कहानियां इन हिंदी रिटेन मेरा नाम रघु है।  यह मेरी सच्ची प्रेम कहानी है। अभी मैं १२वीं कक्षा का छात्र हूँ।  जब मैं ११वीं कक्षा में था तब मुझे पहली बार प्यार हुआ था।

उसका नाम रागिनी था।  वह बहुत ही चंचल और खूबसूरत थी। वह बगल के कालेज में पढ़ती थी। एक दिन जब रोज की तरह अपने घर जा रहा था तो मेरी नज़र उससे टकरा गयी और पहली ही नज़र में उसका खुमार मुझ पर छाने लगा।

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मैं उसे रोज देखता।  अब तो उसकी आदत सी हो गयी थी मुझे।  हर वक्त बस उसका चेहरा ही नज़र आता था।  आज कल मैं प्रेम गीत भी बहुत सुनने लगा था। इस बदलाव को बहुत लोगों ने महसूस किया लेकिन मैं बात को टाल  देता था।
एक दिन रागिनी मुझे नहीं दिखी। मैं तो बड़ा परेशान हो गया।  पागलों की तरह इधर – उधर उसे ढूंढने लगा।  मन में तरह – तरह के ख्याल आते थे, फिर मैं मन को समझाता शायद उसकी तबियत खराब हो गयी थी।
कहानियां पंचतंत्र की
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मेरे लिए रागिनी का क्या महत्व था वह आज पता चल रहा था।  किसी तरह से मैं घर पहुंचा।  ना तो खाने का मन कर रहा था न तो कुछ करने का। पूरी रात करवटों में कट गयी।
अगले दिन फिर से कालेज से छूटने के बाद रागिनी का दीदार हुआ, तब दिल को चैन पड़ा।  अब मैंने यह तय कर लिया कि रागिनी से बात करनी ही होगी, लेकिन कैसे ?

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डायरेक्ट बात हो नहीं सकत।  उसके गुस्सा होने का डर था।  उसकी सहेलियों के बारे में भी ख़ास जानकारी नहीं थी। वह केवल दो सहेलियों के साथ ही दिखती थी, लेकिन उनसे भी बात करने में डर लग रहा था, कहीं कोई एक थप्पड़ लगा दे तो बस…
अब मैंने रागिनी का नाम जानने का प्रयास किया, क्योंकि तब तक मुझे उसका नाम नहीं पता था। मुझे यह पता था कि उसकी सहेलियां जरूर उसे नाम से पुकारती होंगी।
कुछ दिनों की मेहनत के बाद उसका नाम मुझे पता चल गया।  उसका नाम था रागिनी दीक्षित।  अब मैंने फेसबुक का सहारा लिया और उसका नाम सर्च करने लगा।
अब तो कई सारे नाम उसपर आ गए।  सबसे बड़ी बात यह थी कि लड़कियां जल्दी अपनी इमेज डीपी पर नहीं लगाती।  अब बड़ी मुश्किल थी। सबकी प्रोफ़ाइल चेक करते हुए एक दिन सफलता मिली।
रागिनी ने अपने बर्थडे का एक पिक्चर अपने फेसबुक वाल पर शेयर किया था। अब क्या मैंने उसे रिक्वेस्ट भेज दी।  उसके बाद मैं बेसब्री से इन्तजार करने लगा।
बार – बार अपना फेसबुक खोलता।  करीब ३ घंटे बाद उसने रिक्वेस्ट असेप्ट कर ली और मैजेस किया, ” वाह आखिर तुमने मुझे ढूंढ ही लिया। “
अब तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूँ इसका।
इसका मतलब वह मुझ पर नज़र रख रही थी।  काफी सोचने के बाद मैंने उसे मैसेज किया, ” सॉरी,  मैं समझा नहीं। ” ” ओहो ! इतना दिन से पीछा कर रहे हो और अब समझे ही नहीं। ” रागिनी का रिप्लाई आया।
अब मुझे यकीं हो गया कि वह मेरी ही बात कर रही थी, पर मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मुझे फॉलो कर रही थी जबकि मेरे हिसाब से मैं उसे फॉलो फॉलो कर रहा था।
धीरे – धीरे हमारी दोस्ती की रफ़्तार में तेज़ी आने लगी।  हम काफी बाते आपस में शेयर करने लगे।  एक – दूसरे की पसंद नापसंद भी अच्छी तरह से समझने लगे।
एक दिन मैंने सोचा अब रागिनी को प्रपोज कर देना चाहिये।  मैंने रागिनी को मैसेज किया कल तुम सुबह ११ बजे कालेज के बगल वाले पार्क में मिलो।  मुझे कुछ स्पेशल बताना है।
इसपर उसने भी कहा मुझे भी कल कुछ सरप्राइज देना है।  मैं बहुत दिनों से सोच रही थी।  मैं तो रागिनी के प्यार में बावरा हो गया था।  मैं मन ही मन खूब खुश हो रहा था।
मुझे लगा कल रागिनी भी प्यार का इज़हार करेगी। रात कैसे बीत गयी पता ही नहीं चला। सुबह फ़टाफ़ट तैयार होकर मैं पार्क में पहुँच गया।  कुछ ही देर में वहाँ रागिनी भी आ गयी।
आते ही उसने पूछा क्या बोलना था बोलो ? इसपर मैंने बोला, ” नहीं तुम बोलो।” दरअसल मैं उससे ही प्रपोज करवाना चाहता था।  वह बार बार बोली पहले तुम… मैं बोलता पहले तुम …… तभी उसने कहा मेरी शादी फिक्स हो गयी है।  कल सगाई है।  मैं कौन सा ड्रेस पहनू यही पूछना था।
तुम्हे तो मेरी च्वाइस पता ही है न…….यह सुनते ही मुझे ज़ोर सा झटका लगा।  ऐसा लग रहा था कि धरती फट रही है और मैं उसमें समा रहा हूँ। मैं वही बैठ गया।
तभी रागिनी ने कहा क्या हुआ? तबियत तो ठीक है न ? यह लो पानी पीओ। मैंने इंकार कर दिया।  आज पहली बार था जो मैंने उसके हाथ की दी हुई कोई चीज इंकार की हो।  नहीं तो उसके हाथ का जहर भी मैं अमृत समझ कर पी लेता।
तब उसने पूछा, “अच्छा तुम क्या बताने वाले थे ? ” मैंने खुद को संभाला और बोला कुछ नहीं।  चलो तुम्हे खरीदारी करनी है न।  हम दोनों चल दिए।  मैं बहुत ही निराश था।  सारी दुनिया सूनी  – सूनी  लग रही थी।
तभी अचानक से रागिनी ने पूछा, ” क्या हुआ लडके का नाम भी नहीं पूछा तुमने? “
तब मैंने कहा, ” छोडो जाने दो।  तुम्हे पसंद है ना बस।  “
 ” ऐसा थोड़ी होता है।  चलो ठीक है फोटो तो देख लो ” रागिनी ने कहा।
मैंने बेमन से मना कर दिया।  इधर मेरी दुनिया उजड़ी हुई थी और उसे अपनी ख़ुशी की पड़ी थी।  लेकिन मैं अपना दुःख उसके सामने नहीं बता सकता था।  क्योंकि इससे उसे दुःख होता और मैं उसे दुखी नहीं देख सकता था।
तभी बातों- बातो में उसने थोड़ा सा फोटो दिखाया।  फोटो देखकर मैं चौंका। मैंने उससे पूरा फोटो दिखाने के लिए कहा, लेकिन वह मुस्कुराते हुए ना – ना करने लगी।
इतने में मैंने उससे फोटो छीन ली। मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।  यह तो मेरी ही फोटो थी।  मैंने उससे पूछा, ” यह सच है ? “
उसने कहा, ” हमारी पसंद नापसंद, सोच सब एक – दूसरे से मिलता है तो प्यार क्यों नहीं मिलेगा।  “
मेरे आँखों में आंसूथे , लेकिन प्यार के…सच्चे प्यार के।

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२- प्यार की कहानियां यह कहानी उन दिनों की है जब मैं ८वीं में पढ़ता था. मेरा गाँव अर्धशहरी क्षेत्र में है. मतलब वहा शहर का विकास है तो गाँव की खुशबू भी है.

 

 

 

अच्छी इमारते हैं तो आम के बाग़ और फूलों की क्यारियाँ और गांव की अल्हड मस्ती भी है. मैं बहुत ही धार्मिक किस्म का था. मेरी आदत थी कि हर गुरुवार को मैं मंदिर अवश्य ही जाता था.

 

 

 

 

वैसे तो मैं घर के पास वाले भगवान नीलकंठ के मंदिर तो रोज ही जाता था, लेकिन गुरुवार के दिन शहर की बीचोबीच स्थित कान्हा के मंदिर जाना मैं कभी नहीं भूलता था.

 

 

 

एक दिन मैं साइकल से मंदिर गया और जब मैं वापस आया तो देखा कि एक लड़की जो की लगभग मेरी हमउम्र की थी वह उस साइकल पर बैठी हुई थी.

 

 

 

 

मैंने उससे कहा कि साइकल पर से उतारो मुझे जाना है….तो उसने पलट कर कहा की जाना है तो जाओ…मैं क्या करूँ…उसकी इस बात से मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे साइकल से धकेल दिया…..और तुरंत ही वहाँ से  चलता बना…मैंने यह भी नहीं देखा कि उसे चोट लगी है.

 

 

 

अगले दिन जब मैं मंदिर जा रहा था तो देखा कि वह भी अपने किसी रिश्तेदार के साथ मंदिर की तरफ जा रही थी….उसके पैर में थोड़ी चोट लग गयी थी. वह लंगडाकर चल रही थी.

 

 

 

यह देखकर मुझे बहुत ही बुरा लगा. मैंने सोच लिया कि मंदिर से लौटते समय मैं उसे अवश्य ही सॉरी बोल दूंगा. जब मैं मंदिर से वापस लौटा तो वह वहीँ शांत भाव से कड़ी थी.

 

 

 

 

मैं उसकी पास गया और उसे सॉरी बोला. उसने  सर निचे झुका लिया और कुछ नहीं बोली. मुझे लगा कि यह ज्यादा ही नाराज है…फिर मैं वहा से चला और जैसे साइकल पर बैठने गया तो देखा कि किसी इसकी हवा ही निकाल दी है.

 

 

 

 

तभी वह लड़की मेरे पास आई और बोली सॉरी….पहले तो मैं उसके तरफ आश्चर्य से देखा और फिर जोर से हँसने लगा और यह देखकर वह भी जोर से हँसाने लगी और मैं उसका चेहरा देखता रह गया.

 

 

 

फिर हम दोनों रोज मिलने लगे….खूब सारी बातें होती थी….पढ़ाई की भी बातें होती थी….मुझे उससे प्यार हो गया…..मैं मौक़ा ढूंढ रहा कि कब मैं उससे अपनी दिल की बात कहूँ.

 

 

 

 

लेकिन इसी बीच वह मंदिर आना बंद कर दी…जब मैंने उसके बारे में पता किया तो पता चला कि उसके पापा का तबादला दुसरे शहर में हो गया है और वे लोग चले गये.

 

 

 

मैं बहुत दुखी हुआ…एक दिन उसकी एक दोस्त ने एक चिट्ठी मुझी दी जो कि उसके द्वारा मुझे लिखी गयी थी…..उसने कहा कि वह भी मुझे प्यार करने लगी थी.

 

 

 

लेकिन शायद कुदरत को यह मंजूर नहीं था. तेरा इश्क मुझे हमेशा ही याद रहेगा……मैंने हलकी सी सांस ली और कहा की सच तेरा इश्क मुझे ताउम्र याद रहेगा.

 

 

 

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