Hindi Short Stories For Class 3 With Moral / सच्चा शासक हिंदी कहानी

Hindi Short Stories For Class 3 एक पहाड़ की ऊंची छोटी पर एक बाज रहता था और पहाड़ की तराई में बरगद के पेड़ पर कौवा रहता था. वह बहुत ही चालाक और धूर्त था. वह हमेशा इसी कोशिश में रहता की बिना मेहनत किये भोजन मिल जाए.

 

 

 

 

 

पेड़ के आसपास खोह में खरगोश रहते थे. जब भी वे बाहर आते बाज तेजी से आता और किसी एक खरगोश को लेकर उड़ जाता. एक दिन कौवे ने सोचा, ” वैसे तो ये खरगोश मेरे हाथ आने से रहे. अगर इनका शिकार करना है तो बाज के जैसा शिकारी बनना होगा “.

 

 

 

Hindi Short Stories For Class 3 Pdf

 

 

 

दुसरे दिन कौवे ने भी बाज की तरह खरगोश को पकड़ने के लिए ऊँची उड़ान भरी. अब भला कौवा क्या बाज का मुकाबला करता. खरगोश ने उसे देख लिया और झट से चट्टान के पीछे छिप गया . कौवा खुद को संभाल नहीं पाया और सीधा चट्टान से जा टकराया और उसकी मृत्यु हो गयी.

 

 

सीख- नक्कल के लिए भी अकल चाहिए होती है.

 

 

 

अजनबी हिंदी कहानी 

 

 

 

2- एक राजा के शयनकक्ष में एक जूं  ने डेरा डाल रखा था. रोज रात को राजा के सोने बाद वह चुपके से निकलती और धीरे से राजा खून चूसकर वापस छिप जाती.

 

 

 

संयोग से एक दिन एक खटमल भी राजा के शयनकक्ष में आ गया. जूं जब उसे देखा तो कहा, ” तुम यहाँ से चले जाओ. यह मेरा क्षेत्र है “. खटमल भी चालाक था.

 

 

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उसने कहा, ” मेहमान से ऐसे बात नहीं करते हैं. मैं आज की रात आपका मेहमान हूँ. कल मैं स्वयं चला जाऊंगा “. जूं उसकी बातों में आ गयी लेकिन उसने शर्त राखी की तुम राजा को नहीं काटोगे.

 

 

तब खटमल ने चालाकी से कहा, ” मैं आपका मेहमान  हूँ. मुझे खाने के लिए कुछ तो दोगी न और राजा के खून से बढियां और क्या हो सकता है”.

 

 

” ठीक है. चुपचाप राजा का खून चूस लेना, उसे तनिक भी पीड़ा का एहसास नहीं होना चाहिए ” जूं ने कहा .

 

 

” ठीक है ” खटमल ने उत्तर दिया.

 

 

रात हुई. राजा अपने शयनकक्ष में आया. खटमल ने राजा को काटा. उसे बहुत अच्छा स्वाद लगा. उसने कभी भी ऐसा स्वाद नहीं चखा था. वह जूं की सारी बात भूल गया और राजा को बार-बार काटने लगा.

 

 

 

इससे राजा को तेज खुजली हुई. उसने सेवको को बुलाया और खटमल को मारने को कहा. यह देख खटमल पलंग के पाए के नीचे छिप गया, लेकिन चादर के कोने में बैठी जूं पकड़ में आ गयी. सेवकों ने उसे वहीँ मार दिया.

 

 

 

सीख- कभी भी अजनबी पर विश्वास ना करें.

 

 

 

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3-  एक जंगल में एक महान ऋषि थे. वह बहुत बड़े तपस्वी थे. उनका रोज का काम था कि वे प्रातः एक नदी पर आते, वहाँ स्नान करते और एक पत्थर के तुकडे पर आसन जमाकर तपस्या करते.

 

 

वहीँ नजदीक में उनकी कुटिया थी. वहाँ वे और उनकी पत्नी रहते थे. एक दिन उनके साथ एक अजीब सी घटना घटी. वे नित्य की भाँती जब पूजा करके अपने हाथ खोले ही थे एक नन्ही सी चुहिया उनके हाथ पर आ गिरी.

 

 

उन्होंने जैसे ऊपर एक चील उड़ती हुई जा रही थी. उनको यह समझते देर नहीं लगी कि यह चुहिया चिल के पंजों से ही छूटकर गिरी है. चुहिया  डर के मारे काँप रही थी.

 

 

ऋषि को कोई संतान नहीं थी और उन्हें यह भी ज्ञात था कि उनके जीवन में संतान सुख नहीं है. पत्नी के कहने पर वे झूठी दिलासा देते रहते थे जो भाग्य में होगा वही होगा.

 

 

उन्हें चुहिया पर दया आ गयी. उनके पास मौक़ा भी था. उन्होंने हाथ में जल लिया और उसे अभिमंत्रित कर चुहिया पर फेंका. चुहिया एक मानव बच्ची में परिवर्तित हो गयी.

 

 

वे उस नन्ही बच्ची को लेकर घर पहुंचे और पत्नी से बोले ” तुम सदा संतान की कामना करती थीं. आज प्रभु ने तुम्हारी प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और यह बच्ची भेज दी. इसे अपनी पुत्री समझकर इसका लालन – पालन करो “.

 

 

 

ऋषि पत्नी बच्ची को देख बहुत प्रसन्न हुई. उन्होंने उसका नाम मयूरी रखा. ऋषि ने अपनी पत्नी से चुहिया वाली घटना का जिक्र नहीं किया उस बच्चीके प्यार में वह भी उस घटना को भुलाने लगे.

 

 

 

ऋषि और उनकी पत्नी बच्ची से बहुत प्यार करते थे. ऋषि पत्नी तो उस बच्ची के प्यार में खुद को भी भूल गयी थीं. वे दिन – रात उसे खिलाने-पिलाने और उसके साथ खेलने में लगी रहतीं.

 

 

समय आने पर ऋषि ने मयूरी को उत्तम शिक्षा दी और अब वह समय आ गया जब मयूरी विवाह योग्य हो गयी. वे बात कर ही रहे थे कि तभी मयूरी वहाँ आ गयी.

 

 

उसने केशों में फूल गूँथ रहे थे. चहरे पर यौवन दमक रहा था. ऋषि ने सोचा पत्नी ठीक ही कह रही है. उन्होंने तपोबल से सूर्यदेव का आव्हान किया.

 

 

 

सूर्यदेव उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें प्रणाम करते हुए कहा, ” कहिये मुनिवर! क्या आज्ञा है?” ऋषि ने मयूरी की और इशारा करके कहा, ” यह मेरी बेटी है. सर्व गुण संपन्न है. मैं चाहता हूँ  की आप इससे विवाह करें.”

 

 

 

” नहीं पिताश्री, यह तो अग्नि के सामान गर्म हैं और इनके प्रकाश से मेरी आँखे चुंधिया रही हैं. मैं तो ना कभी इनके निकट जा सकुंगी और ना ही इन्हें देख सकुंगी.”

 

 

 

ऋषिवर बोले, ” ठीक है. हम दूसरा वर देखते हैं”

 

 

 

उन्होंने सोचा, ” बादल इसमें उपयुक्त रहेगा. वह सूर्य को भी ढँक लेता है. मैं उसे बुलाता हूँ . ” यह सोचकर उन्होंने बादल का आह्वान किया . बादल गरजते हुए, बिजलियाँ चमकाते वहाँ पहुंचा.

 

 

लेकिन उसे देखते ही मयूरी ने कहा, ” पिताश्री! यह तो काले रंग का है और मैं गोरी हूँ और दूसरा यह बार बार बिजली चमका रहा और बिजली से मुझे भय लगता है. मैं इससे विवाह नहीं कर सकती हूँ.”

 

 

 

इसके बाद ऋषि ने पवन देव का आह्वान किया, लेकिन मयूरी ने उन्हें भी मना कर दिया. फिर पर्वतराज आये लेकिन वो भी मयूरी के मन ना भाये.

 

 

 

उसके बाद पर्वतराज ने सुझाया कि, ” चूहा इसके लिए श्रेष्ठ वर होगा. वह मुझे भी छेदकर बिल बनाकर उसमें रहता है. ” उनके इतना कहते ही मयूरी ख़ुशी से उछल पड़ी और बोली, ” हाँ पिताजी, मुझे चूहे बहुत प्रिय हैं. उनकी पूंछ और कान कितने खूबसूरत है. मेरा विवाह चूहे से करा दीजिये .”

 

 

पहले तो ऋषि ने इस बात को टाला. फिर मानं गए और उन्होंने चूहे को बुलाया. मयूरी चूहे को देखकर बहुत प्रसन्न हुई. ऋषि ने सोचा मैंने इसे तो मन्त्र के बल पर चुहिया ने मानवी बना दिया परन्तु इसका दिल तो चुहिया का ही रहा. उसके बाद ऋषि ने उसे फिर से चुहिय्या बना दिया और उसका विवाह चूहे के साथ कर दिया.

 

 

सीख- नकली उपायों से स्वाभाव नहीं बदले जा सकते.

 

 

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4- अचानक हुई मृत्यु के कारण जंगल में राजा सिंहराज का शासन ख़त्म हो गया था. अब पुरे जंगल में अजाराकता का माहौल था. हर कोई अपने मन का मालिक था.

 

 

अशांति, गन्दगी और अजरकता से त्रस्त होकर कुछ सभ्य जानवरों ने मंत्रणा की. उन्होंने कहा, ” जब तक सिंहराज का राज था हर जगह शान्ति थी. सब लोग खुश थे और आज घनघोर अजरकता का माहौल है. अब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है. ऐसे रहा तो जंगल समाप्त हो जायेगा.”

 

 

 

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“सही बात है, लेकिन हम ऐसे हाथ पर हाथ रखकर बैठे तो नहीं रह सकते हैं. हमें कुछ ना कुछ तो करना ही होगा. क्यों ना हम सिंहराज की तरह एक न्यायप्रेमी और ताकतवर राजा चुने.” भालू बोला.

 

 

 

सभी लोग इस पर संतुष्ट हो गए, लेकिन एक बड़ी दुविधा यह थी कि राजा किसको बनाया जाए. इस समय पुरे जंगल में हर कोई राजा ही था. सब लोग मंथन करने लगे.

 

 

तब मोर बोला, ” हम एक काम करते हैं. १५ दिन तक सभी जानवरों में जंगल के कार्यों को बांट देते है. जो सबसे सही कार्य करेगा हम उसे राजा चुन लेंगे. ” सभी लोग मोर की बात पर सहमत हो गए और जंगल के कार्य राजा बनने के इच्छुक  जानवरों में बांट दिए गए.

 

 

 

लोमड़ी को मिट्टी हटाने का काम दिया गया. बन्दर को पेड़ों की साफ़ सफाई का काम दिया गया. हाथी को एक गड्ढे को पत्थर से भरने का कार्य दिया गया और खरगोश को घास की साफ़ सफाई और उल्लू को रात्रिप्रहरी तथा गिद्ध को दूर तक दुश्मन पर नजर रखने का कार्य दिया गया.

 

 

 

 

१५ दिन बीते. सभी जानवर अपने-अपने कार्यों की सूची के उपस्थित हो गए. सभी लोग बहुत ही बढ़िया तरीके से अपने – अपने कार्य को अंजाम दिया था, लेकिन सबमें थोड़ी बहुत कमी रह गयी थी, लेकिन उसमें हाथी का कार्य सबसे खराब था. उसने एक भी पत्थर गड्ढे में नहीं डाले थे.

 

 

 

अब फिर से समस्या आन पड़ी किसे राजा नियुक्त किया जाए. एक बार फिर से मोर ने उपाय बताया, ” क्यों ना मतदान करा लिया जाए. जो जीतेगा उसे राजा घोषित कर दिया जाएगा.”

 

 

 

सब जानवर इस पर सहमत हो गए और बोले राजा कोई भी बने मंत्री तो जरुर मोर को ही बनाना चाहिए. मतदान का दिन तय हुआ. सभी ने मतदान किया.

 

 

 

अब वोटों की गिनती शुरू हुई, लेकिन यह क्या शुरूआती कुछ समय में उल्लू और गिद्ध से पिछड़ने के बाद हाथी ने ऐसी बढ़त बनाई कि वह आखिरी तक आगे रहा और चुनाव जीत गया.

 

 

 

सभी लोग बड़े आश्चर्यचकित हुए. कोई कह रहा था की चुनाव में धांधली हुई तो कोई कह रहा था की हाथी ताकत के बल पर जीता. अभी गर्मागर्म बहस चल ही रही थी कि इतने पक्षिराज गरुड़ वहाँ पधारे और बोले, ” ना तो चुनाव में कोई धांधली औई और ना ही हाथी महाशय ने अपने ताकत का दुरपयोग किया. असली बात यह है कि जब इन्हें गड्ढे भरने का काम दिया गया था तो उन्होंने देखा कि उसमें कुछ गरुड़ पक्षियों के अंडे रखे हुए थे. उन्होंने अपने राजा बनाने के लालच को त्याग दिया और दया और परोपकार की भावना से पत्थर को वही बगल में रखकर उस गड्ढे को और भी अधिक सुरक्षित कर दिया. फिर जब चुनाव हुए तो जंगल में पक्षियों की संख्या पशुओं से अधिक थी और उन्हें एकमुश्त पक्षियों के वोट हासिल हुये और हाथी महाशय विजयी हुए.”

 

 

 

सीख- सच्चा शासक वही होता है जो परोपकार की भावना को सर्वोपरि रखे. 

 

 

 

 

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