Hindi Stories For Kids Written in Short / बेटी की परिभाषा हिंदी कहानी

Hindi Stories For Kids डाक्टर सिन्हा अभी सुबह का नाश्ता करने ही जा रहे थे कि उनका पर्सनल फोन बज उठा . उन्हें यह समझते देर कि कोई सीरियस केस है .  उन्होंने फोन रिसीव किया .

 

 

 

 

उधर से नर्स ने घबराते हुए बोला …सर जल्दी हास्पिटल आईये …बहुत ही सीरियस केस है . हास्पिटल डाक्टर सिन्हा के घर से थोड़ी ही दूर पर है . डाक्टर सिन्हा नाश्ता करना  छोड़ सीधे हास्पिटल पहुंचे .

 

 

 

 

Hindi stories for kids Panchatantra

 

 

 

सर कोई नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया है ..उसकी हालत बहुत ही सीरियस है . उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है ….नर्स ने घबराते हुए बोला।

 

 

 

 

 

तुम लोग का दिमाग कहाँ रहता है ….कैसे कोई बच्ची को छोड़कर चला गया….सिक्युरिटी कहाँ थी . पकडे क्यों नहीं …ऐसा कहने का का तो डाक्टर का बहुत मन हो रहा था , लेकिन इस समय उस बच्ची को बचाना उनके लिये ज्यादा जरुरी था.

 

 

 

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उन्होंने जल्दी से कृतिम श्वांस लगाकर कुछ इंजेक्शन लगाया और बाहर आये …..वे बड़बड़ा रहे थे …ऐसे भला कोई अपनी बेटी को छोड़ कर जाता है क्या . शर्म नहीं आती ऐसे लोगों को . मिल जाए तो इन्हें फांसी होनी चाहिए . अपने ही बच्चों के साथ यह कैसी घृणा …वह बड़बड़ा रहे थे कि वार्ड ब्यॉय ने उन्हें बताया कि एक एक्सीडेंट का केस है .

 

 

 

 

 

डाक्टर सिन्हा ने देखा तो ज्यादा चोट नहीं आई थी . घुटने में थोड़ी सी चोट लगी थी. उन्होंने मरहम पट्टी की और दवाइयां लिख कर उस बूढी महिला के साथ आई हुई दुबली सी , सांवली लड़की को दे दी .

 

 

 

 

कैसे हुआ यह ? सिन्हा जी ने उस लड़की से पूछा

 

 

 

 

डाक्टर साहब …..वह मैं सुबह पूजा के लिए फुल तोड़ने गयी थी और मां वहीँ बठी थी . तभी वह उठकर घुमने लगीं …शायद बैठे – बैठे बोर हो रही थी . तभी अचानक से गली में से एक बाइक सवार आया और दादी को टक्कर मार दी .

 

 

 

घर में और कौन है ? डाक्टर का अगला प्रश्न था . कोई नहीं  सर …..पिताजी  बहुत पहले गुजर गए …….मामा – मामी हैं , वे १० – १५ दिन में आ जाते हैं …बाकी गाँव के लोग बहुत अच्छे हैं .

 

 

 

 

ओह ….. ये दवाइयां लिख दी है मैंने इसे ले लेना और शायद से एक्स – रे भी करवाना पड़ सकता है .  सब हो जायेगा न …ओ पैसे ..सर उसकी चिंता मत करिए …हम मैनेज कर लेंगे . कुछ पैसे जुटाए हैं …और कुछ हम एडवांस में ले लेंगे ….उस लड़की ने कहा

 

 

 

 

एडवांस में ? सिन्हा जी ने आश्चर्य से पूछा। हाँ सर …वो हम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं …तो हम वहाँ से ले लेंगे।

 

 

ओह …वैसे बेटा नाम क्या है तुम्हारा? सर …कोमल।  तभी  उसकी मां  ने कुछ हिम्मत जुटा कर कहा, ”कोमल , मुझे जरा बिठा दो, उलटी सी आ रही है.”

 

 

 

 

डाक्टर ने कोमल   के साथ मिल कर उस की मां को बिठाया. अभी वह पूरी तरह बैठ भी नहीं पाई थी कि एक जोर की उबकाई के साथ उन्होंने उलटी कर दी और कोमल की नीली  पोशाक उस से सन गई.

 

 

 

 

मां शर्मसार सी होती हुई बोलीं, ”माफ करना बेटी.मैं ने तो तुम्हें भी..” उन की बात बीच में काटती हुई श्वेता बोली, ”यह तो मेरा सौभाग्य है मां कि आप की सेवा का मुझे मौका मिल रहा है.”

 

 

 

 

कोमल  के कहे शब्द डाक्टर कुमार को सोच के किसी गहरे समुद्र में डुबोए चले जा रहे थे. ”डाक्टर साहब, कोई गहरी चोट तो नहीं है न,” कोमल  ने रूमाल से अपने कपड़े साफ करते हुए पूछा.

 

 

 

नहीं बेटा …कोई ज्यादा गहरी चोट नहीं है …जल्द ही आपकी मां पूरी तरह स्वस्थ हो जायेंगी . डाक्टर फिर तेजी से दुसरे कमरे में पहुंचे , जहां वह बच्ची एडमिट थी .

 

 

 

 

उन्होंने देखा की उस्सकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है . बल्कि हालात और भी सीरियस हो गए थे . वे बहुत ही बेचैन हो गए . वह इस सच को भी जानते थे कि बनावटी फीड में वह कमाल कहां जो मां के दूध में होता है.

 

 

 

 

डाक्टर सिन्हा  दोपहर को खाने के लिए आए तो अपने दोनों मरीजों के बारे में ही सोचते रहे. बेचैनी में वह अपनी थकान भी भूल गए थे . शाम को डाक्टर कुमार वार्ड का राउंड लेने पहुंचे तो देखा कि कोमल  अपनी मां को व्हील चेयर में बिठा कर सैर करा रही थी.

 

 

 

 

”दोपहर को समय पर खाना खाया था मांजी ने ?” डाक्टर सिन्हा  ने कोमल  से मां के बारे में पूछा. ”जी  सर, जी भर कर खाया था. महीना दो महीना मां को यहां रहना पड़ जाए तो खूब मोटी हो कर जाएंगी,” श्वेता पहली बार कुछ खुल कर बोली. डाक्टर कुमार भी आज दिन में पहली बार हंसे थे.

 

 

 

 

तभी नर्स ने आकर उन्हें कुछ मैसेज दिया और डाक्टर सिन्हा वहीँ धाम से बैठ गए . वह बच्ची नहीं बाख पायी थी . हालांकि अब उन्होंने कई मौत के केसेज देखे थे , लेकिन इस मृत्य्यु ने उन्हें अन्दर से झकझोर दिया था ……. क्योंकि यह उस बच्ची की नहीं बल्कि इंसानियत की मौत थी .  वे सोच रहे थे कि अगर उस बच्ची के मां – बाप मिल जाते तो उन्हें घसीट कर कोमल के पास ले जाते और बेटी की परिभाषा समझाते …..

 

 

 

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