Hindi Kahani Written in Hindi / सत्ता की हनक हिंदी कहानी जरूर पढ़ें

Hindi Kahani इस कहानी के सभी नाम व पात्र काल्पनिक हैं।  कहानी पढ़ते समय यह ध्यान रखें कि यह एक कहानी है।  मार साले को ….. और  मार…..साला हमारे बाग़ का आम तोड़ेगा…… इन बातों से ठाकुर वीरेंदर प्रताप सिंह अपने चेलों को राज कुमार उर्फ़ राजू को मारने के लिए उत्साहित कर रहे थे।      

 

 

 

मर जाएगा बाबुसाहेब…मर जाएगा…..बस एक्के ही आम लिया बाबुसाहेब…..माफ़ कर दो …हमार लड़का मर जाएगा…..कहते हुए बाबूलाल ठाकुर वीरेंदर के पैरों में गिर पड़े।      

 

 

 

Hindi Kahani Writing

 

 

 

चल हट ….हमारे इजाजत के बगैर एक्को चिड़िया भी हमारे बाग़ में नहीं आता साला तुम्हरे लडके की हिम्मत कैसे हुई रे…..कहते हुए ठाकुर वीरेंदर ने बाबूलाल को अपने पैरों से झटक दिया।      

 

 

 

तभी पोलिस गाडी के सायरन की आवाज आई……लो आ गए ससुरे ..ठाकुर धीरे से बोले।      

 

 

 

का हो ठाकुर सहेब ..जिए दोगे कि नहीं …..भरी दुपहरिया बाँध के रखे हो….ऊपर से पिटाई भी चालू है….यही मर बिलाय गया तो…..      

 

 

 

तो का…तुम काहे के लिए हो यादव जी…..और इ का पहिला है जो मर जाएगा…..हमरे आम के पेड़ के खाद पानी त यही सब कुत्तन से मिलता है न…साला इसको भी यही दफना देंगे…..ठाकुर साहेब ने इन्स्पेक्टर यादव के आखों में आँख डालकर बोले।        

 

 

 

 

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ये उतार रे…..नहीं त इ कसाई मार ही डालेंगे…और ठाकुर साहेब सरकार बदल गयी है….बहुते दबाव है……अब कुछ दिन थोड़ा शांत रहिये और इसको हम ले के जा रहे हैं थाने वहीँ …..इसकी दवाई करेंगे…….ऐ बुढऊ बाबूलाल कल आ जाना थाने में..आज मत आना , आज का प्रोग्राम कुछ दुसर है।      

 

 

सत्ता की हनक हिंदी कहानी

 

 

 

 

रात को करीब १२ बजे…… का रे बबुआ …….और कौनो का आम ना मिला तुझको…..बहुत दिन हो गया था…..कौनो को पीटे नहीं साला….बाबुसाहेब का नमक खाया है..अदा तो कर पडेगा ना….ओये रामधनिया डंडा  लाव रे …आज बताते है इसको…..       नमस्कार साहेब।  

 

 

.

कौन है बे।    

 

 

तोर बाप….. सूरज।      

 

 

अरे- अरे..सूरज भैया…आइये ना….आइये….इन्स्पेक्टर यादव की भाषा शेर से सीधे बिल्ली की हो गयी थी।        

 

 

का रे बहुत जोश दिखा रहा है आजकल…ठाकुर साहेब का खिलाते है रे … हमरे आने की खबर नहीं मिली थी का…..सूरज क्रोध में बोला।      

 

 

 

मिली थी सूरज भईया।    

 

 

तो आया काहे नाही बे….. भाभी को जल्द बिधवा करवाना चाहता है का रे।      

 

 

 

भैया गलती हो गयी।      

 

 

 

अच्छा कहा रुकना है हमको।      

 

 

भईया गांव के बाहर एक घर है  उहां …..बाकी खाना पीना सबका इंतजाम हो गया है।      

 

 

ठीक है…और इसको छोड़ दे…हम ले जायेंगे।      

 

 

भैया…अरे बहुत गड़बड़ हो जाएगा।    

 

 

इ देख रहा है ना ६ के ६ यही शरीर  में उतार देंगे…समझा छोड़ इसको और हमारे लिए जीप मंगवा।      

 

 

 

जी भैया …यादव की हालत एकदम खराब हो चुकी थी..उसने सूरज की बात मान ली।        

 

 

 

तुमसे कौनो मोह नाही है….पर तुमको ऐसे छोड़ नाही सकते थे…..रात भर में साला उ इन्स्पेक्टर तुमको मार ही डालता….चलो जाओ अब अपने घर चले जाओ…..हम इ सब दर्द देख चुकें है…जाओ….साला जब तक हाथ में हथियार ना रहे न..इ कसाई साले जिए नाही देते हैं….सूरज ने राजू से कहा।        

 

 

 

अब हम नाही जायेंगे……उ साले हमको फिर से मारेंगे।      

 

 

तब का करोगे।      

 

 

हम भी तुम्हारी तरह बनेगे।      

 

 

हा हा हा…हमारी तरह….अरे उसके लिए जिगरा होना चाहिए।      

 

 

भैया आजमा लो।    

 

 

त ठीक है…… मार दे हमको।      

 

 

भैया…….    

 

 

काहे फट गयी…… दम नहीं है……चले हैं भरती होने।        

 

 

धांय …….भैया…कुछ हुआ तो नहीं ना भईया।      

 

 

शाबाश…..दम है रे…तोरा में दम है…..साला दुनाली  खाली थी….हम देखना चाहते थे केतना दम है।      

 

 

कल चलना…..मिलाएंगे ठाकुर ब्रिजभान से……लोग उन्हें ठाकुर साहेब कहते हैं।    

 

 

 

ठाकुर साहेब ..इसके बारे में बोल रहे थे…..ठाकुर साहेब ने एक नजर ऊपर से नीचे राजू को देखा और कहा ठीक है….रख ले इसको और उ ठाकुर वीरेंदर प्रताप क कहानी आज खत्म…बोल इसको ठोंक दे आज।      

 

 

 

ठीक है ठाकुर साहेब।      

 

 

 

इन्स्पेक्टर साहेब हमारा बेटा कहां है….बाबूलाल हाथ जोड़कर यादव जी से पूछे।      

 

 

 

 

अरे उ त रात को ही चला गया..हम छोड़ दिए।      

 

 

 

साहेब हम गरीब है …हमरे पास कुछ नहीं है…इ लीजिये कुछ पैसा है छोड़ दीजिये राजू को।      

 

 

 

अरे दिमाग मत खा बाबूलाल…ऊपर से बहुत प्रेशर है….उ चला गया रात को।      

 

 

 

बाबू जी हाथ जोड़ रहे हैं…..पैर पड रहे हैं बाबूजी…छोड़ दो बाबूजी।      

 

 

 

ओये रामधनिया…अरे भगा रे इसको …साला ऊपर से साहेब डंडा किये है और उधर वीरेंदर..अब इहो आ गया ।      

 

 

 

हे बाबूलाल…निकल रे …कहां छुपाया रे राजुआ के…….साला हमको च….समझा है का रे..थाने गया था…केवल दिखाने के लिए…बता नाही त आज हम तुझको लटकायेंगे।      

 

 

 

लटकायेंगे तो हम तुमको…वीरेंदर सिंह ………       राजू……ठाकुर वीरेंदर फटी आखो से  देखते रह गए….राजू के साथ सूरज और उसकी गैंग थी।

 

 

 

धांय..धांय की आवाज से पूरा इलाका थर्रा गया…..ठाकुर वीरेंदर हम तुमको ऐसा मारेंगे देंगे……कि डर को भी डर लगने लगेगा….        

 

 

 

इ साले को गदहा पर बिठाकर पुरे गाव में घुमाओ और फिर उसे बांधकर मैदान में टांग दो…और अगर किसी ने इसे पानी भी देने की कोशिश की तो उसका भी यही हाल होगा।      

 

 

 

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इस घटना के बाद पुरे क्षेत्र में राजकुमार उर्फ़ राजू का राज हो गया. उसके बाद उसने ना जाने केतना काण्ड किया उसको भी याद नही था।  उसके नाम का खौफ इस कदर था कि वह जिधर से जाता उधर का इलाके में सन्नाटा छा जाता. वह ठाकुर साहेब का खास हो चुका था.    

 

 

 

राजू …      

 

 

जी बोलिए सूरज भईया।      

 

 

इस बार का इलेक्शन बहुत टफ होने वाला है।    

 

 

काँहे भईया।      

 

 

अरे इस बार मास्टर जी चुनाव लड़ रहे हैं ठाकुर साहेब के खिलाफ।      

 

 

 

अच्छा, मास्टर जी…..उनको सब पब्लिक बहुत पसंद करता है. लेकिन हमरे ठाकुर साहेब भी कौनो कम थोड़े ही हैं… बहुत कुछ किये हैं पब्लिक के लिए।      

 

 

बेटा….तुम ठाकुर साहेब के बारे में कुच्छो नही जानते और इ जो सत्ता है ना उकर लोभ  बहुत तगड़ा होता है. उ कुछ भी करा सकती है।      

 

 

मतलब?      

 

 

छोड़ो…समय आने पर पता चल जाएगा।      

 

 

 

देखो सूरज, हम जानते हैं कि राजू एक बहुत अच्छा दुनाली  चलाते हो और बहुत ही विश्वासपात्र है. लेकिन फिर भी मास्टर जी का खेल तुम ही ख़त्म करोगे ….ठाकुर साहेब ने कहा।      

 

 

 

ठाकुर साहेब..मास्टर जी को हटाना जरुरी है का।      

 

 

 

हाँ सूरज…इ जो सत्ता की लत होती है न बहुते  खराब होती है। अब मास्टर जी हमारे रास्ते में रुकावट बन रहे हैं…हमने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन ऊ मान  ही नहीं रहे हैं तो अब हम अब का करे और एक बात आज तक  तुम कभी किसी को रास्ते से हटाने में सवाल नाही किया…मास्टर जी में कौन सी बात आ गयी।      

 

 

 

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नहीं कुछ नाही ठाकुर साहेब….नमक खाए हैं तुम्हारा…मरते दम तक आदेश का पालन करेंगे…..कल जब मास्टर जी विनोद चायवाले के पास चाय पिने जायेंगे…..वह उनकी आखिरी चाय होगी।        

 

 

 

ठीक है….लेकिन चाय पी लेने के बाद रास्ते से हटाना …मुंह मीठा मीठा रहेगा।      

 

 

 

राजेश…..इ साले सुर्जवा पर नजर रख….कुछ जादा ही चमक रहा है साला और कल मास्टर जी के बाद सूरज को भी अस्त कर दे…  सुबह करीब १० बजे, मास्टर जी विनोद चाय वाले के दूकान पर पहुंचे…..विनोद बेटा चाय देना तो।      

 

 

 

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जी मास्टर जी..अभी लाया।       तभी वहाँ राजू पास की एक नयी खुली कपडे की दूकान से कपड़ा लेने के लिए पहुंचा…..उधर मास्टर जी विनोद की दूकान से निकल रहे हैं और राजू कपडे की दूकान के अन्दर जा रहा है कि तभी धांय की आवाज के साथ अफरा – तफरी मच गयी।    

 

 

 

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राजू दुनाली  चलने की आवाज की ओर दौड़ा तो देखा कि मास्टर जी घायल हो  गए हैं और लोग उन्हें हास्पिटल ले जा रहे थे……तभी उसने सूरज को वहाँ से भागते देखा…वह उस दिशा में भागा..उसी समय राजेश ने ठाकुर साहेब को पर सारी  सिचुएशन बताई…तब ठाकुर साहेब ने दोनों को ही हटाने को कह दिया।        

 

 

 

कुछ देर के बाद राजू ने सूरज को पकड़ लिया और दोनों में खूब हाथ-पाहीं  होने लगी. इसी बीच राजेश ने दुनाली चला दी लेकिन सूरज ने वह  खुद पर ले लिया  और उधर राजू की दुनाली  का शिकार राजेश हो गया।        

 

 

 

तब राजू ने सूरज से इन सब का कारन पूछा तो सूरज ने बताया कि तुम्हे ठाकुर साहेब के बारे में कुछ नहीं पता है…..ठाकुर साहेब एक मशहूर बदमाश  त्रिलोचन सिंह हैं।      

 

 

 

ठाकुर साहेब यहाँ सत्ता की ताकत के बल पर बचे हुए हैं. अगर उनकी सत्ता गयी तो समझो त्रिलोचन सिंह भी गया..और हाँ तुम्हारे ऊपर हमला ठाकुर वीरेंदर सिंह ने इनके कहने पर ही किया था…..तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करने वाला भी यही है।        

 

 

 

 

 

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उन्होंने अब तक जितने कारनामे कराएं हैं सबका वीडियो   ठाकुर वीरेंदर के पास था….अब तुम्हें ठाकुर वीरेंदर का खास सत्तू ही उस वीडियो कैसेट के बारे में बता सकता है।        

 

 

 

 

इस समय सत्तू यह सब काम छोड़कर वाराणसी में गंगा किनारे साधू बना फिर रहा है..वह रोज वाराणसी के पांडेयपुर के एक छोटे से घर में रहता है….वह तुम्हे वही मिलेगा…. उसे यह सारी बात बता देना…..वह जरुर तुम्हारी मदद करेगा।        

 

 

 

 

इधर प्रदेश की राजनीति में तूफ़ान आ गया था. बड़े बड़े समाजसेवी, नेता, मिडिया मास्टर जी की तबियत जानने हास्पिटल पहुंचे. वहाँ डाक्टर ने बताया कि अब उनकी हालत खतरे से बाहर है।        

 

 

 

 

उनकी सिक्योरिटी बढ़ा दी गयी…….उधर राजू वाराणसी घात पर पहुंचा और सत्तू को ढूंढ निकाला……बहुत समझाने के बाद सत्तू ने वह कैसेट उसे दे दी।      

 

 

 

उधर ठाकुर साहेब का नाम मास्टर जी के हमले में आने पर पुलिस पर उन्हें गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ गया था……लेकिन बिना सबूत के उनपर कार्यवाही में पुलिस भी डर रही थी…कि रात ठीक १२ बजकर १ मिनट पर पोलिस एसपी को एक काल आयी।        

 

 

 

 

एसपी दिवाकर माथुर ने जैसी ही अपना मोबाइल खोला तो उन्हें एक whatsapp आया हुआ था….उस पर एक  लिंक थी…जब उन्होंने  उस लिंक  को खोला तो उसमें ठाकुर साहेब का पूरा कच्चा चिठ्ठा  था।      

 

 

 

 

तब तक यह खबर मीडिया में पहुँच गयी और आधी रात को पुरे प्रदेश के राजनितिक गलियारे के फोन घनघना उठे…..पोलिस ने ठाकुर साहेब को गिरफ्तार कर लिया……और चुनाव के बाद सत्ता की चावी मास्टर जी के पास आई।        

 

 

 

 

२- Hindi Kahani For Kids – मेरे पिता एक परिश्रमी व्यक्ति थे जिन्होंने  मां और मुझे संभालने के लिए बहुत ही कठिन परिश्रम किया।  उन्होंने कक्षाओं में भाग लेने के बाद अपने सभी शामें बिताईं।        

 

 

 

 

जिससे वे बहुत अच्छी पढ़ाई कर सकें और एक दिन बेहतर भुगतान वाली नौकरी पा सकें। रविवार को छोड़कर, पिता जी ने शायद ही अपने परिवार के साथ खाना खाया।      

 

 

 

 

उन्होंने बहुत मेहनत की और पढ़ाई की, क्योंकि वह अपने परिवार को एक खुशहाल जीवन देना चाहते थे। जब भी परिवार ने शिकायत की कि वह उनके साथ पर्याप्त समय नहीं बिता रहें हैं।      

 

 

 

 

तो उनका बस एक ही तर्क रहता ” यह सब परिवार के लिए ही तो कर रहा हूँ “. लेकिन वास्तव में वे अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने के लिए तरसते थे।      

 

 

 

 

 

परीक्षा के परिणाम का दिन आ गया. उनकी मेहनत रंग लायी। उन्होंने बहुत ही अच्छे नंबर से परीक्षा पास की। उन्हें वरिष्ठ पर्यवेक्षक की नौकरी मिली और एक अच्छी पेमेंट भी।        

 

 

 

 

यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा था।  अब वे परिवार को अच्छी जिंदगी दे सकते थे। जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। हालाकि अभी परिवार को उनके साथ समय बिताने का ज्यादा समय नहीं मिल पा रहा था।        

 

 

 

 

 

क्योंकि अब वे .. प्रबंधक के पद पर पदोन्नत होने की उम्मीद करते हुए खूब मेहनत कर रहे थे। उन्होंने खुद को पदोन्नति के लिए योग्य उम्मीदवार बनाने के लिए मुक्त विश्वविद्यालय में एक और पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया।          

 

 

 

 

इस बार भी उनकी मेहनत रंग लायी और उन्हें प्रमोशन मिल गया।  उन्होंने मां को घरेलु कार्यों से मुक्त करने के लिए एक नौकरानी रखने का फैसला लिया और उन्होंने ३ कमरों का एक बड़ा घर भी खरीदा। अब जिंदगी और भी बढ़िया और सुविधाजनक हो गयी थी.          

 

 

 

 

लेकिन उन्होंने इसे और आगे बढाने का फैसला लिया और भी अधिक प्रमोशन के लिए उन्होंने और भी अधिक मेहनत शुरू कर दी। मां के यह कहने पर की ” हमारे साथ भी समय बिताया करो ” उनका वही डायलाग रहता कि यह सब तुम सभी लोगों के लिए ही तो कर रहा हूँ.        

 

 

 

 

उन्होंने इसके लिए फिर से कड़ी मेहनत शुरू की और उन्हें सफलता मिली। इस बार उन्होंने एक बहुत ही बड़ा घर लिया और एक कार भी ली. अब उन्होंने यह निश्चित किया कि अब वे परिवार के साथ ही समय बितायेंगे। अब और मेहनत नहीं करेंगे।          

 

 

 

 

हम सभी बहुत ही खुश थे। लेकिन अगले ही दिन हमारी ख़ुशी मातम में बदल गयी. पिताजी की तबियत बहुत बिगड़ गयी। उन्हें हॉस्पिटल में ले जाया गया और वहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।          

 

 

 

 

डाक्टर ने बताया कि बहुत अधिक मेहनत की वजह से उन्हें काफी कमजोरी हो गयी थी। हम हमें यह समझ आ रहा था कि आखिर वे ऐसा क्यों कहते थे कि ” यह सब तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूँ ” .  इस कहानी से यही सीख मिलती है कि पैसा कमाना अच्छी बात है , लेकिन सिर्फ ” जियो और काम करो ” के रास्ते पर चलना गलत है।      

 
 
 
 
 
 
 
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