Hindi Story For Class 2 With Moral Pdf / शैतान बन्दर को मिला अच्छा सबक 

Hindi Story For Class 2 With Moral एक शहर में एक बहुत ही भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा था. मंदिर में लकड़ी का बहुत अधिक काम था सो बहुत सारे मजदूर काम पर लगे थे. इधर उधर लकड़ी के गट्ठर पड़े थे.

 

 

 

मजदूर तेजी से लकड़ी चीरने का काम कर रहे थे. एक दिन की बात है. वहाँ बंदरों एक झुण्ड रहता था जो बड़े ही ध्यान से मजदूरों के कार्य को देखता था, लेकिन उसमें एक बड़ा ही शैतान बन्दर था वह बहुत ही ध्यान से लकड़ी काटने के कार्य को देखता था.

 

 

 

Hindi stories for grade 2 with moral शैतान बन्दर को मिला अच्छा सबक 

 

 

 

एक दिन की बात है सभी मजदूर दोपहर में खाना खाने को गए और एक लकड़ी अधचिरा लठ्ठा वहाँ रखा हुआ था. उसमें मजदूरों ने एक कीला फंसा कर उसे रखा था, जिससे वापस आरी घुसाने में आसानी हो.

 

 

तभी बंदरों का झुण्ड वहाँ आ पहुंचा और उछल कूद करने लगा. शरारती बन्दर सभी चीजों से छेड़छाड़ करने लगा. बंदरों के सरदार सबको ऐसा करने से मना किया.

 

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सारे बन्दर पेड़ों पर चढ़ गए , लेकिन वह शरारती बन्दर उसका आदेश नहीं माना और वहाँ रखे सामानों से छेड़छाड़ करने लगा. तभी उसकी नजर अधचिरे लठ्ठे पर पड़ी.

 

 

 

उसके दिमाग में खुराफात सोची.उसने वहाँ पड़ी आरी उठाई और उस लठ्ठे को काटना शुरू किया. उसमें से ” किर्र – किर्र” की आवाज आई . इससे वह चिढ गया और आरी पटक दी. तभी उसने सोचा इस लट्ठे में कीला क्यों घुसाया हुआ है. उसने उस कीले को निकालना शुरू किया.

 

 

 

वह खूब जोर आजमाइश करने लगा. कभी उछल  कर उधर जाता तो कभी इधर. कीला बहुत ही मजबूती से लगाया जाता. इतनी आसानी से नहीं निकलता है.

 

 

 

लेकिन वह बन्दर इसे अपमान समझ लिया. उसने खूब जोर लगाया और कीला थोड़ा सा हिला. बन्दर को अपनी ताकत पर नाज हुआ. उसने ” खों – खों ” कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.

 

 

उसके बाद उसने फिर से जोर लगाया और किला निकल गया, लेकिन दो पाटों के बीच उसकी पूंछ फंस गयी. वह जोर से चिल्लाया. तभी मजदूर वापस लौटे.

 

 

 

उन्हें देख वह डर गया और भागने के लिए उसने जोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गयी . वह चीखता चिल्लाता वहाँ से भागा. सीख – बिना सोचे – समझे कोई काम नहीं करना चाहिए.

 

 

किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए 

 

 

 

2- Short hindi story for class 2 with moral एक वन में एक बहुत ही बड़ा और क्रूर अजगर था. वह जब भी बिल से निकलता तो सारे जानवर डरकर भागने लगते. एक बार अजगर शिकार की तलाश में था.

 

 

 

अगल बगल के सारे जानवर भाग निकले थे. वह गुस्से से लाल हो गया और फुफकार मारने लगा और इधर उधर आहार की खोज करने लगा. वही नजदीक में एक हिरणी अपने नवजात बच्चों को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर भोजन की तलाश में गयी थी.

 

 

 

अजगर की तेज फुफकार से पत्तियां उड़ने लगी और हिरणी के बच्चे दिख गए. इतना भयानक जानवर देख हिरणी के बच्चे सहम गए और देखते ही देखते अजगर उन्हें निगल गया.

 

 

 

तब तक हिरणी भी आ गयी थी. वह बेचारी असहाय कर भी क्या सकती थी. उसे बड़ा ही दुःख हुआ. उसी जंगल में उसकी दोस्ती एक नेवले से थी. उसने नेवले को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई.

 

 

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इस पर वह बोला, ” बहन मेरा बस चलता तो अभी उस दुष्ट अजगर को मार डालता. लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ. वह तो मुझे एक झटके में मार देगा. लेकिन वहीँ पास में चीटियों की एक बाम्बी है. वहाँ की रानी चींटी मेरी मित्र है. मैं उससे बात क्कारता हूँ. शायद वह कुछ करे.”

 

 

 

हिरणी निराश होकर बोली” तुम तो इतने बड़े जानवर होकर उसका कुछ नहीं कर सकते तो चींटी भला क्या कर पाएगी.” इस पर नेवला बोला ऐसी बात नहीं है.

 

 

 

चींटी के पास बहुत ही बड़ी सेना है और संगठन में बड़ी शक्ति होती है. नेवले की बात से हिरणी को आशा नजर आई. दोनों चींटी के पास पहुंचे और सारी कहानी बताई.

 

 

 

चींटी से कुछ देर सोचा और बोली, ” ठीक है. हम तुम्हारी सहायता करेंगे. उस दुष्ट अजगार को सजा मिलनी ही चाहिए. चींटी ने कहा हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीला रास्ता है.तुम किसी तरह अजगर को उस रास्ते पर आने को मजबूर करो. बाकी काम हम कर लेंगे” नवाले को चींटी पर पूरा विश्वास था. वह तैयार हो गया.

 

 

 

 

अगले नेवला अजगर की बिल के पास और उसे बोली बोलकर उकसाने लगा. क्रोध में अंधा अजगर बिल से निकला. नेवला प्लान के मुताबिक़ उसी संकरे रास्ते की दिशा में दौड़ पड़ा.

 

 

 

 

अजगर भी पीछे चल पड़ा. अजगर जब रुकता तो नेवला उसे और गुस्सा दिलाता और क्रोध में अंधा अजगर फिर से उसे दौड़ाने लगता.इसी तरह नेवला उसे संकरे रास्ते पर आने को मजबूर कर दिया.

 

 

 

संकरे रास्ते से गुजरते ही अजगर की देह छिलने लगी. जब वह उस रास्ते से बाहर निकला तो उसका बदन्न काफी छिल गया था और काफी खून निकल रहा था.

 

 

 

तभी चींटियों की सेना ने अजगर पर हमला कर दिया. चींटियाँ उसके शारीर के नंगे मांस को काटने लगी. अजगर तड़प उठा. वह अपने शरीर को पटकने लगा और इससे उसे और भी घाव होने लगे और चींटियों ने हमला तेज कर दिया. कुछ ही देर में अजगर तड़प – तड़पकर पर गया.

 

 

सीख- संगठन की शक्ति बड़ों – बड़ों को धुल चटा देती है.

 

 

Hindi very short story for class 2 with moral पढ़ें परी टीचर की कहानी हिंदी में

 

 

 

 

3- एक बार की बात है , परीलोक में परियों की राजकुमारी रहती थी .  राजकुमारी बच्चों से बहुत प्यार करती थी .   एक दिन राजकुमारी ने निर्णय लिया कि वो बच्चों के स्कूल के सबसे स्वस्थ बच्चे को ढेर सारे तोहफे व वरदान देगी .

उसने बादलों के पार आसमान में अपने परीलोक से नीचे स्कूल के प्रांगण में देखा और सबसे स्वस्थ बच्चा ढूँढने लगी .  राजकुमारी सोच में पड़ गयी.

 

 

 

 

क्योंकि कुछ बच्चे बहुत सुन्दर, साफ़-सुथरे, तेजोमय और आकर्षक थे, तो कुछ बच्चे बहुत प्रभावशाली, फुर्तीले, निडर और बलशाली थे .   स्कूल के कुछ बच्चे अत्यंत चतुर, समझदार व आज्ञाकारी थे, तो कुछ बच्चे शीघ्र ही अपना पाठ याद कर लेते थे .  सबसे स्वस्थ बच्चा चुनने के लिए परी असमंजस में पड़ गयी .  अतः उसने सोच कि वो बच्चों को और नज़दीक से देखेगी .

 

 

 

 

तब परीलोक से उतर कर, परियों की राजकुमारी नीचे आयी और एक पेड़ के पीछे से छिपकर देखने लगी .  उसने देखा कि , सुन्दरता, समझदारी, तेज, शक्ति, निडरता, स्फूर्ति, चतुराई के बावजूद भी सभी बच्चे स्वास्थ्य संबंधी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे थे .

 

 

 

कुछ बच्चों के दांतों में सडन थी तो कुछ की आँखों में चश्मा लगा था ; कुछ बच्चे हेमोग्लोबिन की कमी से एनीमिक व थके-थके रहते थे, तो कुछ में कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ व दांत कमज़ोर थे ; कुछ बच्चे ज़रुरत से ज्यादा ही मोटे थे तो कुछ बहुत कमज़ोर थे .  वहीं कुछ बच्चे तो पढ़ाई में अपना ध्यान भी केन्द्रित नहीं कर पाते थे .

ये सब देखकर राजकुमारी बहुत उदास हुई और दुःख से रोने लगी .  परियों की राजकुमारी नें अपने प्यारे बच्चों की समस्त स्वास्थय समस्याओं के मूलभूत कारण को खोजने का फैसला किया .

 

जैसे ही मध्यान्ह भोजन की घंटी बजी, परी एक कक्षा के दरवाजे के पीछे छिप गयी .  उसने देखा कि बच्चे अपने टिफिन बॉक्स में चोकलेट, केक, पेस्ट्री , चोको-पाई , ब्रेडजैम,सैंडविच, मैगी , चाऊमीन, फ्रेंच फ्राईज , बर्गर , कुरकुरे, वेफर, पिज्जा, बिस्कुट , कुकीज़ आदि खाने की चीज़ें लाये हैं .

 

परी बहुत चिंतित हुई, क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थों में न तो प्राकृतिक रेशे व पोषक तत्व  होते हैं और न ही संतुलित मात्रा में प्रोटीन व विटेमीन .  साथ ही इन खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंग, कृत्रिम रासायनिक संरक्षक व चटपटे मसालों को मिलाया जाता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं .
परी की आँखों में आंसू आ गए .   अचानक उसे याद आया वो दिन जब कुछ साल पहले भी वो सबसे तंदुरुस्त बच्चे को तोहफे व वरदान देने आयी थी .
तब उसने देखा था कि बच्चों के टिफिन में रंग-बिरंगे अंकुरित अनाज, चौकोर टुकड़ों में कटे खुशबूदार फल जैसे सेब, नाशपाती, पपीता, आम, केला, लाल-लाल गाजर , हरे हरे मटर की सब्जी, गोल-गोल रोटी, मटर पुलाव, आदि खाने की चीजें थीं .

 ये सभी खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर, व प्राकृतिक रेशे से युक्त थे .  पिछली बार परी बहुत खुश हुई थी, क्योंकि तब सभी बच्चे बहुत स्वस्थ व सेहतमंद थे .  तब परी नें सभी बच्चों को ढेर सारे तोहफे, वरदान और आशीर्वाद दिए थे .

 

 

 

 

परन्तु इस बार परी बहुत उदास थी .   बच्चों की विकृत खान-पान की आदतों के कारण वो बच्चों के भविष्य के लिए भी बहुत चिंतित थी .  परी ने सोचा की अपने प्यारे बच्चों को स्वास्थय संबंधी परेशानियों से घिरा छोड़ कर वो अपने परीलोक वापिस कैसे जा सकती है .

 

तभी परी नें अपनी सुनहरी छड़ी घुमाकर स्वयं को बच्चों के स्कूल की एक प्यारी से मधुर, स्नेहमयी, दिशा-निर्देशिका शिक्षिका में बदल लिया .  परियों की राजकुमारी नें फैसला किया की वो प्यारे प्यारे बच्चों के साथ शिक्षिका बन कर तब तक रहेगी जब तक वो बचों की विकृत खान पान की आदतों को बदल नहीं देती और हमेशा हमेशा के लिए उन्हें स्वस्थ जीवन जीने की राह पर चलना नहीं सिखा देती .

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