंदिर जाते हैं।  मुझ जैसा पापी शायद ही इस  होगा। ”

 

 

 

वह आत्मग्लानि  मंदिर जाकर  पुजारी को यह बात बतायी और  उसने पुजारी जी  से पूछा, ” मैं पूजा –  पाठ ना कर पाने की वजह से बहुत ही दुखी हूँ।  क्या अपना काम छोड़कर नियमित मंदिर में प्रार्थना करना आरम्भ कर दूँ ? ”

 

 

 

 

पुजारी ने गाड़ीवाले की बात बड़े ही ध्यान से सुनी और  उसके बाद उन्होंने कहा, ” अच्छा  यह बताओ, तुम रोज ही अपनी गाडी से तमाम लोगों को एक गाँव  से दूसरे गाँव में पहुंचाते हो तो क्या तुमने कभी किसी बूढ़े, अपाहिज  और दीन – दुखियों को मुफ्त में एक गाँव से दूसरे गाँव तक छोड़ा है ? ”

 

 

 

 

इसपर उस गाड़ीवाले ने कहा, ” ऐसा अवसर बहुतों बार आता है।  जब ऐसे असहाय लोगों को मुफ्त में यात्रा करवाता हूँ। ” यह सुनकर पुजारी बहुत ही खुश होते हुए बोले, ”  तब तुम्हे अपना व्यवसाय छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है।  ऐसे असहाय लोगों की सेवा करना,  किसी भी तरह से उनकी मदद करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।  तुम सबसे अधिक ईश्वर की भक्ति कर रहे हो। ” पुजारी की बात सुनकर वह गाड़ीवान बहुत खुश हुआ और  वह फिर से गरीबों की सेवा में और अधिक मन लगाने लगा।

 

 

 

4- एक भिखारी कई दिनों से भूखा प्यासा था।  वह अपनी ज़िन्दगी से परेशान हो गया था।  एक  दिन उसने परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने  का विचार किया।

 

 

 

तभी वहाँ से एक महात्मा गुजरे।  वे नेत्रहीन थे। भिखारी ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाई और कहा, ” मैं अपनी ज़िन्दगी से तंग आ चुका हूँ।  मैं आत्महत्या करना चाहता हूँ। ”

 

 

 

उसकी बात सुनकर महात्मा हंसे और बोले, ” ठीक है।  आत्महत्या कर लो, लेकिन पहले मुझे अपनी एक आँख दे दो।  मैं  हज़ार अशर्फियाँ दूंगा। ” इसपर वह भिखारी बोला, ” कैसी बात  कर रहे हैं ? मैं अपनी आँख कैसे दे सकता हूँ ? ”

 

 

 

 

महात्मा फिर बोले, ” ठीक है।  चलो आँख ना सही अपना एक हाथ ही दे दो।  मैं तुम्हे दस हजार अशर्फियाँ देता हूँ।  ” भिखारी बड़ा असमंजस में पड़ गया और कुछ देर सोचकर बोला, नहीं  मैं अपना हाथ भी नहीं दे सकता हूँ। ”

 

 

 

 

तब महात्मा बोले, ” इस संसार में सबसे बड़ा धन निरोगी काया है।  तुम्हारे हाथ-पाँव, शरीर स्वस्थ है  तो तुमसे बड़ा धनी  कौन हो सकता हैं ? तुमसे गरीब तो मैं हूँ कि मेरे पास आँखे नहीं हैं।  मैंने कभी भी आत्महत्या  के बारे में नहीं सोचा। ” भिखारी ने उन महात्मा से क्षमा मांगी और एक नए  संकल्प से जीवन -यापन करने लगा।

 

 

 

 

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