Hindi Kahaniya in Written / मैं करूँ इन्तजार तेरा हिंदी प्रेम कहानी

Hindi Kahaniya in Written मेरा नाम यशवंत है और मैं भरतपुर का रहने वाला हूँ. आज मैं बहुत परेशान हूं क्याेंकि आज मेरा 12वीं का परिणाम आने वाला है.

 

 

 

मुझे यह पता कि मैं बढ़िया नंबर से पास हाेने वाला हूँ लेकिन मुझ पर बहुत ही ज्यादा दबाव है अच्छे नंबर लाने का क्याेकि मैने दसवी में अपने कालेज में सबसे ज्यादा नंबर लाये थे और कालेज टाप किया था…. इसलिए मन में थाेड़ी घबराहट थी.

 

 

 

Hindi Kahaniya For Kids

 

 

 

 यह सच्ची प्रेम कहानी कुछ समय पहले की है, तब गांव उतने विकसित नहीं हुये थे. मैं अपना रिज़ल्ट देखने पास के गांव में जाने वाला था… जहां कुछ पैसे लेकर रिजल्ट दिखाया जाता था.

 

 

 

 

क्याेकि उस समय आज की तरह स्मार्टफ़ोन और लैपटॉप बहुतायत नही हाेते थे और ना ही नेट सस्ता था. मोबाइल रहती थी लेकिन वही नाेकिया की सादा पीस.

 

 

 

 

मैं परिणाम देखने जाने की तैयारी कर ही रहा था कि राहुल जाे कि नवीं में पढ़ता था ने आकर बताया कि ट्राँसफार्मर जल गया है. अब मैं और भी परेशान हाे गया… परेशानी जायज थी क्याेंकि गांव में ट्राँसफार्मर जलना मतलब कि कम से कम एक हफ्ते के लिए बिजली गुल.
जब तक गांव के प्रभावशाली लाेग या फिर ट्यूबवैल वाले बिजली विभाग वालाें कीे फाेन नहीं करेंगे, तब तक बिजली नही आने वाली. आम लाेगाें काे क्या फर्क पड़ता है और वैसे भी ज्यादातर बिजली का बिल ताे भरते नही और जब चेकिंग आती है ताे पूरे गांव में ऐसी अफरातफरी मचती है तुफान आ गया हाे.
मैं यह साेच ही रहा था कि मेरे नाेकिया मोबाइल के सादे पीस की रिंगटोन बजी. मैने देखा तो एक अननाेन नंबर से काल था. मैंने काल रिसीव किया ताे एक लड़की की मीठी आवाज आयी हैलाे…. बधाई हाे मिस्टर यशवंत….आपने कालेज टाप किया है.
मैं खुशी के मारे चिल्लाते हुये बाेला “क्या”
मेरी आवाज़ सुनकर सुनकर मेरी जाे कि पास में ही कुछ काम कर रही थी, वह दाैड़कर मेरे पास आयी और घबरा कर पूछा क्या हुआ बेटा  “क्याे इतना तेज चिल्लाये”.

मैं करूँ इन्तजार तेरा हिंदी प्रेम कहानी

मैं थाेड़ा सिरिअस  हाेकर बाेला… कुछ नहीं मां,  मैं बाद में बताता हूं. इतना कह कर मैं अपने घर के बाहर लगे गुड़हल के पेड़ के पास आ गया. मैं उस लड़की से सीरियल आवाज में पूछा.. काैन हैं आप,  कहीं आप मजाक ताे नहीं कर रही हैं, मेरा नम्बर कैसे मिला आपकाे.
वाे हंसने लगी और बाेली बुद्धू ही रहाेगे आप, मैं आपके हर सवाल का उत्तर दूंगी…परन्तु एक सवाल काे छाेड़कर… ताे मेरा जवाब है कि मैं मजाक नही कर रही हूं. आपने सच में कालेज टाप किया है.. आपकाे विश्वास नहीं है ताे मै आपका राेल नंबर बता देती हूँ और आपका नम्बर आपके परम मित्र शरद मिश्र ने दिया है.
Hindi Kahani Youtube

Hindi Kahani Pdf in Hindi

रह गयी यह बात कि मैं काैन हूं ताे इसकी ज़िम्मेदारी आपकी, आप स्वत: पता लगा कि मैं काैन हूं…. फिर उसने बाय कहा और फाेन कट कर दिया.
अब मैं और भी साेच में पड़ गया… मैंने फाैरन शरद काे फाेन लगाया….लेकिन उसका नम्बर बंद था. अब मैने उसके पिता जी काे फाेन किया और शरद के बारे में पूछा ताे उन्हाेने बताया कि शरद भगवानपुर मार्केट गया है. उसकी मोबाइल चार्ज ना हाेने के कारण बंद हाे गयी… और तुमकाे ताे पता ही ट्राँसफार्मर जल गया है.
मैंने उनसे कहा सही बात है चाचा जी… अच्छा यह बताइये शरद कब से गया है मार्केट….अभी दस मिनट पहले… किसी काे फाेन कर रहा था और काेई नम्बर लिखवा रहा था… बाेल रहा था कि जल्दी लिखाे मोबाइल बंद हाेने वाली है… उन्हाने कहा.
ठीक है चाचा जी… मैंने कहा और फाेन कट कर दिया.
अब मेरा मन और परेशान हाेने लगा था. मैं घर में गया, फटाफट तैयार हाेकर भगवानपुर की ओर निकला और निकलते हुये मैने मां से कह दिया कि मैं भगवानपुर जा रहा हूँ.

Hindi Kahaniya New

मैं जब भगवानपुर पहुंचा ताे शरद काे ढुढने में ज्यादा परेशानी नही हुई, क्याेकि भगवानपुर में मोबाइल की 5 दुकाने है और वह  श्याम मोबाइल सेंटर पर था. वह वहां मेरा रिजल्ट देखने गया था. मैने उसकाे आवाज दी. शरद और मेरे कालेज के कुछ और दाेस्ताे ने मुड़कर मुझे देखा और दौड़कर मेरे पास आ गये और मुझे खुशी से उठा लिया.
रमेश ने कहा कि तुमने कालेज टाप किया है.. लेकिन यह मैं कंफर्म हाेना चाहता था.. साे मैं श्याम भैया की दुकान पर गया और उनसे अपना रिज़ल्ट दिखाने काे कहा… उन्हाने मेरा रिजल्ट दिखाया.. मेरा 95% अंक आये था.
तब तक पंडित जी का भी आ गया जाे कि मेरे क्लासटीचर थे, उन्हाेने भी वही खुशख़बरी दी. अब मुझे यकीन हाे गया था, वैसे मुझे 90% से अधिक की उम्मीद थी, लेकिन मैं कालेज टाप करूंगा, इसकी उम्मीद नहीं थी.
सारे दाेस्त मुझसे पार्टी देने के लिए कहने लगे, फिर हम पास के एक मिठाई की दुकान पर गये, जहां हम सबने रसगुल्ले खाये. सारे दाेस्ताे से विदा लेने के बाद मैने शरद से पूछा कि तुमने मेरा मोबाइल नम्बर किसी काे दिया था क्या?
शरद तपाक से बाेला.. मतलब? मैने कहा यार मुझे एक लड़की का काल आया था और फिर मैंने सारी बातें बता दीं. शरद मुस्कराते हुये बाेला.. पागल वाे राधिका थी.
राधिका.. अनायास ही मैं बाेल पड़ा और मेरे आंखाें में आसू आ गये. शरद मुझे संभालते हुये बाेला… इतना प्रेम करते हाे ताे अलग क्याें हाे गये? मैं राेते हुये बाेला कि मैं अलग नही हुआ वरन हालात ने हमें अलग करा दिया. तब शरद ने कहा कि मुझे बताओ आखिर क्या हुआ? बाते करते करते हम एक पार्क में आ गये थे… हम दाेनाे एक पेड़ के नीचे बैठ गये… फिर मैंने बताना आरम्भ किया.
जब मैं 9वीं में था,उसी साल उसका ऐडमिशन उस कालेज में हुआ था. मैने ताे शुरूआत से ही इसी कालेज में पढ़ाई की है. उस दिन शर्मा सर की क्लास थी….उसने क्लासरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और बाेला  May I Coming Sir.
Yes Coming Beta… फिर  शर्मा सर थाेड़ा गुस्से में अन्य स्टूडेन्ट्स से मुखातिब हाेते हुये उन्हाेने कहा.. कुछ सीखाे, क्लास में कैसे प्रवेश किया जाता है, तुम लाेग  गधाें की तरह जब मन करे आ जाते हाे, जब मन करे चले जाते हाे…शर्म आनी चाहिये तुम लाेगाें काे…समझ गये ना सब लाेग.
तभी मेरे मुंह से अचानक से यस सर निकल गया.. बाकी किसी स्टूडेन्ट्स ने कुछ नहीं बाेला. वाह, क्या बात है, चलाे बढ़िया है किसी गधे काे ताे बात समझ में आयी… शर्मा सर ने कहा. इस पर सारे स्टूडेन्ट्स बसने लगे… राधिका भी मुस्कुरा दी… वैसे मुझे अभी तक उसका नाम नही पता था.
शर्मा सर पढ़ाने लगे.. लेकिन मेरा मन ताे कहीं और खाेया हुआ था. जब राधिका क्लास में आयी ताे ऐसा लगा जैसे अमावस  की काली घनेरी रात काे चांद ने अपनी  आभा से अलंकृत कर दिया है.
उसकी खूबसूरती का वर्णन करने के लिये शब्दों की श्रिंखला भी कम पड़ जायेगी….यूं कहाे कि आज तक ऐसा काेई शब्द नही बना जिससे उस परी की तुलना की जा सके.
मैं ताे उसकी आंखाें की गहराईयाें में खाे गया था कि घंटे की आवाज सुनाई दी… शर्मा सर की क्लास खत्म हाे चुकी थी और लंच का समय हाे गया था.
क्लास खत्म हाते ही सारे स्टूडेन्ट्स बाहर आ गये और मैं भी अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया… कुछ स्टूडेन्ट्स इधर उधर घूम रहे थे ताे कुछ लंच कर रहे थे लेकिन मेरा दिल नहीं लग रहा था.

Hindi Kahaniya Moral Stories

रघु ने मुझसे कहा कि खाना खा लाे… लेकिन मैंने मना कर दिया… इस पर रीतिक ने कहा कि कालेज में माडल आयी है इसलिए यशवंत काे भूख नहीं है… इसपर मैं रीतिक पर गुस्सा हाे गया.
मेरे नयन हर पल राधिका काे ढूढ रहे थे…तभी मैंने देखा कि एक 50 वर्षीय आदमी जाे कि उसके पापा लग रहे थे के साथ वह प्रिन्सिपल सर के कक्ष में जा रही थी.
कुछ देर के बाद तीनाे लाेग बाहर आये. राधिका के पिताजी ने प्रिन्सिपल सर ले हाथ मिलाकर विदा ली और अपनी कार में आकर बैठ गये,  राधिका फिर क्लासरूम में आ गयी.
सबकुछ ऐसे ही चलता रहा लेकिन मेरे अंदर एक बड़ा बदलाव आया, मेरी पढ़ाई बहुत अच्छी हाे गयी.  मुझे किसी भी कीमत पर राधिका के नजराें में आना था और यह सबसे बढ़िया तरीका था.
यह बदलाव सबने महसूस किया. मैं 9वीं में पूरे क्लास में सबसे ज्यादा नंबर पाया. उस दिन पहली बार राधिका ने मुझसे बात की और सबसे ज्यादा नंबर लाने की बधाई दी.
गर्मियाें की छुट्टियाँ प्रारम्भ हाेने वाली थीं. यह छुट्टी के पहले का हमारा आखिरी दिन था. हम दाेनाे बढ़िया दाेस्त बन चुके थे. राधिका ने बिना मेरे कहे अपना माेबाइल नम्बर मुझे दिया और फिर मैंने भी उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया.
फिर हम दाेनाे ने विदा ली, लेकिन हमारी आंखों में बिछड़न का दर्द साफ नजर आ रहा था, जाे कुछ ही समय में माेतियाें की लड़ी की टूटन के समान बिखरना लगा.
अचानक से राधिका रुकी और उसी पल मेरे भी पांव ठहर गये, हम एक साथ मुड़े और राधिका दाैड़कर मेरे पास आयी और मुझसे लिपटकर राेने लगी, मेरे भी आंखों से अश्रुपात हाने लगा. यह अश्रुमाेती इस बात को प्रमाण थे कि यह एक पवित्र प्रेम था… निस्वार्थ… निश्छल…पावन.
अब मुझे समझ आ गया था कि यह प्रेमअगन दाेनाे तरफ लगी थी… किसी तरह हमने अपनेआप काे संभाला और विदा ली. मैं कुछ ही दूर गया था कि राधिका का काल आ गया और पूरे रास्ते वह बातें करती रही.
यह गर्मी की छुट्टियाँ तिहाड़ से कम ना थी…. बातें ताे हाती लेकिन मुलाकाताें के लिये हम तरस जाते… सबसे बड़ी बात यह थी कि हम दानाे के घर वालाें कीे हम पर शक हाेने लगा…. फिर क्या तमाम तरह की बंदिशें…. और वैसे भी प्यार में बंदिशें ना हो ताे प्यार का मजा अधूरा रह जाता है.
किसी तरह गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हुई और कालेज के पहले दिन ही मै कॉलेज पहुंच गया, जैसा हमारा वादा था, लेकिन राधिका नही आयी, मेरी निगाहें उसे चाराे ओर ढुढने लगीं, मेरा मन अधीर हाेने लगा कि तभी उसका मैसेज आया कि उसकी तबीयत खराब है और वह कल आयेगी, लेकिन यह मैसेज हमारे प्यार का ग्रहण साबित हुआ.
अगले दिन भी राधिका नहीं आयी,मैने उसे काल किया, पर उसका नम्बर बंद था. मैं परेशान हाे गया. किसी अनहाेनी की आशंका से मेरा मन घबराना लगा.
दोपहर एक बजे राधिका के साथ उसके पिता जी और 10 अन्य लाेग धड़धड़ाते हुये क्लासरूम में घुस आये और मुझे घसीटकर बाहर ले गये, शर्मा सर ने राेने का प्रयास किया तो उनके साथ भी बेहूदगी की.
तब तक अन्य टीचर और स्टूडेन्ट्स आ गये,. उन्हाेने मुझे छुड़ा लिया. प्रिन्सिपल सर ने गुस्से से राधिका के पिता जी से का कि सर आप इस कॉलेज काे डाेनेशन देते हैं ताे इसका मतलब यह नहीं कि आप ऐसी बेहूदगी करेंगे. इतने बड़े बिजनेसमैन हाेने पर भी ऐसी घिनाैनी हरकत करते हुये आपकाे शर्म नही आयी.
इस पर राधिका के पिता जी ने झल्लाते हुये गुस्से से कहा आप लाेग इस यहां शिक्षा देते हैं या फिर यह कालेज आवारा लाेगाें का अड्डा है. शर्म मुझे नही शर्म आपकाे आनी चाहिये, देखिये आपका छात्र क्या गुल खिलाता है.

Hindi Kahaniya Jadui

फिर उन्हाेने सारे मैसेज प्रिन्सिपल सर काे दिखा दिया…. हांलाकि ज्यादातर मैसेज काे राधिका ने डिलिट अवश्य कर दिया था, लेकिन उसमें माैजूद मैसेज हमारी प्रेम कहानी की दास्तान कहने काे पर्याप्त थे.
यह देखने के बाद प्रिन्सिपल सर ने मुझे सबके सामने जाेरदार थप्पड़ लगाया और मुझे कैरेक्टर लेस करके कालेज से निकालने की धमकी दी, हांलाकि उनरी बाताे में राधिका के पिता जी का दबाव साफ झलक रहा था.
उसी क्षण राधिका ने कहा कि यशवंत काे कालेज से निकालने की काेई आवश्यकता नही है.  मैं खुद अब इस कालेज में नही पढुंगी. मैं नही चाहती  कि मेरे वजह से मेरे प्यार काे काेई तकलीफ हाे.
मैं भगवान काे साक्षी मानकर कहती हूं कि हमारा प्यार राधा-कृष्ण की तरह पवित्र है और हे प्रभु अगर हमारा प्यार पावन है.. सच्चा है… निश्छल है मुझे  पति को रूप में यशवंत ही मिले.

 

 

 

इतना कहकर वह चली गयी. उसकी सिसकियां आज भी मेरे कानाे में सुनाई देती हैं और मेरे दिल काे तड़पाती हैं. मैने उसकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बना लिया और पढ़ाई में दिन रात एक कर दिया.
मेरी यह प्रेमकहानी कई लाेगाें के द्वारा अलग अलग तरीकाें से कही गयी… मुझ पर तमाम फब्तियां कसी गयी…. लेकिन यह मेरे साहस काे नही डिगा सकी ना ताे डिगा पायेंगी.
सही कहा तुमने… ऐसी ही कुछ गलत कहानियां मैने भी सुनी थी… लेकिन मुझे कभी यकीन नही हुआ…. शरद ने कहा. लेकिन तुम्हें राधिका का नम्बर कहां से मिला, कैसी है वाे, शायद मुझे भूल गयी हाेगी….मैने शरद से पूछा.
ना.. ना.. यशवंत तुमने ताे उनकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बनाया लेकिन उन्हाेने ने ताे तुम्हें अपना भगवान बना लिया हर पल सिर्फ तुम्हारे नाम की माला जपती है.

यह उनके प्यार की ताकत थी जाे तुमने यह मुकाम हासिल किया… उनके पिता जी काे भी इस पवित्र प्रेम का एहसास हाे गया.

तुम्हें शायद पता नहीं परसों वे प्रिन्सिपल सर ले मिले थे, तुम्हारे घर का पता मांग रहे थे,  लेकिन सर ने उन्हे वापस लाैटा दिया…. फिर राधिका के कहने पर उन्हाेने पता दिया. आज वे लाेग तुम्हारे घर जाने वाले हैं… चलाे अब तक पहुंच भी गये होंगे.


हम दाेनाे वहां से तुरंत ही घर की तरफ निकले, सचमुच वहां पर प्रिन्सिपल सर, शर्मा सर, राधिका, उसके पिता जी और गांव के कई गणमान्य लाेग माैजूद थे.
मैने नमस्कार किया… तभी सबके सामने राधिका के पिता जी मुझसे हाथ जाेड़कर माफी मांगने लगे. मैंने तुरंत उनका हाथ पकड़ और कहा कि यह क्या कर रहे हैं… आप हमसे बड़े हैं… हमें शर्मिंदा ना करें.
फिर उन्हाेने कहा कि मैने तुम्हारे माता पिता से बात कर ली है जल्द ही तुम दाेनाे की सगाई हाे जायेगी, लेकिन एक शर्त है तुम लाेगाें काे आगे पढ़कर डाक्टर बनना है और गांव का नाम राेशन करना है. इस तरह से इस प्रेम कहानी का सुखद अंत हो गया.

 

 

 

 

 

मित्रों यह Hindi Kahaniya आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Hindi Kahaniya Moral की तरह की दूसरी कहानी नीचे की लिंक पर क्लिक करके जरूर पढ़ें और इस Hindi Kahaniya 2020 को शेयर भी जरूर करें।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *