moral story in hindi

kids moral story in hindi . बच्चों की कहानियाँ

kids moral story in hindi
Written by MoralAbhi

kids moral story in hindi एक समय की बात हैं कि जंगल में एक शेर के पैर में कांटा चुभ गया. पंजे में जख्म हो गया और शेर के लिए दौड़ना असंभव हो गया. वह लंगड़ाकर मुश्किल से चलता.

 

शेर के लिए तो शिकार करने के लिए दौड़ना जरूरी होता है. इसलिए वह कई दिन कोई शिकार न कर पाया और भूखों मरने लगा. कहते हैं कि शेर मरा हुआ जानवर नहीं खाता, परन्तु मजबूरी में सब कुछ करना पडता हैं.

 

लंगड़ा शेर किसी घायल अथवा मरे हुए जानवर की तलाश में जंगल में भटकने लगा. यहां भी किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया. कहीं कुछ हाथ नहीं लगा.

धीरे-धीरे पैर घसीटता हुआ वह एक गुफा के पास आ पहुंचा.  गुफा गहरी और संकरी थी, ठीक वैसी जैसे जंगली जानवरों के मांद के रुप में काम आती हैं.

 

उसने उसके अंदर झांका मांद खाली थी पर चारों ओर उसे इस बात के प्रमाण नजर आए कि उसमें जानवर का बसेरा है. उस समय वह जानवर शायद भोजन की तलाश में बाहर गया हुआ था. शेर चुपचाप दुबककर बैठ गया ताकि उसमें रहने वाला जानवर लौट आए तो वह दबोच ले.

सचमुच उस गुफा में सियार रहता था, जो दिन को बाहर घूमता रहता और रात को लौट आता था. उस दिन भी सूरज डूबने के बाद वह लौट आया। सियार काफी चालाक था. हर समय चौकन्ना रहता था.

उसने अपनी गुफा के बाहर किसी बड़े जानवर के पैरों के निशान देखे तो उसे शक हुआ कि कोई शिकारी जीव मांद में उसके शिकार की आस में घात लगाए न बैठा हो. उसने अपने शक की पुष्टि के लिए सोच विचार कर एक चाल चली. गुफा के मुहाने से दूर जाकर उसने आवाज दी “गुफा! ओ गुफा.”

गुफा में चुप्पी छाई रही उसने फिर पुकारा “अरी ओ गुफा, तू बोलती क्यों नहीं?”

भीतर शेर दम साधे बैठा था.  भूख के मारे पेट कुलबुला रहा था.  उसे यही इंतजार था कि कब सियार अंदर आए और वह उसे पेट में पहुंचाएं. इसलिए वह उतावला भी हो रहा था.

 

सियार एक बार फिर जोर से बोला “ओ गुफा! रोज तू मेरी पुकार के जवाब में मुझे अंदर बुलाती है. आज चुप क्यों है? मैंने पहले ही कह रखा है कि जिस दिन तू मुझे नहीं बुलाएगी, उस दिन मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा. अच्छा तो मैं चला.”

यह सुनकर शेर हड़बड़ा गया.  उसने सोचा शायद गुफा सचमुच सियार को अंदर बुलाती होगी. यह सोचकर कि कहीं सियार सचमुच न चला जाए, उसने अपनी आवाज बदलकर कहा “सियार राजा, मत जाओ अंदर आओ न. मैं कब से तुम्हारी राह देख रही थी.”

सियार शेर की आवाज पहचान गया और उसकी मूर्खता पर हंसता हुआ वहां से चला गया और फिर लौटकर नहीं आया. मूर्ख शेर उसी गुफा में भूखा-प्यासा मर गया.

सीखः सतर्क व्यक्ति जीवन में कभी धोखा नहीं खाता.

 

kids moral story in hindi Story – 2  सुखद मणि 

 

प्राचीनकाल में एक संत थे .  धर्मश्रधा के कारण सदा प्रसन्न रहते, चहेरे से उल्लास टपकता रहता .  चोरों ने समझा उनके पास कोई बड़ी दौलत है, अन्यथा हर घडी इतने प्रसन्न रहने का और क्या कारण हो सकता है ?

 

अवसर पाकर चोंरो ने उनका अपहरण कर लिया, जंगल में ले गए और बोले , हमने सुना है की आपके पास सुखदा मणि है, इसी से इतने प्रसन्न रहते है, उसे हमारे हवाले कीजिये, अन्यथा जान की खैर नहीं .

 

संत ने एक-एक करके हर चोर को अलग-अलग बुलाया और कहा, “चोरों के डर से मैंने उसे जमीं में गाड़ दिया है .यहाँ से कुछ ही दूर पर एक स्थान है . अपनी खोपड़ी के निचे चन्द्रमा की छाया में खोदना, मिल जाएगी .”

संत पेड़ के निचे सो गए . चोर अलग-अलग दिशा में चले गए और जहाँ-तहाँ खोदते फिरे . जरा सा ही खोद पाते की छाया बदल जाती और उन्हें जहाँ-तहाँ खुदाई करनी पड़ती .

 

रात भर में सेकड़ो छोटे-बड़ें गड्डे बन गए, पर कही मणि का पता न लगा . चोर हताश होकर लौट आये और संत पर गलत बात कहने का आरोप लगाकर झगड़ने लगे .

 

संत हँसे, बोले- “मूर्खो ? मेरे कथन का अर्थ समझो .  खोपड़ी तले सुखदा मणि छिपी है, अर्थात धार्मिक विचारो के कारण मनुष्य प्रसन्न रह सकता है .

 

तुम भी अपना दृष्टिकोण बदलो और प्रसन्न रहना सीखो .” चोंरो को यथार्थता का बोध हुआ तो वे अपनी आदतें सुधारकर प्रसन्न रहने की कला सिख गए . यही थी सुखद मणि .

 

   kids moral story in hindi  Story – 3  सोच 

 

तीन राहगीर रास्ते पर एक पेड़ के नीचे मिले.  तीनो लम्बी यात्रा पर निकले थे.  कुछ देर सुस्ताने के लिए पेड़ की घनी छाया में बैठ गए. तीनो के पास दो झोले थे एक झोला आगे की तरफ और दूसरा पीछे की तरफ लटका हुआ था.

तीनो एक साथ बैठे और यहाँ-वहाँ की बाते करने लगे जैसे कौन कहाँ से आया ? कहाँ जाना हैं? कितनी दुरी हैं ? घर में कौन कौन हैं ? ऐसे कई सवाल जो अजनबी एक दुसरे के बारे में जानना चाहते हैं.

तीनो यात्री कद काठी में सामान थे पर सबके चेहरे के भाव अलग-अलग थे.  एक बहुत थका निराश लग रहा था जैसे सफ़र ने उसे बोझिल बना दिया हो.  दूसरा थका हुआ था पर बोझिल नहीं लग रहा था और तीसरा अत्यन्त आनंद में था. एक दूर बैठा महात्मा इन्हें देख मुस्कुरा रहा था.

तभी तीनो की नजर महात्मा पर पड़ी और उनके पास जाकर तीनो ने सवाल किया कि वे मुस्कुरा क्यूँ रहे हैं. इस सवाल के जवाब में महात्मा ने तीनो से सवाल किया कि तुम्हारे पास दो दो झोले हैं इन में से एक में तुम्हे लोगो की अच्छाई को रखना हैं और एक में बुराई को बताओ क्या करोगे ?

एक ने कहा मेरे आगे वाले झोले में, मैं बुराई रखूँगा ताकि जीवन भर उनसे दूर रहू. और पीछे अच्छाई रखूँगा. दुसरे ने कहा- मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उन जैसा बनू और पीछे बुराई ताकि उनसे अच्छा बनू.

 

तीसरे ने कहा मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उनके साथ संतुष्ट रहूँ और पीछे बुराई रखूँगा और पीछे के थैले में एक छेद कर दूंगा जिससे वो बुराई का बोझ कम होता रहे हैं और अच्छाई ही मेरे साथ रहे अर्थात वो बुराई को भूला देना चाहता था.

यह सुनकर महात्मा ने कहा – पहला जो सफ़र से थक कर निराश दिख रहा हैं जिसने कहा कि वो बुराई सामने रखेगा वो इस यात्रा के भांति जीवन से थक गया हैं क्यूंकि उसकी सोच नकारात्मक हैं उसके लिए जीवन कठिन हैं.

दूसरा जो थका हैं पर निराश नहीं, जिसने कहा अच्छाई सामने रखूँगा पर बुराई से बेहतर बनने की कोशिश में वो थक जाता हैं क्यूंकि वो बेवजह की होड़ में हैं.

तीसरा जिसने कहा वो अच्छाई आगे रखता हैं और बुराई को पीछे रख उसे भुला देना चाहता हैं वो संतुष्ट हैं और जीवन का आनंद ले रहा हैं .इसी तरह वो जीवन यात्रा में खुश हैं.

 

kids moral story in hindi Story – 4 

 

एक परिवार था.  जिनके पास बहुत बीघा जमीन थी.  घर में चार लड़के थे.  चारो  खेत में मेहनत मजदूरी करके कमाते थे.  परिवार बहुत बड़ा था जितना वे मेहनत करते, उतना उन्हें मिलता ना था क्यूंकि खेत में पानी की कमी थी और मौसम की मार पड़ती ही जा रही थी.

 

जिसके कारण खाने तक के लाले थे तो बच्चो की पढाई तो दूर की बात हैं. अगर इस बीच कोई बीमार हो जाए तो गरीबी में आटा गीला जैसी बात हो जायें .

 

परिवार बहुत बड़ा था जिस कारण आपसी लड़ाईया भी बढ़ती जा रही थी वैचारिक मतभेद था सभी अपने खेत के लिए कुछ अलग करके कमाना चाहते थे. जिसे देखकर परिवार के मुखियाँ ने खेत को चार बराबर हिस्सों में बाँट दिया और सभी भाईयों को अपने- अपने परिवार की ज़िम्मेदारी सौंप दी ताकि जिसे जो बेहतर लगे वो करे.

अकाल की स्थिती थी. ऐसे में चारो परिवार दुखी थे.  तब ही एक उद्योगपति गाँव में आया.  उसने इन चारो भाईयों के सामने एक प्रस्ताव रखा जिसमे उसने इनकी जमीन मांगी और बदले में जमीन की कीमत के साथ परिवार के जो भी सदस्य काम करना चाहते हैं उन्हें नौकरी का वादा किया.

दुसरे दिन, छोटे भाई ने सभी को विस्तार से पूरी बात बताई और कहा कि वो इस प्रस्ताव के लिए तैयार हैं लेकिन बड़े दोनों भाईयों ने इन्कार कर दिया.

 

उन दोनों ने कहा यह पुश्तैनी जमीन हैं. हमारी पूज्यनीय हैं. भूखे मर जायेंगे लेकिन हम जमीन ना देंगे. छोटे भाई ने बहुत समझाया लेकिन वे नहीं माने.

कुछ दिनों बाद, उद्योगपति ने यह प्रस्ताव अन्य खेत के मालिक को दिया. उन लोगो ने विकट परिस्थितियों एवम बच्चो के भविष्य को देखते हुए, प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.

कुछ समय बाद, उस जमीन पर एक उद्योग बना.  जहाँ कई ग्राम वासियों को नौकरी मिली. साथ ही उस जमीन मालिक को जमीन की कीमत और उसके बच्चो को नौकरी भी मिली.

 

जिससे उन लोगो ने अपना अन्य कारोबार भी शुरू किया और दुसरे शहरों में जमीन भी खरीदी. और उनका जीवन सुधार गया. उन्होंने एक बड़ा सा बंगला बनाया. जिसमे बाग़ को सम्भालने का काम वो चारो करते थे जिन्हें पहले उद्योग का प्रस्ताव मिला था.

एक दिन वो उद्योगपति उस घर में आया और उसने इन चारों को देख कर पहचान लिया और पूछा कैसा चल रहा हैं ? तब सिर झुकारक कहा साहूकार का कर्ज बढ़ गया था जमीन हाथ से चली गई अब मजदुर और बाग़ का काम करते हैं. उद्योगपति ने कहा- अगर आप मान लेते तो यह दशा ना होती.

उस पर छोटे भाई ने करुण स्वर में कहा – अब पछताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत

 

kids moral story in hindi story – 5  निंदा 

 

एक व्यापारी एक नया व्यवसाय शुरू करने जा रहा था लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत ना होने के कारण उसे एक हिस्सेदार की जरुरत थी. कुछ ही दिनों में उसे एक अनजान आदमी मिला और वह हिस्स्सेदार बनने को तैयार हो गया.

 

व्यापारी को उसके बारे में ज्यादा कुछ मालुम नहीं था. अत: पहले वह हिस्सेदार बनाने से डर रहा था किन्तु थोड़ी पूछताछ करने के बाद उसने उस आदमी के बारें में विचार करना शुरू किया.

एक दो दिन बीतने के पश्चात् व्यापारी को उसका एक मित्र मिला जो की बहुत ज्ञानी पुरुष था.  हाल समाचार पूछने के बाद व्यापारी ने उस आदमी के बारें में अपने मित्र को बताया और अपना हिस्सेदार बनाने के बारें में पूछा.  उसका मित्र उस आदमी को पहले से ही जानता था जो की बहुत कपटी पुरुष था वह लोगो के साथ हिस्सेदारी करता फिर उन्हें धोखा देता था.

चूँकि उसका मित्र एक ज्ञानी पुरुष था.  अत: उसने सोचा दूसरों की निंदा नहीं करनी चाहिए और उसने व्यापारी से कहा -” वह एक ऐसा व्यक्ति है जो आसानी से तुम्हारा विश्वास जीत लेगा.” यह सुनने के बाद व्यापारी ने उस आदमी को अपना हिस्सेदार बना लिया. दोनों ने काफी दिन तक मेहनत की और बाद में जब मुनाफे की बात आयी तो वह पूरा माल लेकर चम्पत हो गया.

इस पर व्यापारी को बहुत दुःख हुआ . वह अपने मित्र से मिला और उसने सारी बात बतायी और उसके ऊपर बहुत गुस्सा हुआ इस पर उसके मित्र ने कहा मैं ठहरा शास्त्रों का ज्ञाता मैं कैसे निंदा कर सकता हूँ . व्यापारी बोला- वाह मित्र ! तुम्हारे ज्ञान ने तो मेरी लुटिया डुबो दी.

मोरल : यदि आप के ज्ञान से किसी का अहित होता है तो किसी काम का नहीं है .

 

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1- hindi moral story for child ७ मोरल कहानियां

२-  हिंदी कहानियां

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