Kahani in Hindi Pdf Download / बांके बिहारी के परम भक्त की कहानी हिंदी में

Kahani in Hindi Pdf  एक महिला अपने बच्चे के साथ मार्केट जा रही थी। तभी उसे एक गाड़ी वाले ने टक्कर मार दी और वह भाग गया।  महिला को काफी चोट आई थी और वह सड़क के किनारे पड़ी  दर्द से कराह रही थी और कुछ दूरी पर उसका बच्चा रो रहा था।

 

 

 

 

 

वह अपने बच्चे को चुप कराने की स्थिति में भी नहीं  थी।  दर्जनों लोग वहां से आ – जा रहे थे लेकिन कोई उसकी  मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।

 

 

 

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उनमें से कुछ अगर रुकते  भी तो बस घटना पर अफसोस जताते और वहां से चले जाते। जो भी रुकता उसके मुंह से ही निकलता, ” कौन है बेचारी? कितनी देर से कराह रही है लेकिन कोई आगे  नहीं आ रहा है ” फिर आपस में ही कहते,  कौन आगे आएगा ? जनाब कौन इस लफड़े में फंसे। ”

 

 

 

 

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तभी  सोनपरी वहाँ हवामार्ग  से गुजर थी। उसने जब महिला को इस स्थिति में देखा तो उसे बड़ा दुख हुआ। उसने अपना रूप  बदला और अपनी जादुई शक्ति से एक एंबुलेंस प्रकट किया।

 

 

 

उसने तुरंत ही महिला को उस एंबुलेंस में डाला उसे हॉस्पिटल ले जाने लगी।  तभी एक आदमी ने कहा, “मैडम आप इस लफड़े में क्यों फंस रही है ?”

 

 

 

इस पर सोनपरी बहुत अधिक क्रोधित हो गयी।  उसने कहा, ” किसी की मदद करना किसी लफड़े में पड़ना नहीं होता है। अगर मनुष्य किसी मनुष्य की मदद नहीं करेगा तो फिर उसकी मदद कौन करेगा ? आज इस महिला के साथ ऐसा हुआ है।  कल आपके  साथ भी हो सकता है। ”

 

 

 

सबकी नजरें  नीचे झुक गयी।  सोनपरी उसे जल्द ही हॉस्पिटल ले गई और उसके घर वालों को फोन करके बताया।  थोड़ी ही देर में महिला के घर वाले आ गए।  उन्होंने सोनपरी को धन्यवाद किया। मित्रों अगर आप भी किसी घायल को देखें तो उसकी मदद जरूर करें।

 

 

 

बांके बिहारी के परम भक्त की कहानी हिंदी में

 

 

 

 

2- वृंदावन में एक कथा प्रचलित है कि एक  ब्राह्मण बांके बिहारी का परम भक्त था। एक बार उसने एक महाजन से कुछ रुपए उधार लिए। हर महीने उसे थोड़ा थोड़ा करके वह चुकता करता था।

 

 

 

जब अंतिम क़िस्त  रह गई तब महाजन ने उसे कानूनी नोटिस भिजवाया। उस नोटिस में लिखा था कि ब्राह्मण ने अभी तक एक भी रुपया वापस नहीं लौटाया इसलिए पूरी रकम जांच के साथ वापस करें।

 

 

 

ब्राह्मण बेचारा परेशान हो गया।  महाजन के पास जाकर उसने बहुत सफाई दी।  बहुत अनुनय विनय की लेकिन महाजन बहुत ही धूर्त था।  वह अपने दावे से टस से मस नहीं हुआ।

 

 

 

मामला कोर्ट में पहुंचकर पहुंच गया। कोर्ट में भी ब्राह्मण ने  वही बात कही कि मैंने सारा पैसा चुका दिया है।  बस एक किस्त बाकी रह गई है। इसपर  महाजन ने कहा कि ब्राह्मण  झूठ बोल रहे हैं।

 

 

 

तब कोर्ट ने ब्राह्मण से कहा कि आपके पास कोई गवाह है जिसके सामने आपने  महाजन को पैसे दिए हैं।  ब्राह्मण ने  थोड़ी देर के बाद कहा, ” मेरी तरफ से गवाही बांके बिहारी देंगे। ”

 

 

 

ब्राह्मण को प्रभु पर पूरा विश्वास था और उसके पास इसके अतिरिक्त और कोई उपाय भी नहीं था। अदालत ने गवाह का पता पूछा। तब ब्राह्मण ने कहा, ” बांके बिहारी,  बांके बिहारी मंदिर,  वृंदावन।  ”

 

 

 

कोर्ट ने इस पते पर सम्मन  जारी कर दिया। पुजारी ने मूर्ति के सामने सम्मन रखकर बांके बिहारी से कहा, ” प्रभु आपको गवाही के लिए अदालत जाना है। ठ

 

 

 

 

गवाही के दिन एक बूढ़ा आदमी अदालत पहुंचा और जज के सामने कहा कि, ” हर बार पैसे देते वक्त मैं ब्राह्मण और महाजन के साथ रहता था और उन्होंने वह तारीख भी बताई जिस – जिस दिन पैसे दिए गए थे।  ”

 

 

 

जब अदालत ने महाजन के बही खाते का मिलान किया तो बूढ़े आदमी की बात सच हुई।  रकम दर्ज थी लेकिन नाम फर्जी डाला गया था।  अदालत ने ब्राह्मण को निर्दोष करार दिया।

 

 

 

लेकिन जज के मन में यह उथल – पुथल मची रही कि वह  बूढा आदमी कौन था ? कार्यवाही समाप्त होने के बाद जज ने ब्राह्मण से इस बारे में पूछा तो ब्राह्मण ने कहा, ” वह तो हर जगह मौजूद हैं।  जब कोई मन से उन्हें पुकारता है तो वे आ जाते हैं। ”

 

 

 

इस घटना नी जज को इतना उद्वेलित किया कि वे अपने पड़ से इस्तीफ़ा देकर, घर – परिवार छोड़कर फ़क़ीर बन गए।  बहुत साल बाद वे वृन्दावन लौटकर आए पगला बाबा नाम से।  आज भी वृन्दावन में पगला बाबा का बनवाया हुआ बांके बिहारी का मंदिर है।

 

 

 

3- एक दिन की बात है।  परीलोक पर पाताल लोक का जिन्ह  आक्रमण कर देता है।  वह परीलोक पर कब्जा जमाना चाहता है।  वह अपनी शक्तियों से परी लोक में भारी तबाही मचाता है।

इससे पूरे परीलोक में हाहाकार मच जाता है। इसपर सभी परियां  इकट्ठे होकर लाल परी और रानी परी के पास जाती है और उन्हें इस भीषण तबाही की खबर देती है।
इसके बाद रानी परी, लाल परी और  काली परी तथा अन्य परियों को उस जिन्ह से लड़ने के लिए भेजती  हैं।  लेकिन जिन्ह  की ताकत के आगे सभी परियां  हार जाती हैं।

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उसके बाद उस जिन्ह  से लड़ने के लिए रानी परी खुद जाती है और उस जिन्ह  से पूछती है आखिर तुम्हें क्या चाहिए ? तुम इस परीलोक पर आक्रमण क्यों कर रहे हो ?

 

 

तब वह जिन्ह  बोलता है, ” मैं परीलोक  पर कब्जा चाहता हूं।  मैं तुम परियों को अपनी दासी बनाना चाहता हूं।”  तब  रानी परी कहती  है, ” इसके लिए तुम्हें  मुझसे युद्ध करना पड़ेगा।”
इसपर जिन्ह  जोर से हंसता है और कहता है, ” सभी परियां मुझ से हार चुकी है।  तुम्हें अपनी ताकत पर बड़ा घमंड है। ” तब रानी परी कहती है, ” मैं कोई साधारण परी नहीं हूं। मैं रानी परी हूं। मेरे पास इन परियों से अलग शक्तियां है और मैं तुम्हें हरा दूंगी।  “
जिन्ह  फिर हंसता है और  कहता है, ” ठीक है,  जैसा तुम चाहो।  ” उसके बाद दोनों के बीच घमासान लड़ाई शुरू  जाती है और अंत में रानी परी को भी हार का सामना करना पड़ता है।
पूरे परीलोक पर जिन्ह  का कब्जा हो जाता है।  वह परियों  से बहुत बुरे=बुरे काम करवाता है और उन्हें परेशान करता है। कभी वह  परीलोक पर तबाही मचाने के लिए कहता है तो कभी धरती लोक पर तो  कभी बच्चों को परेशान करने के लिए कहता।
परियां  इससे बहुत दुखी होती है।  यह सब देख कर नन्ही सोनपरी भी बहुत दुखी होती है। वह जिन्ह  को भगाने का उपाय सोचने लगती है। तभी उसे एक आईडिया आता है।
वह जिन्ह  पास जाती है और उससे कहती है, ”  हे जिन्ह,  तुम बहुत अच्छे हो। आपने परियों को  बहुत अच्छा सबक सिखाया है। अब कृपया मेरी एक मदद करो। “
इसपर जिन्ह ने कहा, ” तुम कौन हो और मेरी इस तरह से तारीफ़ क्य्यों कर रही हो और तुम्हे क्या मदद चाहिये ?” तब सोनपरी ने कहा, ” मैं सोनपरी हूँ।  इन परियों ने मेरी माँ को एक बोतल में बंद कर दिया है। “
” लेकिन भला क्यों ? आखिर वह भी तो परी ही थी न।  ” जिन्ह ने सोनपरी से पूछा।  ” हाँ, वह परी ही है लेकिन उन्हें एक ऐसे जादुई हीरे के बारे में पता है जिससे परियों की शक्तियां और भी बढ़ जाती और उसी हीरे को छिनने के लिए वह मेरी माँ पर दबाव बना रही थीं और जब मेरी माँ ले उस हीरे के बारे में नहीं बताया तो परियों ने उन्हें कैद करके एक बोतल में डाल दिया।  अगर आप मेरी माँ को आजाद कराते हैं तो मैं माँ से पूछ कर आपको हीरे के बारे में बता दूंगी।  इससे आप और भी ताकतवर हो जायेंगे। ” सोनपरी ने कहा।

 

 

 

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जिन्ह ने सोनपरी की बात मान ली और वह सोनपरी के साथ चल पड़ा।  सोनपरी एक कमरे में आई और एक बोतल लाकर जिन्ह के पास रख दिया।
जिन्ह ने उस बोतल को देखा और पूछा, ” यह तो खाली बोतल है।  तुम्हारी माँ कहाँ हैं ? ” तब सोनपरी ने कहा, ” मेरी माँ इसी बोतल में हैं।  परियों ने अपनी जादुई शक्ति से उन्हें अदृश्य कर दिया है।  जब कोई इस बोतल में प्रवेश करेगा तभी मेरी माँ उसे दिखेगी।  “
जिन्ह सोनपरी की बातों में आ चुका था।  वह हीरे की लालच में उस बोतल में जा घुसा।  जिन्ह जैसे ही बोतल में घुसा सोनपरी ने उस बोतल का ढक्कन बंद कर दिया।
ढक्कन बंद होते ही जिन्ह उसमें कैद हो गया।  वह बार – बार ढक्कन खोलने को कहने लगा , लेकिन सोनपरी भला क्यों खोलती ढक्कन ? यह सब तो उसका प्लान था।
उसने तुरंत ही बाकी सभी परियों को बुलाया।  जब परियों ने जिन्ह को बंद देखा तो बड़ी खुश हुईं।  उन्होंने उस बोतल को सागर में फेक दिया और सभी ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

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