Children Stories in Hindi Written / कहानी इन हिंदी / Children Stories Hindi

Children Stories in Hindi  एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में लंका का राजदूत आया. राजा ने उसकी आगवानी की और उसका खूब स्वागत किया. उसने राजा से कहा ” महाराज! आपके दरबार में एक से बढकर एक विद्वान् दरबारी हैं. इसीलिए हमारे महाराज ने एक घडा बुद्धि लाने के लिए कहा है.”

 

 

 

 

अब अकबर चक्कर में  पड़ गए. भला बुद्धि को घड़े में कैसे दिया जा सकता है. उन्होंने राजदूत से कहा ठीक है. हम इसके बारे में कुछ देखते हैं. उन्होंने तुरंत ही अकबर को बुलाया और सारी बात बता दी. उन्होंने कहा कि लगता है, लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है.इसपर बीरबल ने कहा, इसमें कौन सी बड़ी बात है. आप राजदूत को कुछ दिन का समय दीजिये उसे एक घडा बुद्धि मिल जायेगी.

 

 

 

Children Stories Hindi Writing 

 

 

 

 

अकबर को कुछ समझ में नहीं आया. लेकिन उनके पास अब कोई और रास्ता भी नहीं था. सो उन्होंने वैसा ही किया जैसा बीरबल ने कहा था. इधर बीरबल ने अपने ख़ास नौकर को बुलाया और उससे छोटे मुंह के कुछ घड़ो की व्यवस्था करने के लिए कहा. नौकर ने फ़ौरन बीरबल की आज्ञा का पालन किया .

 

 

 

 

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घड़े आते ही बीरबल अपने नौकर को कद्दू की बेल के पास ले गए और एक घड़ा कद्दू के फूल पर उल्टा लटका दिया और नौकर को आदेश दिया की बाकी घड़ों को भी ऐसे ही लटका दो और साथ ही इस जगह पर ख़ास ध्यान दो.

 

 

 

 

कुछ दिन बाद अकबर ने बिरबल से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने कहा की कुछ दिनों की और मोहलत चाहिए। अभी घडा पूरी तरह बुद्धि से नहीं भरा है.

 

 

 

 

कुछ दिनों बाद बीरबल ने अकबर से कहा, महाराज! बुद्धि के घड़े तैयार हो चुके हैं. आप इसे राजदूत को कभी भी दे सकते हैं. अकबर बेचारे परेशान की बीरबल क्या गुल खिला रहे हैं.

 

 

 

लेकिन उन्हें बीरबल पर पूरा भरोसा था. उन्होंने अगले दिन का समय तय किया. दरबार पूरा भरा हुआ था. अकबर ने बुद्धि का घडा प्रस्तुत करने का आदेश दिया. बिर्बल्पहाले से तैयार थे. उन्होंने तुरंत नौकर को आदेश दिया और नौकर घडा लेकर हाजिर हो गया.

 

 

 

अब बीरबल ने घड़ा उठाया और लंका के राजदूत को देते हुए बोले ” श्रीमान! यह घडा आप राजा को दे दीजिएगा. लेकिन एक बात याद रखियेगा की बुद्धि निकालते समय यह घड़ा थोड़ा भी टूटना नहीं चाहिए अन्यथा सारी बुद्धि ख़त्म हो जायेगी.

 

 

 

 

इस पर राजदूत ने कहा, ” क्या मैं भी इस बुद्धि के फल को देख सकता हूँ”?

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” क्यों नहीं? यह आपका ही तो है.”

 

 

 

घडा देखते ही राजदूत की सारी अक्ल ठिकाने पर आ गयी. उसने मन ही मन सोचा, अरे मेरी मति मारी गयी थी जो मैंने ऐसा किया. यह सोचते हुए चुपचाप वहाँ से चला गया.

 

 

 

 

दूत के जाते ही आश्चर्यचकित अकबर ने भी घड़ा देखने की इच्छा प्रकट की. इस पर बीरबल ने तुरंत ही दूसरा घड़ा मंगवाया. घड़ा देखते ही अकबर ने जोर का ठहाका लगाया और बोले चलो आज इसी बुद्धि की सब्जी बनेगी.

 

 

 

 

4- अकबर बीरबल की हाजिर् जवाबी के बड़े कायल थे. एक बार ऐसे ही किसी बात पट पर खुश होकर उन्होंने बीरबल को पुरस्कार देने की घोषणा की, लेकिन समय बितने के साथ वे अपनी बात भूल गए.

 

 

 

 

अब बीरबल सोचे की कैसे महाराज को य्याद दिलाऊं वह बात? एक दिन की बात है अकबर और बीरबल यमुना नदी किनारे टहल रहे थे. अकबर ने तभी ऊँट देखा और बीरबल से पूछ लिया, अच्छा यह बताओ ऊँट की गर्दन मुड़ी क्यों होतीहै?

 

 

 

बीरबल के दिमाग की बत्ती जली. उन्होंने सोचा मौक़ा अच्छा है चौका मार लो. उन्होंने कहा “महाराज! ऊँट किसी से वादा करके भूल गया था, इसिलिये उसकी गर्दन मुड़ गयी. यह एक सजा है. जो कोई वादा करके भूल जाता हैउसके साथ ऐसा ही होता है.”

 

 

 

 

अकबर को तुरंत ही अपना वादा याद आ गया. उन्होंने बीरबल को जल्दी से महल में चलने को कहा और वहाँ पुरस्कार देते ही कहा, अब तो मेरी गर्दन नहीं मुड़ेगी न. और दोनों हंस पड़े.

 

 

 

 

३- एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा, ” क्या तुम एक ही आदमी में तीन तरह की खूबिया दिखा सकते हो”?

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” जी, पहली तोते की, दूसरी शेर की और तीसरी गधे की. परन्तु आज नहीं कल.”

 

 

 

 

अगले दिन का समय तय हुआ. बीरबल ने एक आदमी को ससम्मान पालकी में बिठाकर लाया और फिर उसे  पहला पैग दिया.  नशा चढते ही वह आदमी बादशाह से विनती करने लगा” माफ़ करें हुजुर. मैं गरीब आदमी हूँ. ” बीरबल ने कहा यह तोते की बोली है.

 

 

 

अब दूसरा पैग दिया गया और नशा चढ़ा तो उसने  अकबर को कहा ” तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या हुआ. हम भी अपने घर के शहंशाह है. हमें नखरे मत दिखाओ” बीरबल ने कहा यह शेर की बोली है.

 

 

 

 

अब तीसरा पैग लेते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और उटपटांग हरकते करने लगा. इसपर बीरबल ने कहा यह गधे  की बोली है. अकबर बहुत खुश हुए और बीरबल को ढेर सारा इनाम दिया.

 

 

 

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