Hindi Story For Class 1 With Moral Pdf / बच्चों की शिक्षाप्रद कहानियां हिंदी में

Hindi Story For Class 1 With Moral एक जंगल में विशालकाय हाथी रहता था. उसे अपनी ताकत पर बड़ा ही घमंड था. वह जिस तरफ से निकलता वहाँ पेड़ों को तोड़ देता, सामन इधर उधर फेक देता.

 

 

 

उसी जंगल में एक चिड़ा और चिड़ी का जोड़ा रहता था. वह बड़े ही खुश थे. चिड़ी अण्डों पर बैठी अपने नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती.

 

 

 

एक दिन वह मदमस्त हाथी उसी तरफ से गुजरा. उसने वहा खूब उत्पात मचाया. चिड़ा और चिड़ी ने तो उड़कर अपनी जान बचा ली, लेकिन उनके अंडे टूटकर चकनाचूर हो गए और उसी के साथ ही उनक्के सपने भी.

 

 

 

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चिड़ी जोर जोर से रोने लगी. वह कुछ कर भी नहीं सकती थी. तभी वहाँ एक काठफोड़वी आई. वह चिड़ी की सहेली थी. उसने कहा हम ऐसे नहीं बैठ सकते. इस दुष्ट हाथी को सबक सिखाना ही होगा.

 

 

 

चिड़ी रोते हुए बोली ” हम कैसे इस विशालकाय हाथी से मुकाबला कर सकते हैं”. कठफोड़वी ने उसे समझाया ” हमें अपनी शक्ति बढानी होगी. मेरा एक भवरा  मित्र है. हमें उसकी सलाह लेनी चाहिए”.

 

 

 

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     Hindi Story For Class 1 With Moral

 

 

 

सभी भवरे के पास पहुंचे. उसने उन्हें हिम्मत दी और बोला ” हम जरुर बदला लेंगे. मेरा एक मित्र मेढक है. वह मेंढको का राजा है. हमें उसके पास चलना चाहिए. वह बहुत ही बुद्धिमान है. वह जरुर कोई उपाय बतायेगा”.

 

 

 

सभी मेंढक के पास पहुंचे और दुखभरी कहानी सुनाई. रूंधे हुए गले से मेंढक बोला मुझे ज़रा सोचने दो. कुछ समय बाद उसने कहा ” एक बहुत ही अच्छी योजना दिमाग में आई है, लेकिन इसमें सभी को मदद करनी होग”.

 

 

 

सभी तैयार हो गए. मेंढक ने योजना बतायी. सभी चहक उठे. सबने अपने किरदार को बखूबी समझ लिया और अपने मिशन पर जुट गए.

 

 

 

कुछ देर में वह मदमस्त हाथी तोड़फोड़ कर वापस लौट रहा था की इतने में भौरा उसके कान में जाकर गुनगुनाने लगा. राग सुनकर हाथी आँखे बंद कर झुमने लगा, इतने कठफोड़वी ने अपना काम कर दिखाया और उसने हाथी की दोनों आँखे फोड़ दी.

 

 

 

हाथी दर्द से कराह उठा और दिखाए नहीं देने से इधर उधर पागलों सा भागने लगा. इससे उसे चोटें लगीं और वह जोर जोर से चिंघाड़ने लगा और इससे उसे प्यास लगी.

 

 

 

बच्चों की शिक्षाप्रद कहानियां

 

 

 

 

वह पागलों की तरह इधर उधर भागने लगा. अब मेंढक की बारी थी. मेंढक ने अपनी सेना को एक बड़े और सूखे गड्ढे के किनारे बैठ कर टर्राने को कहा.

 

 

 

सभी मेंढक एक साथ टर्राने लगे. तर्राहट सुनकर हाथी ने सोचा यहाँ जरुर कोई तालाव या नदी है. वह बहुत ही वेग से आगे बढ़ने लगा और बड़े ही तेजी से उस गहरे और सूखे कुएं में जा गिरा और उसकी तड़प तड़प कर मृत्यु हो गयी.

 

 

 

सीख- एकता में बल होता है.

 

 

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2-  एक जंगल में एक दुष्ट शेर रहता था. वह जब भी शिकार को निकलता तो बड़ी संख्या में जानवरों को मार डालता था. इससे जंगल में जानवरों की संख्या कम होने लगी.

 

 

 

इससे जंगल के अन्य जानवर बड़े ही चिंतित हुए. उन्होंने एक मीटिंग बुलाई और प्रस्ताव रखा की हम शेर महाराज से जाकर बात करेंगे कि वे एक साथ में इतने जानवरों को ना मारे. वह इतने जानवरों को खाते तो नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में  मारे जाने के कारण जंगल में जानवर बहुत ही कम बचे हैं.

 

 

 

 

लेकिन वह हमारी बात मानेंगे? एक जानवर ने आशंका जताई

 

 

 

“हमें उन्हें जाकर यह बात समझानी होगी और हम उन्हें कहेंगे की उन्हें शिकार करने की कोई आवश्यकता नहीं है. जंगल से रोज एक जानवर उनकी गुफा तक पहुँच जाएगा”  लोमड़ी ने कहा

 

 

 

 

” हाँ अगर ऐसा हुआ तो हम कुछ दिन और भी जी लेंगे ” निराश मन से सियार बोला.

 

 

 

 

तय समय पर सभी जानवर शेर की गुफा के पास पहुंचे. एक साथ इतने जानवर देखकर पहले तो शेर घबरा गया, लेकिन फिर साहस कर तेज  आवाज में बोला, ” क्या हुआ. सभी को आज ही मरना है क्या”?

 

 

 

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तभी हिरन ने हिम्मत कर सारी बात बता दी. शेर ने सोचा बात तो सही है. अगर सारे जानवर मर गए तो मुझे भी भूखा रहना होगा और अगर ऐसा होता है तो मुझे मेहनत भी नहीं करनी होगी.

 

 

 

वह मान गया, लेकिन उसने चेतावनी दी अगर कीसी दिन कोई जानवर नहीं  आया तो पुरे जंगल के सभी जानवरों को मार दूंगा. हिरन ने कहा ऐसा कभी नहीं होगा. इसके बाद नियमित तौर पर एक जानवर शेर के पास जाने लगा और शेर भी मस्त बिना मेहनत के खा खाकर मोटा हो गया.

 

 

 

 

एक दिन एक खरगोश का नंबर आया. वह बड़ा ही चालाक था.  उसने सोचा शेर के हाथों मरने से बढ़िया है बचने की कोई तरकीब निकाली जाए. उसने दिमाग लगाया और उसे एक  बहुत बढ़िया तरकीब मिल गयी.

 

 

 

वह बड़े ही आराम से उछल कूद करते हुए शेर के पास पहुंचा. तब तक काफी देर हो गयी थी. शेर भूख से तड़प रहा था. खरगोश को देखते ही वह गुस्से से बोला, ” लगता है जंगल के जानवर जीना नहीं चाहते हैं. बता तुझे इतना लेट क्यों भेजा. आज सभी जानवरों को मार डालूँगा. एक तो देर से भेजा ऊपर यह पिद्दी सा खरगोश”.

 

 

 

खरगोश ने उसे सलाम किया और बोला, ” इसमें उनका या मेरा कोई कसूर नहीं है. उन्होंने ने और भी छह खरगोश साथ में भेजे थे. लेकिन रास्ते में एक और शेर मिल गया उसने बाकी खरगोशों को मार कर खा गया”.

 

 

 

” एक और शेर ” शेर ने खरगोश की बात को बीच में ही काटकर बोला.

 

 

” जी राजा  साहेब. वह तो मुझे भी मार डालता, लेकिन मैंने उससे कहा कि मैं अपने राजा के पास जा रहा हूँ, तो वह हंसने लगा और बोला सिर्फ मैं ही इस जंगल का राजा हूँ, बाकी लोग मेरी प्रजा हैं. जा अपने राजा को बुलाकर ला.अगर वह डरकर नहीं आया तो कल से कोई भी जानवर उस तक नहीं पहुंचेगा ” खरगोश ने कहा.

 

 

 

गुस्से से लाल शेर बोला, ” चलो मुझे बताओ. कैन है वह दुष्ट? उसे अभी मज़ा चखाता हूँ “. शेर को अपने ताकत पर घमंड हो गया था और वह इस तरह आसानी से मिलने वाला भोजन गवाना नहीं चाहता था.

 

 

 

वह खरगोश के पीछे – पीछे चल दिया. खरगोश उसे एक कुए के पास ले गया और बोला, ” महाराज वह इसी गुफा में राता है. लगता है वह आप पर हमला करने के लिए घात लगा रहा है. आपको आगे बढकर देखना चाहिए “.

 

 

 

शेर जैसे ही आगे बढ़ा उसे कुएं के पानी में उसका ही प्रतिबिंब दिखा, जिसे वह शेर समझ बैठा. उसने गुस्से में दहाड़ लगाईं तो कुएं में आवाज गूंजी और इससे शेर को बहुत ही गुस्सा आया. उसे लगा अन्दर से दुसरे शेर ने दहाड़ लगाईं है.

 

 

 

वह हमला करने के उद्देश्य से कुएं में कूद गया और पहले कुएं की दीवाल से  टकराया और फिर पानी में गिर गया और उसकी मौत हो गयी. खरगोश जंगल वापस लौटा और सबको यह बात बताई. सभी जानवर खरगोश की जय – जयकार करते हुए खुशियाँ मनाने लगे.

 

 

 

 

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3-  एक जंगल में एक शेर रहता था और गीदड़ उसका चमचा था. शेर को शेर की बिरादरी से निकाल दिया गया था. क्योंकि यह सबसे झगड़ा करता था.

 

 

 

शेर शिकार करता और उसे खाने के बाद बचा – खुचा गीदड़ के लिए छोड़ देता. गीदड़ के लिए तो इतना काफी था. वह दिन भर शेर की  चापलूसी करता और मस्त पड़ा रहता.

 

 

एक दिन शेर ने एक बिगडैल सांड से पंगा ले लिया. शेर ने जैसे ही हमला किया सांड ने ऐसी दुलत्ती मारी कि शेर एक पेड़ से जा टकराया. वह जब तक संभलता सांड से उसे सींघ में फंसाकर पेड से रगड़ दिया.

 

 

 

किसी तरह से शेर जान बचाकर वहाँ से भागा. सांड के हमले से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. ऐसे में उसका शिकार करना भी छूट गया. शिकार करना गीदड़ के बस की बात थी नहीं. अब तो फाकों का दौर चल पड़ा.

 

 

 

शेर को यह डर था कि खाने का जुगाड़ ना हो पाने पर गीदड़ उसका साथ ना छोड़ दे. शेर ने एक दिन गीदड़ से कहा, ” देख, मेरा जख्म काफी गहरा है. मैं शिकार कर नहीं सकता और तेरे से होगा…… चल छोड़ जाने दे तुझे बुरा लगेगा…वैसे मैं कह रहा था तेरे से तो शिकार हो ना पायेगा. तू एक काम कर, किसी मुर्ख जानवर को इधर ला. मैं झाड़ियों में छिपा रहूंगा और मौक़ा देखते ही काम तमाम कर दूंगा”.

 

 

 

 

गीदड़ को शेर ककी बात जम गयी. वह मुर्ख जानवर की तलाश में निकल पड़ा. इसी क्रम में वह एक कसबे के बाहर नदी के घाट पर पहुंचा. उसे वहाँ एक मरियल सा गधा दिखा, जो की शक्ल से ही मुर्ख दिख रहा था.

 

 

 

गीदड़ गधे के पास गया और बोला, ” नमस्ते चाचा. का हाल है? सब मस्त है न? बड़े कमजोर हो गए हो. खाना – वाना नहीं खाते हो का”?

 

 

 

गधा रुआंसा सा बोला, ” क्या बताऊँ, हमार मालिक बड़ा ही मक्खीचूस है. काम खूब कराता है और खाने को कुछ नहीं देता है”.

 

 

 

” का बात कर रहे हो चचा? अरे ई मालिक लोग खून चूस लेत हैं. एक काम करो, हमारे साथ जंगल चलो. वहाँ हरी – हरी घास खाकर देह तुम्हारी हरी हो जायेगी.

 

 

 

” अरे ना – ना, राम – राम… हम यहीं ठीक हैं. जंगल में तो जानवर ही हमको चबा जायेंगे. हम जंगल ना जाने वाले” गधे ने तपाक से उत्तर दिया.

 

 

 

” अरे चचा, तुम झूठे ही डर रहे हो. तुम तो जंगल के बाहर रहते हो. तुमको का खबर है जंगल की. जंगल में बाबा बगुला का प्रवचन हुआ था. अब सभी जानवर  शाकाहारी हो गए हैं. बहुत सारे गधे, भैसे और अन्य जानवर जंगल को और चले गए हैं. और बहुत गधियाँ भी गयी है. तुम्हारे लायक बहुत सारी हैं. देख ताक के जीवन बसा लेना”  गीदड़ तो चापलूसी में पीएचडी कर चुका था. उसका रंग गधे पर चढने लगा और गधियों के साथ सुनहरे सपने देखने लगा. कुछ देर सोचकर वह चलने को तैयार हो गया.

 

 

 

 

गीदड़ उसे लेकर उसी झाड़ियों के पास ले गया जहां शेर पहले से छिपा था. लेकिन शेर हमला कर पाता उसके पहले गधे ने शेर की नीली चमकती आँखे देख ली और तेजी से भाग निकला. शेर बोला ” भाई मैं पूरी तरह से तैयार नहीं था. एक बार फिर से कोशिश कर. तू कर लेगा. इस बार नहीं छोडूंगा उसे”.

 

 

 

गीदड़ उस गधे की तलाश में फिर से कसबे में पहुंचा. उसे देखते ही गधा बोला, ” भाई तुम तो कह रहे थे सभी जानवर शाकाहारी हो गए हैं. लेकिन वहाँ शेर क्या कर रहा था”.

 

 

 

” तुम एकदम से भोले ही हो. शाकाहारी हो गए तो क्या जंगल में शेर नहीं रहेंगे. शाकाहारी होने के कारण ही सभी जानवर एक साथ रहते हैं. कोई किसी से डरता नहीं है. वहीँ थोड़ी दूर पर गधी भी थी. तुमने तो उसके सामने गधा जाति की नाक कटवा दी”. गीदड़ ने बड़ी ही चालाकी से कहा.

 

 

 

 

” ओह! ऐसी बात थी. मैं समझ नहीं पाया. चलो चलते हैं. गधी से कुछ बहाना बना लेंगे ” गधे ने कहा.

 

 

 

गीदड़ ने मन ही मन सोचा ” यह तो महा गधा है” , फिर चलो और गीदड़ फिर से उसे उसी झाड़ियों के पास ले गया और शेर पहले से ही तैयार था. उसने गधे का काम तमाम कर दिया.

 

 

 

सीख:- किसी की बातों में ना आकर स्वविवेक का इस्तेमाल करना चाहिए.

 

 

 

 

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