Hindi Short Stories For Class 1 / नटखट परी को मिली सजा हिंदी कहानी

Hindi Short Stories For Class 1 परी लोक में एक परी थी।  उसका नाम था नटखट परी।   जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है वह बहुत ही शरारती थी।

 

 

 

वह हमेशा परियों को परेशान करती रहती थी।  छोटी होने के कारण कोई उसे कुछ नहीं बोलता था। एक  दिन की बात है उसने देखा दो परियां फूलों में पानी दे रही है।  नटखट परी को शरारत सूझी।

 

 

 

वह चुपके से गयी  और दोनों परियों की चोटी  आपस में बांध दी। काम खत्म होने के बाद जैसे ही परिया वापस मुड़ी  उनके  बाल खींच गए  और वे रोने  लगी।

 

 

 

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उन्होंने इसकी शिकायत रानी परी से की।  रानी परी ने नटखट परी को समझाया, ” ऐसा नहीं किया जाता है।  ” नटखट परी कुछ नहीं बोली वह शांत रही  लेकिन उसकी शरारत  कम नहीं हुई।

 

 

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एक  दिन की बात है। एक परी खाना बना रही थी तब तक वह नटखट परी वहां  पहुंच गई।  परी को लगा आज नटखट परी कुछ गलत करेगी।लेकिन नटखट परी ने बड़े ही प्रेम भाव से उससे कहा, ” क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूं ? ” खाना बना रही परी को बड़ा ही आश्चर्य हुआ।

 

 

उसने सोचा भला नटखट परी मदद करने की बात कर रही है। लगता है रानी परी की डांट का असर है। तब उसने कहा ठीक है सब्जी में तुम नमक डाल दो तब तक मैं पानी पीकर आती हूं।

 

 

यह कहकर परी पानी पीने के लिए गई तो नटखट परी ने सब्जी में खूब ढेर सारा नमक डाल दिया।  शाम को जब सभी परियां  खाना खाने के लिए बैठी तो सब्जी में नमक ज्यादा था।

 

 

यह देख रानी परी गुस्से से बोली, ” आज सब्जी में नमक इतना ज्यादा कैसे हो गया ? ”  इस पर खाना बनाने वाली परी ने कहा, ” यह सब नटखट परी का काम है। उसने ही आकर मुझसे काम करने के लिए कहा और जब मैं पानी पीने के लिए गई तो उसने सब्जी  में नमक ज्यादा डाल दिया।  ”

 

 

यह बात सुनकर रानी परी को बहुत गुस्सा आया।  उसने सोचा अब नटखट परी को सबक सिखाना ही पड़ेगा। उसके बाद उसने एक छोटा बॉक्स लिया और उसे लेकर बाग़  में आई जहां सभी परियां  मौजूद थी।

 

 

उसने सभी परियों से कहा यह एक जादुई बक्सा है कोई भी इसे बिना मेरे इजाजत के ना खोलें।  सभी परियों  ने हां कहा और वहां से चली गई।लेकिन नटखट परी तो थी ही शरारती। उसने सोचा, ” देखा जाए तो इस बक्से में क्या है ?”  यह सोचकर उसने बक्सा खोल दिया।

 

 

 

बक्सा खुलते ही उसमें से छोटे-छोटे भूत निकले नटखट परी को परेशान करने लगे। कोई नटखट परी के बाल खींचता तो कोई उसे थप्पड़ मार देता तो कोई उसकी चिकोटी करता।

 

 

 

नटखट परी परेशान हो गई और जोर जोर से रोने लगी।  तभी वहां पर सब परियां  आ गई।  ” मैंने तो मना किया था बॉक्स खोलने के लिए तुमने फिर क्यों खोला ? ” रानी परी ने कहा।

 

 

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नटखट परी ने माफी मांगी। उसके बाद रानी परी ने कहा, ” अब तुम्हें समझ में आ गया होगा कि तुम जब किसी और को परेशान करती हो तो उसे कितनी तकलीफ होती है।  ”

 

 

नटखट परी ने कहा, ” अब मुझे समझ में आ गया है। अब मैं किसी को परेशान नहीं करूंगी। मैं माफी मांगती हूं। ” उसके बाद रानी परी ने जादू से उस बॉक्स को बंद कर दिया और  भूत उसमें समा गए।  उसके बाद से  नटखट परी एक अच्छी परी की तरह रहने लगी।

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2- Hindi moral stories for class 1 with pictures रश्मि ७ साल की बच्ची थी।  उसकी माँ की मृत्यु हो चुकी थी। रश्मि हर रोज अपनी दादी  से परियों की कहानियां सुनती थी।  उसकी सौतेली माँ उसे बिलकुल भी प्यार नहीं करती थी।

 

 

एक दिन सभी लोग पिकनिक के लिए जाते हैं।  रात को रश्मि अपने पापा से कहती है, ” पापा मुझे माँ बिलकुल प्यार नहीं करती है।  मैं उनका हर कहना मानती हूँ , लेकिन फिर भी वो मुझसे प्यार नहीं करती हैं। ”

 

 

 

रश्मि के मासूम सवालों से उसके पापा को बड़ा ही दुःख होता है और वे रश्मि को समझाते हुए कहते हैं, ” बेटा आप उनसे प्यार करते हो न तो देखना एक दिन वे भी आपसे प्यार करने लगेंगे।  ”

 

 

 

पिकनिक के आस – पास का क्षेत्र जादुई रहता है और रश्मि के माता – पिता सभी इस बात से अनभिज्ञ रहते हैं।  रश्मि जब अपने भाई भाई सोहन के साथ खेलती है तो उसकी सौतेली माँ उसे डांटने हुए दूर कर देती है।

 

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रश्मि उदास होकर जंगल की तरफ चली जाती है।  वह बहुत उदास थी और उसे अपनी माँ की याद भी बहुत आ रही थी। चलते – चलते जंगल में काफी अंदर तक चली गयी।

 

 

 

उसने वहाँ देखा एक तालाव जिसका पानी एकदम स्वच्छ है और उसके चारो तरफ रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं और वहा एक चमकदार रोशनी बिखरी हुई है।

 

 

 

वह वहाँ बैठकर कभी फूलों को निहारती तो कभी तालाव के स्वच्छ जल को।  तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी।  ५ उड़नखटोले पर पांच परियां वहा उपस्थित हुई।

 

 

 

उनमें से एक परी जिसने लाल रंग की पोशाक पहनी थी वह सबसे आगे थी।  थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर वे अचानक से रुक गयीं और आपस में बाते करने लगीं।

 

 

 

लाल परी ने कहा, ” यहां किसी मानव के होने की खुशबु आ रही है।  हमें उसे ढूंढना चाहिए।  ” बाकी परियों ने भी  हाँ में हाँ मिलाई और ढूंढने लगे।

 

 

 

थोड़ी ही समय में उन्होंने रश्मि को देख लिया।  रश्मि उन्हें देखते ही चौंक गयी और डरने लगी।  लाल परी मुस्कुरायी और बोली, ” डरो मत, मैं लालपरी हूँ।  मैं परीलोक में रहती हूँ।  तुम यहां कैसे आयी ? ”

 

 

 

रश्मि ने पूरी बात विस्तार से बता दी।  लालपरी को बहुत दुःख हुआ।  उसने कहा, ” मैं तुम्हे कुछ जादुई शक्तियां दे रही हूँ।  जिससे तुम मुझसे जब चाहे बात कर सकती हो और दूसरी शक्तियों  से तुम लोगों की जान बचा सकती हो।  यह जंगल बहुत भयानक है।  यहाँ एक बड़ा सा राक्षस रहता है। उसे वरदान है कि कोई छोटी बच्ची ही उसे मार सकती है, इसलिए वह धोखे से बच्चों को मार देता है।  अतः तुम्हे सावधान भी रहना होगा। ”

 

 

 

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उसके बाद लालपरी ने रश्मि को कई सारी शक्तियां दे दी और कहा, ” अब तुम अपने घर चले जाओ। ” . रश्मि ने यात्रा सूचक यंत्र का प्रयोग किया और उसे बाहर जाने का रास्ता मिल गया।

 

 

 

 

वह थोड़ी ही आगे बढ़ी थी कि इतने में एक बाघ वहाँ आ गया।  वह बहुत भूखा था।  उसे देखते ही रश्मि ने माहौल को समझ लिया और उसने अपनी जादुई शक्तियों से पांच शेर प्रकट किये और वे शेर बाघ पर टूट पड़े। थोड़ी ही देर में उन्होंने बाघ को मार दिया।

 

 

कुछ समय में वह फिर से उस स्थान पर आ जाती है जहां वह अपने मम्मी – पापा के साथ ठहरी हुई थी।  वहाँ पहुंचने पर रश्मि के पिता उससे पूछते हैं, ” बेटा कहाँ चली गयी थी।  मैं आपको कब से ढूंढ रहा था।  ”

 

 

 

 

तब रश्मि ने कहा, ” पिता जी अब हमें यहां से चलना चाहिए।  यह क्षेत्र ठीक नहीं है।  ”

 

 

 

” क्यों ? क्या हुआ ? तुम इस तरह क्यों बात कर रही हो ? ” रश्मि के पिताजी ने आश्चर्य से पूछा।  तभी वहाँ अचानक से अंधेरा हो गया।  अचानक हुए अँधेरे से सभी लोग भयभीत होने लगे।

 

 

 

तभी एक लाल रोशनी दिखाई दी और एक भयानक राक्षस प्रकट हुआ।  उसे देखकर सबकी हालत खराब हो गयी।  वह  एक – एक कर सभी बच्चों को अपने पिजड़े में  बंद  करने लगा।

 

 

 

 

उसे पता था कि उसकी मृत्यु छोटे बच्चे के हाथो ही लिखी है और इसीलिए वह सभी छोटो बच्चों को मार डालना चाहता था।  सभी बच्चों के माता – पिता उस राक्षस से बच्चों को छोड़ने की मिन्नत करने लगे।

 

 

 

लेकिन वह निर्दयी राक्षस किसी की एक नहीं सुन रहा था।  अंत में रश्मि का नंबर आया।  रश्मि को परियों की बात याद थी।  उसने तुरंत ही उस राक्षस पर एक तेज रोशनी फेंकी।

 

 

 

राक्षस को धक्का लगा और वह गिर पड़ा।  तभी रश्मि ने एक जादुई रोशनी से सभी बच्चों को आज़ाद करा लिया।  उसकी इस जादुई शक्तियों से सभी लोग आश्चर्यचकित थे।

 

 

 

 

अब राक्षस को भी समझ आ गया था कि जिस बच्ची का उसे इन्तजार था वह रश्मि ही थी।  उसने अपने कई रूप धारण करके एक साथ रश्मि पर आक्रमण किया।

 

 

 

 

तब रश्मि ने परी के द्वारा दी हुई शक्ति से रक्षा कवच तैयार कर लिया और उसके बाद उसने जादुई रोशनी से उसके रूपों को नष्ट कर दिया।  इस तरह से उसकी और राक्षस की लड़ाई काफी देर तक चली।

 

 

 

उसके बाद रश्मि ने एक ताकतवर रोशनी का इस्तेमाल करके उस राक्षस को मार दिया।  राक्षस के मरते ही वहाँ पर फिर से उजाला हो गया।  सभी लोगों ने रश्मि के सम्मान में तालियां बजाई।

 

 

 

तभी उसकी सौतेली माँ ने उसे गले लगाते हुए बोली, ” बेटी मुझे माफ़ कर दो।  आज तुमने यहां बहुत लोगों की  जान बचाई है और साथ ही अपने भाई की भी जान बचाई है।  मैं हमेशा तुमसे प्यार करुँगी।  ” रश्मि भी अपनी सौतेली माँ से लिपट कर रोने लगी।  सभी आखों में आंसू थे लेकिन वह ख़ुशी के आंसू थे।

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