Story Writing in Hindi Wikipedia / गाँव की डरावनी कहानी हिंदी में

Story Writing in Hindi इस कहानी के सभी पात्रों , जगह के नाम बदले हुए हैंऔर इस कहानी का मकसद किसी भी तरह के अन्धविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है .

 

 

 

 

इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है. यह horror story चुड़ैल का प्यार एक गाँव दिवानपुर की है. गांव के त्रिभुवन काका के पास बहुत सारी गायें थी.

 

 

 

Story Writing in Hindi For Class 7 

 

 

 

वो उनका दूध बाजार में बेचते और उसी से उनकी रोजी रोटी चलती थी.वे रोज सुबह दूध निकालने के बाद गायों को लेकर इस गांव से उस गांव , कभी नदी किनारे, कभी ताल तो कभी जंगल में घूमा करते और दिन ढलते ही गांव की और निकल पड़ते .

 

 

 

 

दिनभर वे घर से बाहर ही रहते इसलिए भूख मिटाने के लिए वे सत्तू तो कभी कुरमुरा तो कभी रोटी और उसके साथ ही दूध , दही , लस्सी या मठठा { छाछ } भी ले जाते और किसी पेड़ की छाया में खा पीकर मस्त रहते .

 

 

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प्यास लगाने पर किसी गाँव के बाहर लगी नल, ट्यूबेल या फिर कुएं से पानी निकाल कर पी लेते. वैसे ठंडी के दिनों में वे पानी भी ले जाती , लेकिन गर्मी के दिनों में पानी गर्म हो जाने के कारण वे पानी नहीं ले जाते. बोर होने पर पुराने गाने गुनगुनाते . यही उनकी दिनचर्या थी और वे इससे खुश भी थे. एक बार की बात है.

 

 

 

गाँव की डरावनी कहानी हिंदी में

 

 

 

 

त्रिभुवन काका बीमार हो और ऐसे बीमार हुयी कि ठीक होने का नाम ही ले रहे थे. एक दिन बीता, दो दिन बीता लेकिन कोई आराम नहीं हुआ और उधर गायों का बुरा हाल. उन्हें तो सिवान में घूम – घूम कर चरने की आदत थी.

 

 

 

 

वे रम्भा – रम्भा कर आसमान सिर पर उठा लीं. त्रिभुवन काका की पत्नी पुवाल वगैरह गायों को खाने के लिए देती , लेकिन गाय उसे खाना तो दूर देखती भी नहीं थीं… मानों अनसन पर बैठ गयी हों.

 

 

 

 

उसपर दिन भर खूंटे के इधर – उधर घूम – घूमकर गोबर से पूरी जमीन कीचड़ कर दी और कुछ तो इतनी सयानी थी कि नाद में ही पैर डालकर खड़ी हो गई. उनका हठ देखकर त्रिभुवन काका बड़े परेशान हो गए. उनकी तो हिम्मत नहीं पड़ रही थी तो उन्होंने अपने साले के लड़के को बुला लिया.

 

 

 

 

उसका नाम राकेश था . १८ साल की उम्र में ही वह बहुत ही होशियार था. उसके घर पर भी गायें थी तो उसे इनसब चीजों की जानकारी थी. दूध दही खाकर गबरू जवान बन गया था. कोई उसे देखकर कोई उसे १८ साल का कह ही नहीं सकता था.

 

 

 

 

उसे त्रिभुवन के सारे काम संभाल लिए. वह साथ में अपनी किताबे भी ले जाता और पेड़ की छाया में पढ़ाई भी करता. त्रिभुवन काका बड़े खुश हुए. गर्मी का दिन था .

 

 

 

 

 

खेतों में घास गर्मी की वजह से ख़त्म हो गयी थी और उसे इस इलाके की जानकारी भी नहीं थी. वह गायों को लेकर पास के जंगल में पहुँच गया और कब वह घने जंगल में पहुँच गया , उसे पता ही नहीं चला.दोपहर का समय हुआ था . राकेश को प्यास लगी . पानी गर्म हो जाने के कारण उसने पानी गिरा दिया था. वह इधर – उधर जंगल में पानी की तलाश में घुमने लगा.

 

 

 

 

Story Writing in Hindi For Class 6 

 

 

 

अचानक उसे एक कुवां दिखाई दिया. उसकी जान में जान आई. वह झट से कुएं के पास पहुंचा तो देखा गर्मी के कारण पानी काफी नीचे था. उसने एक छोटी बाल्टी जिसे वह अपने साथ रखता था उसे अपनी धोती से बांधकर पानी निकालने की कोशिश की , लेकिन कामयाब नहीं हुआ. पानी काफी नीचे था.

 

 

 

 

 

उसने बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ. वह थक गया था और पसीने पूरी तरह भीग गया था. वह हारकर पेड़ की ओत लेकर बैठ गया. तभी उसे पायल की छम – छम की आवाज सुनाई दी. वह चौंका कि इस जंगल में और दोपहर के समय कौन आ सकता है. उसने पीछे मुड़कर देखा तो एक बेहद खुबसूरत लड़की अपनी कातिलाना अदाओं के साथ राकेश की ओर चली आ रही थी.

 

 

 

 

 

राकेश उसे एकटक देखता रह गया. उस किशोरी की खूबसूरती में राकेश खो गया था. पास आकर उस किशोरी ने नटखट अदा के साथ राकेश को पूछी ” प्यास लगी है क्या ? मैं पानी पिला दूँ .” राकेश तो जैसे सुध – बुध खो बैठा था , उसने घबराकर हाँ में सिर हिला दिया. किशोरी आगे बढ़ी और कुएं की जगत पर पहुंचकर अपने दोनों हाथों की अंजुली बनाई और कुएं में झुक गयी. राकेश जैसे सम्मोहित हो गया था. उसे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था.

 

 

 

 

 

किशोरी ने पानी निकाला और राकेश की तरफ बढ़ी . राकेश बिना कुछ बोले अपने अपने हाथों की अंजुली बनाकर अपने मुंह से सटा दिया. किशोरी ने अपने अंजुली का जल राकेश के अंजुली में  उड़ेलना शुरू किया और राकेश ने उस अमृत रूपी जल को पीना शुरूकर दिया.

 

 

 

 

वह अलग बात थी कि उसके अंजुली का आधा पानी जमीन पर गिर रहा था क्योंकि अभी भी वह उस किशोरी के चहरे की खूबसूरती को एकटक पिए जा रहा था. ना तो किशोरी के हाथ से जल ख़त्म हो रहा था और ना ही राकेश की प्यास ही बुझ रही थी. ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे सदियों की प्यास आज तृप्त हो रही हो.

 

 

 

 

यह सिलसिला आधे घंटे तक चला . तभी किशोरी ने ध्यान दिया कि राकेश पानी कम पी रहा था और उसके चहरे का रसपान अधिक कर रहा था तो वह असहज होते हुयी बोली ‘ और पिलाऊं कि बस ?

 

 

 

राकेश कुछ बोल ना सका सिर्फ ना में सर हिला दिया. उसके बाद उस किशोरी ने प्यार भरी आवाज में कहा ” अच्छा मैं चलती हूँ . ” राकेश अब भी कुछ नहीं बोला सिर्फ हाँ में सिर हिला दिया. वह किशोरी बलखाती हुयी जंगल में गम हो गयी. राकेश कुछ देर कुएं की जगत पर बैठा रहा और फिर अचानक वह उठा और गायों की और चल दिया.. लेक्किन अब उसकी चाल बदल गयी थी.

 

 

 

 

 

उसके मन में प्यार के अंकुर फूटने लगे थे. गायों को लेकर राकेश घर पहुंचा . आज वह बहुत ही खुश था. उसके मन में प्यार की तरंगे हिलोरे मार रही थीं. वह रह – रह कर कोई प्यार भरा गीत गाने लगता था. उसकी भूख – प्यास सब गायब हो गयी थी. वह खोया – खोया सा रहने लगा. उसे हर समय वही क्षण दिखाई दे रहे थे.

 

 

 

Moral Stories in Hindi For Class 7 / भरोसा करिये यह हैंडपैंप चलता है हिंदी कहानी

 

 

 

 

उस खुबसूरत चेहरे को वह भूल ही नहीं पा रहा था. उसने रात को खाना भी नहीं खाया और सोने चला गया, लेकिन नींद कहा आ रही है. वह करवटें बदलता और प्यार के तराने छेड़ता . उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो गया है. क्यूँ उसकी भूख, उसका चैन , उसकी नींद उड़ गयी है.

 

 

 

Story Writing in Hindi For Class 5 

 

 

 

 

अचानक उसका दिमाग ठनका और वह डर के मारे कापने लगा . उसका बदन पसीने से लथपथ हो गया था. वह जोर से चीखा और जबतक त्रिभुवन काका और उनकी पत्नी आती वह बेहोश हो चुका था. त्रिभुवन काका उसके चहरे पानी छिड़के और भी जतन किये , लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

 

 

 

 

 

तभी त्रिभुवन काका की पत्नी इमिरिति देवी ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया . अभी दो ही लाइन उन्होंने पढ़ीं थी कि राकेश तेज आवाज में हंसा , लेकिन आश्चर्य यह था कि यह हंसी राकेश की नहीं होकर किसी लड़की की थी. अब तो त्रिभुवन काका और इमिरिति देवी के प्राण सूख गए. वे वहाँ से तेजी से निकले और पास के ही रामखेलावन ओझा के पास पहुंचे और सारा माजरा कह सुनाया.

 

 

 

 

 

इसपर ओझा ने कहा कि जंगल में ही कोई बात हुई होगी . चलो घर चल कर देखते हैं. ओझा , त्रिभुवन काका और उनकी पत्नी जैसे ही बाहर निकले एक काली बिल्ली ने तेजी से उनका रास्ता काटा . रामखेलावन ने कहा कि चुड़ैल कोई छोटी – मोटी चुड़ैल नहीं है. इसे हम अकेले नहीं संभाल सकते .

 

 

 

 

 

आप गाँव के और भी लोगों को साथ लो और वहा सभी लोग एक साथ गायत्री मन्त्र का ऊँचे स्वर में जाप करेंगे और यह घंट, शंख बजायेंगे. कोई थोड़ा भी नहीं डरेगा. वह तमाम तरह के हथकंडे अपनाएगी . कभी रोना , कभी मायूस होना, कभी डराना लेकिन सबको पाठ जारी रखना है.

 

 

 

 

 

जैसे ही सभी लोग त्रिभुवन काका के घर पहुंचे तो एक तेज हंसी के साथ ही राकेश छत की चाहरदीवारी पर चलने लगा. सबके होश उड़ गए. लेकिन किसी ने हार नहीं मानी और गायत्री मन्त्र का जाप शुरू कर दिया और साथ ही घंट , शंख आदि बजाना शुरू कर दिया. रात के समय इस तरह की आवाज से अगल – बगल के गाँव वाले भी बहुत ही अचंभित हुए और गुटों में वे भी इस गाँव की तरफ आने लगे.

 

 

 

 

इधर ओझा ने अपने कार्य शुरू किये. जैसे – जैसे ओझा के मन्त्रों का प्रभाव बढ़ता वह चुड़ैल और भी भयानक तरके से लोगों को डराती. कभी वह उलटे पाँव चलती तो कभी छत पर उलटा चलने लगाती तो कभी भीड़ के किसी एक ख़ास की तरफ तेजी से बढती , लेकीन वह किसी को छू नहीं पाती.

 

 

 

 

५ घंटे तक यह कार्यक्रम चला . सुबह के ४ बजने वाले थे . तभी ओझा की नजर वहाँ गिरे गुलाब के फूल पर पड़ी . उसपर खून लगा हुआ था. उसने वह फूल जैसे ही उठानी की कोशिश की चुड़ैल खूब जोर से चिल्लाई और एक भयानक रूप बनाकर तेजी से ओझा की और झपटी ,लेकिन तबतक ओझा ने फूल को आग में डाल दिया और आग में डालते ही राकेश का शरीर शांत होने लगा और कुछ ही समय में एक तेज चीत्कार के साथ एक काला गहरा धुवां राकेश के मुंह से निकला और राकेश उठकर बैठ गया. पूरा माहौल सामान्य हो गया था.

 

 

 

 

 

ओझा के पूछने पर राकेश ने सारी बात बता दी और उसने बताया कि उसे रात को नींद नहीं आ रही थी तभी वह चुड़ैल मेरे पास उसी रूप लड़की के रूप में आई. तब मुझे शक हो गया. मैंने उससे उसका नाम पूछा .

 

 

 

 

वह कुछ नहीं बोल रही थी. उसने इस गुलाब के फूल के कांटे को मेरे अंगुली से चुभा दिया और जैसे ही इसमें खून लगा वह अपने असली रूप में आ गयी.

 

 

 

 

इस घटना के बाद राकेश के साथ ही त्रिभुवन काका भी उस जंगल की तरफ जाना छोड़ दिए. लोग इस चुड़ैल का प्यार से काफी हतप्रभ थे. कई दिनों तक यह बात लोगों के बीच केंद्र विन्दु बनी रही.

 

 

 

 

 

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Small Story in Hindi With Moral / कौन हैं माता सरस्वती जाने पूरी कथा हिंदी में

Small Story in Hindi Written Saraswati Mata हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं. वह भगवान ब्रह्मदेव की मानसपुत्री हैं. मां सरस्वती को विद्या की देवी माना गया है. इन्हें वाग्देवी, शारदा, सतरूपा, वीणावादिनी, वागेश्वरी, भारती आदि नामों से जाना जाता है.

 

 

 

 

माता सरस्वती की उपासना से मुर्ख भी विद्वान बन सकता है. वसंत पंचमी के दिन की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही इन्हें भगवान ब्रह्मा जी ने उत्पन्न किया था.

 

 

 

Small Story in Hindi With Drawing

 

 

 

 

मां सरस्वती को कला, विद्या, संगीत की देवी माना जाता है.  उनमें विचारणा, भावना और सद्भावना का समन्वय है. माता सरस्वती को शिक्षा की देवी कहा जाता है.

 

 

 

जो भी छात्र माता सरस्वती की पूजा करता है उसे मां का आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त होता है. वसंत पंचमी के दिन विद्यालयों में माता सरस्वती की पूजा की जाती है.

 

 

 

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शिक्षा और बुद्धि के  बगैर मनुष्य एक पशु के सामान है. यह दोनों ही चीजें माता सरस्वती से प्रदान होती हैं. भौतिक जीवन की सुख – सुविधाओं के लिए बुद्धि और ज्ञान की आवश्यकता होती है.

 

 

 

 

बौद्धिक क्षमता विकसित करने, चित्त की चंचलता और अश्वस्थता दूर करने के लिए मां सरस्वती की साधना विशेष उपयोगी है. कल्पना – शक्ति की कमी, उचित निर्णय ना कर सकने की क्षमता में कमी, विस्मृत, प्रमाद, दीर्घसूत्रता जैसे कारणों को दूर करने के लिए माता सरस्वती की आराधना जरुर करनी चाहिए. क्योंकि उपरोक्त कारणों के कारण ही मानव मुर्ख कहलाता है और अनेकों बार विपत्ति का कारक बनाता है.

 

 

 

Small Story in Hindi For Class 5 

 

 

 

 

कैसे उत्पन्न हुईं माँ सरस्वती – सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य की रचना की. अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे. उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र मौन छाया रहता है.

 

 

 

 

विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा… इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ.

 

 

 

यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी. ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया.

 

 

 

 

जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई. जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया. पवन चलने से सरसराहट होने लगी.

 

 

 

 

तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा. सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है. ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं. संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं.

 

 

 

Saraswati Devi ने क्यों दिया ब्रह्मा जी को श्राप

 

 

 

ब्रह्मदेव इस सृष्टि के रचयिता है. उन्होंने इस संसार की रचना की है. आज हम आपको बता रहे आखिर माता सरस्वती ने भगवान ब्रह्मदेव को श्राप क्यों दिया था.

 

 

 

इस घटना  का वर्णन सरस्वती पुराण और मत्स्य पुराण में मिलता है.  भगवान ब्रह्मदेव ने अपनी शक्ति से देवी सरस्वती की उत्पत्ति की. इस कारण ब्रह्मा जी देवी सरस्वती के मानस  पिता हुए.

 

 

 

 

भगवान् ब्रह्मा जी देवी सरस्वती पर मोहित हो गए. देवी सरस्वती ने इस बात को भांप लिया और उनके नज़रों से बचने की कोशिश करने लगीं. लेकिन वे जिस भी दिशा में, जिस भी जगह छिपती, ब्रह्माजी का पांचवा सर उन्हें ढूंढ लेता था.

 

 

 

 

अंततः उन्हें विवश होकर विवाह करना पड़ा. इससे एक पुत्र हुआ और उनका नाम रखा गया स्वयंभू मनु. कहा जाता है की इस घटना से महादेव शिव शंकर अत्यधिक क्रुद्ध हुए.

 

 

 

 

उसके बाद उन्होंने ब्रह्मा जी के पांचवे सर को काट दिया. कई जगहों पर कहा गया है की भगवान् ब्रह्मदेव का यह सर अपवित्र और अमर्यादित भाषा बोलता था, जिसके वजह से भगवान् शिव ने इस सर को काट दिया.

 

 

 

 

ब्रह्मा, विष्णु और महादेव को त्रिदेव कहा जाता है. परन्तु भगवान् शिव और भगवान् विष्णु की पूजा तो सर्वत्र होती है लेकिन ब्रह्मदेव की पूजा नहीं होती है. आज इसका कारण जानते हैं.

 

 

 

एक बार की बात है विश्व कल्याण हेतु ब्रह्मदेव ने यज्ञ  का  आयोजन करने के बारे में सोचा. यग्य आयोजन हेतु कमल पुष्प को धरती पर भेजा. वह पुष्प राजस्थान के पुष्कर में गिरा.

 

 

 

 

आज भी वहाँ भगवन ब्रह्मदेव का मंदिर है. पुष्प के गिरने से एक तालाब का निर्माण हुआ. यहाँ भक्तों की लम्बी कतार लगती है परन्तु कोई भी वहाँ पूजा नाहिंन करता है, श्रद्धालु दूर से ही प्रार्थना कर लेते हैं.

 

 

 

 

जब भगवान् ब्रह्मा जी उस स्थान पर यज्ञ हेतु पहुंचे तो माता सरस्वती को पहुंचने में बिलम्ब हो गया. शुभ मुहूर्त निकलता जा रहा था. ऐसे उन्होंने एक स्थानीय ग्वाल बाला ” गायत्री ” से विवाह कर लिया और यज्ञ में बैठ गए.

 

 

 

 

जब थोड़ी देर बाद माता सरस्वती वहाँ पहुंची तो यह नजारा देख वे बहुत क्रुद्ध हुईं और ब्रह्मदेव को श्राप दे दिया कि इस धरा पर ना तो कोई उनकी पूजा करेगा और ना ही उन्हें याद रखेगा.

 

 

 

 

उन्होंने इन्द्रदेव और भगवान् शिव और भगवान् विष्णु को भी अलग – अलग श्राप दिया. क्योंकि इन्द्रदेव ही उस ग्वाल बाला को लाये थे और इस यज्ञ में भगवान् शिव और भगवान् विष्णु भी उपस्थित थे.

 

 

 

 

सभी देवताओं ने माता सरस्वती से श्राप वापस लेने की प्रार्थना की, लेक्किन वह नहीं मानी. जब उनका क्रोध शांत हुआ तब उन्होंने कहा जिस स्थान पर यह कमल पुष्प गिरा सिर्फ वहीँ ब्रह्मदेव की पुजा  होगी. इसके अतिरिक्त कहीं पर उनकी पूजा होने पर या मंदिर निर्माण होने पर परिणाम विनाशकारी होंगे.

 

 

 

 

मां सरस्वती की वन्दना  Saraswati Vandana Saraswati Mantra

 

 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

 

 

 

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Short Hindi Stories with Moral values pdf / महर्षि दुर्वासा की कथा

Short Hindi Stories with Moral values महर्षि दुर्वासा माता अनुसुइया और ऋषि अत्री के पुत्र थे. महर्षि दुर्वासा सतयुग, द्वापर और त्रेता तीनो ही युगों में थे.

 

 

 

उनके दिए हुए श्राप और आशीर्वाद से कई घटनाएं हुई, जो की बड़े परिवर्तन का कारण बनी.  Durvasa Rishi Ka Shraap कई बड़े परिवर्तन का कारण बना .

 

 

 

Short Hindi Stories with Moral values For Class 5

 

 

 

Durvasa Rishi Ka Krodh बहुत प्रबल था .    क्रोध में अक्सर वह श्राप दे देते थे. लेकिन अगर वह किसी पर प्रसन्न होते थे तो उसकी हर मनोकामना को पूरा करते थे.

 

 

 

 

उनके क्रोध के कारण हर कोई उनसे डरता था. ऋषि दुर्वाषा माता अनुसुइया के पुत्र हैं. उन्हें सती अनसूया ने भगवान शंकर के आशीर्वाद से प्राप्त किया था. महर्षि दुर्वासा का आश्रम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में है.

 

 

 

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माता अनुसुइया और उनके पति अत्री दुर्वाषा जी के इस व्यवहार से बहुत ही चिंतित और दुखी थे. दुर्वासा जी का जन्म सतयुग के प्रारंभ में ही हुआ था.

 

 

 

 

एक बार की बात है।  इक्ष्वाकु वंश के एक राजा थे अम्बरीश. अम्बरीष बहुत ही दयालु और न्यायप्रिय राजा थे. उनके शासन में प्रजा बहुत ही खुश थी. वे प्रजा के हर सुख दुःख का ख्याल रखते थे. इसके साथ ही राजा अम्बरीश भगवान श्री हरी के परम भक्त थे.

 

 

 

 

उनकी भक्ति से भगवान नारायण बहुत अधिक प्रसन्न हुए और अपने sudarshan chakra का नियंत्रण राजा अम्बरीश के हाथ में सौंप दिया. यह भी भगवान की एक लीला थी. भगवान के प्रत्येक कार्य में भविष्य का सार छुपा होता है.

 

 

 

 

एक बार की बात है राजा अम्बरीश और उनकी धर्मपत्नी ने एकादसी का व्रत किया और उस व्रत के पारण में ब्राह्मणों को भोजन के लिये आमंत्रित किया गया था और उस निमंत्रण में महर्षि दुर्वासा भी आये थे.

 

 

 

 

भोजन करने के पहले महर्षि दुर्वासा यमुना जी में स्नान करने चले गए. इधर बहुत देर तक इन्तजार करने के बाद राजा अम्बरीश ने अन्य ब्राह्मणों से इस बारे में पूछा तो ब्राह्मणों ने कहा कि राजान आप पानी पी लीजिये या खाना खाने और ना खाने के बराबर होगा. ब्राह्मणों की बात मानकर राजा ने ऐसा ही किया.

 

 

 

 

जब राजा ने व्रत खोल लिया तो उसके कुछ देर बाद महर्षि दुर्वासा वहाँ आ पहुँछे और यह देख कि राजा ने उनके अनुपस्थिति में ही व्रत खोल लिया है बहुत क्रोधित हुए और क्रोध में उन्होंने कृत्या राक्षसी की रचना की और उसे राजा अम्बरिश पर आक्रमण का आदेश दे दिया.

 

 

 

 

अपने बचाव के लिए  राजा अम्बरीश ने sudarshan chakra का आह्वान किया और उसी क्षण सुदर्शन प्रकट हुआ और कृत्या राक्षसी का वध कर दिया और उसके बाद वह दुर्वासा ऋषि की तरफ बढ़ा.

 

 

 

 

अब durvasa अपने प्राण बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे…भागते भागते वे इंद्र देव के पास पहुंचे और अपने प्राण बचाने की गुहार लगाईं, लेकिन इन्द्रदेव ने इसमे अपनी असमर्थता जताते हुए उन्हें भगवान ब्रह्मा के पास भेज दिया. भगवान ब्रह्मदेव ने भी इसमे असमर्थता जताई और उन्हें भगवान भोलेनाथ के पास भेज दिया और बाबा भोले ने उन्हें भगवान विष्णु के पास भेज दिया.

 

 

 

 

भगवान विष्णु के पास पहुँचने पर महर्षि दुर्वासा ने पूरी बात बताई. तब भगवान विष्णु ने कहा की हर जगह क्रोध ठीक नहीं होता है. इसमें मैं भी कुछ करने में असमर्थ हूँ क्योंकि इस समय सुदर्शन चक्र का नियंत्रण राजा अम्बरीश के पास है अतः आपको वहीँ जाना होगा.

 

 

 

 

दुर्वासा जी को अपनी भूल का एहसास हो चुका था. वे तुरंत ही राजा के पास पहुंचे और सारी बात बताते हुए सुदर्शन को रोकने को कहा, तब राजा ने तुरंत ही सुदर्शन को रोक दिया.

 

 

 

 

Moral – हिन्दू धर्म की कथाओं में हमेशा कोई ना कोई सार छुपा होता है।  इस घटना से यही शिक्षा मिलती है कि बिना सोचे – समझे कभी क्रोध नहीं करना चाहिए। 

 

 

 

2- Short Hindi Stories with Moral values For Class 3 अकबर को मजाक की आदत थी. एक बार उन्होंने नगर के सेठों को आदेश दिया की अब से तुम लोगों को नगर की पहरेदारी करनी होगी. अब सेठ बड़े चक्कर में पड़ गए और भागे-भागे बीरबल के पास आये और सारी बात कह सुनाई.

 

 

 

 

बीरबल ने कहा कोई बात नहीं अब जैसा कहता हूँ वैसा ही करो. तुम सभी लोग अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामें को सर पर लपेटकर पुरे नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहो “अब तो आन पड़ी है”.

 

 

 

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / चुड़ैल और बन्दर की कहानी

 

 

 

 

रात को अकबर भेष बदलकर राज्य के निरिक्षण के लिए निकले तो सेठों का यह निराला रूप देख पहले तो खूब हँसे और फिर बोले ” यह सब क्या है”?

 

 

 

 

सेठों के मुखिया ने कहा “हम सब व्यापारी है. हमें इसके बारे में क्या पता? पता होता तो हमें बनिया क्यों कहा जाता? झो जिसका काम होता है वही उसे अच्छे से कर सकता है.” अकबर को बात समझ में आ गयी और उन्होंने अगले ही दिन हुक्म वापस ले लिया

 

 

Moral Stories in Hindi For Class 7 / भरोसा करिये यह हैंडपैंप चलता है हिंदी कहानी

 

 

3- किसी समय बीरबल ने अकबर को एक कहावत सुनाई थी की ” खाकर लेटना और मारकर भाग जाना ” सयाने लोगो की पहचान है. एक दिन महाराज को दोपहर में यह कहावत याद आ गयी.

 

 

 

बीरबल जरुर खाना खाने के बाद लेटता होगा. क्यों ना आज उसकी बात को गलत सिद्ध किया जाए. अकबर ने एक नौकर को बीरबल के पास भेजा और तुरंत आने को कहा. बीरबल सारा माजरा समझ गए.

 

 

 

उन्होंने नौकर को कहा रुको मैं कपडे बदल कर आता हु.. उन्होंने उस दिन चुस्त पायजामा चुना और पायजामा पहनने के बहाने वह बिस्तर पर लेट गए और काफी देर तक लेते रहे.

 

 

 

दरबार पहुंचाते ही अकबर बोले, बीरबल आज खाना खाने के बाद लेते की नहीं. बिलकुल लेटा था महाराज.इसका मतलब तुमने मेरे आदेश की अवहेलना की है. तुम्हे इसका दंड मिलेगा. इसपर बीरबल बोले, महाराज! मैंने कोई हुक्म उदूली नहीं की है.

 

 

 

 

मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं.  आप तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं.  अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था. ” बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया. अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्करा पड़े.

 

 

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Story Hindi language / एकतरफा प्यार की बेहतरीन हिंदी कहानी

Story Hindi language अपने जीवन में हर किसी को एक बार प्यार  जरूर हाेता है,लेकिन वह अक्सर  one sided love  हाेता है… लेकिन इसका भी अपना एक मजा हाेता है.

 

 

 

हर समय अपने प्यार को  पा जाने की उम्मीद और उस उम्मीद से हाेती खुशी काे बयां कर रहा हूँ अपनी इस कहानी  One sided sad love story in hindi  में….

 

 

 

चंदन राठाेर गाेरा चेहरा, खूबसूरत स्टाइलिस बाल, ब्रांडेड चश्मा लगाये बुलेट से आफिस जा रहा था कि अचानक जाम में फस गया.
अमूमन इस रास्ते पर कभी जाम नही लगता फिर आज कैसे लग गया.

Story Hindi Mein

चंदन मन ही मन साेच रहा है क्योंकि उसे आज आफिस जल्दी पहुंचना है. आफिस का सारा काम निपटाकर उसे अपने परम मित्र बिपिन के घर जाना है और उसकी   birthday party  में शरीक हाेना है.

इस उढेडबुन मे जाम कब खत्म हो गया उसे पता ही नहीं चला ..जब पीछे से तमाम गाडियों की टीं टीं….पी -पी की आवाजें और लाेगाें के शाेर ” जाम खत्म हो गयाे भाई, साे गया क्या, अरे गाडी निकालाे “सुनाई दी, तब चंदन की साेचनिद्रा टूटी.

 

 

 

story hindi Written

 

 

 

 

उसने फटाफट गाडी स्टार्ट की और जैसे ही आगे निकला कि स्कुटी पर बैठी एक लड़की उसकी तरफ देखकर मुस्कराते हुये और ऐसा रियेक्ट करते हुये कि “कहा खो गये थे” आगे निकल गयी और चंदन उसे अवाक सा देखता रह गया.लेकिन फिर वही गाडियों के शाेर उसकी साेच काे भंग किये और वाे आगे निकला.

 

 

 

वह लड़की उसके दिलाे- दिमाग पर छा गयी थी… वह  पूरे रास्ते सिर्फ उसके ही बारे में साेचता रहा. चंदन आफिस पहुँचा.. फटाफट अपने काम निपटाने लगा… लेकिन उसका मन नही लग रहा था… वह बस उसके बारे मे ही साेच रहा था कि ” काैन थी वो “.

एकतरफा प्यार की बेहतरीन हिंदी कहानी

किसी तरह काम निपटाकर वह बिपिन के घर गया… बिपिन चंदन का लंगाेटिया यार है.बिपिन चंदन काे देखते ही भडक गया .”अभी आ रहा है तू… तुझे मैने सुबह मे ही बुलाया था… अपने  दोस्त की बात नहीं मान सकता तू”.”अरे… अरे.. शान्त -शान्त.. मेरे  birthday boy मिस्टर बिपिन रॉय.

 

 

 

कृपया  शान्ति बनाये…. राेज ताे तू डाटते ही रहता है कम से कम आज ताे बख्श दे”…चंदन बाेला…फिर दानाे हंसते हुये गले मिले. तभी  घर के बरामदे में वही लड़की दिखी… एकदम वही चेहरा वही नैन -नक्श और वैसे भी जब One sided sad love story in hindi  हाेता है ताे चेहरा उस समय की हर चीज़ याद रहती है.

 

 

 

 

Short Stories in Hindi With Moral / विश्वास ही सबसे बड़ी भक्ति है हिंदी कहानी

 

 

 

अबे साले छाेड…. क्या कर रहा है ….दाेस्त हूं तेरा..  Girlfriend  नहीं, जाे तू इतना  tight hug  कर रहा है… बिपिन बाेला. तब चन्दन की नजर हटी और उसने बिपिन से तपाक से बरामदे की ओर उंगली दिखाते हुए बाेला “वाे काैन है”.

चप्पल से मारूंगा तुझे… याददाश्त चली गई है क्या तेरी….क… क… क्या हुआ… काै… काैन है वो… बिपिन की बात काटते हुये और थाेडा घबराते हुये चंदन बाेला.

 

 

 

क्या.. क्या हुआ.. मां है मेरी और तेरी आन्टी… बिपिन थाेडा गुस्सा दिखाते हुए बाेला. अरे बेटा चंदन.. कब आया.. आ जा नाश्ता पानी कर ले…. बिपिन की मां (सरला देवी) ने चंदन से कहा.
चंदन ने उनकी तरफ देखा और बाेला हां आन्टी अभी आया…” Thank god  ….मैं ताे डर ही गया था ” साेचते हुये चंदन दाैडकर बरामदे में गया…उसने सरला देवी काे प्रणाम किया.

Story Hindi meaning

देखा मां… पेटू काे… खाने के टाइम पर आया और खाने के नाम पे दाैडकर भागा…. और तुझे बाेलता है कि ” काैन है ये “……बिपिन अपनी माँ से थाेडा इठलाते हुये बाेला.

चल जा.. अपना काम कर… जब से आया है बेचारे काे परेशान ही कर रहा है… सरला देवी ने बिपिन काे डाटते हुये बाेली.ठीक है मां… बिपिन ने चंदन की ओर देखा… और चंदन उसे चिढ़ाते हुये हाथ से जाने का इशारा किया..

 

 

 

 

कहानी इन हिंदी फॉर चाइल्ड / अकबर बीरबल की मजेदार हिंदी कहानियां

 

 

 

बेटी रचना… चंदन के लिए नाश्ता ले आना ताे… कहती हुयी  सरला देवी कुछ काम से चली गयीं.चंदन अपने मोबाइल  पर.  News  पढने लगा.
मि. पेटू… लिजीये नाश्ता… चंदन ने जैसे ही उपर देखा वही मुस्कराता हुआ चेहरा दिखा. ओह! मिस. रचनाकार…ओह! सारी… मिस. रचना जी…  Thank god  चलिये आपका नाम ताे पता चला.
वह और बहुत सारी बातें करना चाहता था कि तभी सरला जी ने फिर रचना काे बुला लिया,और वाे मुस्कराते हुये चली गई. चंदन उसे प्यार करने लगा था…. लेकिन उसे शायद यह नहीं पता था कि सिर्फ  happy beginning  है.

 

 

 

One sided sad love  की यही ताे खासियत है.. वह हर लम्हे मे उम्मीद ढूँढ लेता है. चंदन बिपिन के घर के सदस्य की तरह था.. और वह मेहमान बनकर नही आया था साे वह घर के कामाे मे  busy  हाे गया… लेकिन उसकी निगाहें हर पल बस रचना काे ढूढती रही.

 

 

 

शाम का समय हाे गया है. सारे मेहमान आ गये हैं. केक काटने का समय भी हो चुका है. सब एक दूसरे से बातें कर रहे हैं और चंदन की निगाह बस रचना काे ढूँढ रही हैं.

 

चंदन मन ही मन साेच रहा था कि सारे मेहमान आ गये…..केक काटने का समय हाे गया है… बिपिन भी आ गया है.. ताे फिर रचना कहा है… सब ठीक तो है न… वह बढकर बिपिन से पूछने ही वाला था कि.. सरिता देवी ने लाेगाें काे संबोधित करते हुये कहा कि आज बिपिन का  23वां जन्मदिन है.
आज बिपिन 23 साल का हाे गया… अब मैं अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हाेना चाहती हूँ… मैने बिपिन के लिए लड़की ढंूढ ली है और वाे इसी महफिल में है.
सब एक दूसरे को देखने लगे. सब  surprised  थे….. तब सरिता देवी ने कहा कि उसका नाम रचना है… तालियाें की गडगडाहट से पूरी महफिल गुन्जायमान हाे गयी… लेकिन चंदन पुरी तरह टूट गया… उसे अब भी भराेसा नहीं हो रहा था.. वह रचना की तरफ देखा.. वह बहुत खुश लग रही थी.
चंदन काे इस बात का एहसास हो गया था कि यह  one sided love  था…. तालियां अब भी बज रही थीं…. चंदन चुपके से वहां से निकल गया… शायद अब उलके लिए वहां कुछ नहीं रह गया था… वह सीधा अपने आफिस पहुँचा… रात पूरे अपने शबाब पर थी… हल्की हल्की बूंदे गिर रही थीं… मानो ऐसा लग रहा था कि चंदन के साथ सारा आसमान राे रहा हाे.
2- Story Hindi Short  यह भीगा भीगा माैसम और तेरी याद में आखाें से बहता पानी.. दाेनाे तन मन में आग लगा रहे हैं… आपके जाने के बाद यह सूनापन यह खालीपन मुझे अन्दर ही अन्दर खाये जा रहा है़.
ना दिन में चैन है ना ताे राताें में नीद… आखिर कहा चले गये तुम… ना काेई चिठ्ठी ना काेई संदेश… क्या तुम्हें मेरी याद नही आती… क्या वाे प्यार वाली बाते याद नही आती.
जब हम और तुम हाथाें मे हाथ डाले इन्ही फूलों की क्यारियाें मे अठखेलियाँ करते थे… आज वही फूल हैं वही क्यारियां… बस नही है ताे वह रंग.. वह खुशबू.. वह उमंग.

Story Hindi kids

तुम्ही ताे मेरे सब कुछ थे.. मेरा रूप, मेरा रंग, मेरी उमंग, मेरी हंसी, मेरी खुशी, मेरा मान सम्मान… तुम नही ताे मैं कुछ नही…. तुम्हारे बिन मैं वैसे ही तड़प रही हूं.. जैसे जल बिन मछली.
तुम्हारे बिना बिना यह रूप श्रृंगार कुछ अच्छा नही लगता… मुझे खूब अच्छी तरह याद है जब मैं सज धज कर इठलाते हुये आपके सामने आती थी और आप प्यार से मेरे माथे काे चूम लेते थे…. लेकिन अब किसके लिये सजना, मेरा सजना ताे परदेस में है.

बड़ा जालिम है… इतने बरस बीत गये…लेकिन काेई सुध ना ली… फिर से बैरी सावन आ गया…..हर ओर हरियाली छायी है…लेकिन मेरे जीवन मे वही सूखापन…. सारा छाेर खुशियाें से इठला रहा है… लेकिन मेरा मन विरह वेदना से व्यथित है. सारी सखिया रिमझिम फुहाराें का आनंद लेती हुयी अपने प्रियतम के साथ झूला झूल रही है… और एक मैं बिरह से व्याकुल अपने प्रिय की राह देख रही हूं.

 

 

 

आग लगे उस मनहूस समय काे जब मेरे हमराह परदेस गये… दिन तो किसी तरह बीत जाता है… बैरन रात ताे बहुत तड़पाती है… हर पल बस आपकी याद आती है… याद के सिवा और है क्या मेरे पास… उसी याद के सहारे जी रही हूं….रात भर उठ उठ कर आपके फाेटाे काे निहारती हूं.
हर आहट पर दिल की धड़कन बढ़ जाती है….आपके बिन मेरी यह जिंदगी रेगिस्तान बन गयी… इस रेगिस्तान में सावन की तरह बरस जाओ….. आ जाओ… प्रियतम मेरे घर आ जाओ.
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कहानियां इन हिंदी रिटेन / Best Hindi Moral Love Story Written in Hindi

कहानियां इन हिंदी रिटेन मेरा नाम रघु है।  यह मेरी सच्ची प्रेम कहानी है। अभी मैं १२वीं कक्षा का छात्र हूँ।  जब मैं ११वीं कक्षा में था तब मुझे पहली बार प्यार हुआ था।

उसका नाम रागिनी था।  वह बहुत ही चंचल और खूबसूरत थी। वह बगल के कालेज में पढ़ती थी। एक दिन जब रोज की तरह अपने घर जा रहा था तो मेरी नज़र उससे टकरा गयी और पहली ही नज़र में उसका खुमार मुझ पर छाने लगा।

कहानियां इन हिंदी

मैं उसे रोज देखता।  अब तो उसकी आदत सी हो गयी थी मुझे।  हर वक्त बस उसका चेहरा ही नज़र आता था।  आज कल मैं प्रेम गीत भी बहुत सुनने लगा था। इस बदलाव को बहुत लोगों ने महसूस किया लेकिन मैं बात को टाल  देता था।
एक दिन रागिनी मुझे नहीं दिखी। मैं तो बड़ा परेशान हो गया।  पागलों की तरह इधर – उधर उसे ढूंढने लगा।  मन में तरह – तरह के ख्याल आते थे, फिर मैं मन को समझाता शायद उसकी तबियत खराब हो गयी थी।
कहानियां पंचतंत्र की
                                                                    कहानियां
मेरे लिए रागिनी का क्या महत्व था वह आज पता चल रहा था।  किसी तरह से मैं घर पहुंचा।  ना तो खाने का मन कर रहा था न तो कुछ करने का। पूरी रात करवटों में कट गयी।
अगले दिन फिर से कालेज से छूटने के बाद रागिनी का दीदार हुआ, तब दिल को चैन पड़ा।  अब मैंने यह तय कर लिया कि रागिनी से बात करनी ही होगी, लेकिन कैसे ?

Best Hindi Moral Story Written in Hindi

डायरेक्ट बात हो नहीं सकत।  उसके गुस्सा होने का डर था।  उसकी सहेलियों के बारे में भी ख़ास जानकारी नहीं थी। वह केवल दो सहेलियों के साथ ही दिखती थी, लेकिन उनसे भी बात करने में डर लग रहा था, कहीं कोई एक थप्पड़ लगा दे तो बस…
अब मैंने रागिनी का नाम जानने का प्रयास किया, क्योंकि तब तक मुझे उसका नाम नहीं पता था। मुझे यह पता था कि उसकी सहेलियां जरूर उसे नाम से पुकारती होंगी।
कुछ दिनों की मेहनत के बाद उसका नाम मुझे पता चल गया।  उसका नाम था रागिनी दीक्षित।  अब मैंने फेसबुक का सहारा लिया और उसका नाम सर्च करने लगा।
अब तो कई सारे नाम उसपर आ गए।  सबसे बड़ी बात यह थी कि लड़कियां जल्दी अपनी इमेज डीपी पर नहीं लगाती।  अब बड़ी मुश्किल थी। सबकी प्रोफ़ाइल चेक करते हुए एक दिन सफलता मिली।
रागिनी ने अपने बर्थडे का एक पिक्चर अपने फेसबुक वाल पर शेयर किया था। अब क्या मैंने उसे रिक्वेस्ट भेज दी।  उसके बाद मैं बेसब्री से इन्तजार करने लगा।
बार – बार अपना फेसबुक खोलता।  करीब ३ घंटे बाद उसने रिक्वेस्ट असेप्ट कर ली और मैजेस किया, ” वाह आखिर तुमने मुझे ढूंढ ही लिया। “
अब तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूँ इसका।
इसका मतलब वह मुझ पर नज़र रख रही थी।  काफी सोचने के बाद मैंने उसे मैसेज किया, ” सॉरी,  मैं समझा नहीं। ” ” ओहो ! इतना दिन से पीछा कर रहे हो और अब समझे ही नहीं। ” रागिनी का रिप्लाई आया।
अब मुझे यकीं हो गया कि वह मेरी ही बात कर रही थी, पर मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मुझे फॉलो कर रही थी जबकि मेरे हिसाब से मैं उसे फॉलो फॉलो कर रहा था।
धीरे – धीरे हमारी दोस्ती की रफ़्तार में तेज़ी आने लगी।  हम काफी बाते आपस में शेयर करने लगे।  एक – दूसरे की पसंद नापसंद भी अच्छी तरह से समझने लगे।
एक दिन मैंने सोचा अब रागिनी को प्रपोज कर देना चाहिये।  मैंने रागिनी को मैसेज किया कल तुम सुबह ११ बजे कालेज के बगल वाले पार्क में मिलो।  मुझे कुछ स्पेशल बताना है।
इसपर उसने भी कहा मुझे भी कल कुछ सरप्राइज देना है।  मैं बहुत दिनों से सोच रही थी।  मैं तो रागिनी के प्यार में बावरा हो गया था।  मैं मन ही मन खूब खुश हो रहा था।
मुझे लगा कल रागिनी भी प्यार का इज़हार करेगी। रात कैसे बीत गयी पता ही नहीं चला। सुबह फ़टाफ़ट तैयार होकर मैं पार्क में पहुँच गया।  कुछ ही देर में वहाँ रागिनी भी आ गयी।
आते ही उसने पूछा क्या बोलना था बोलो ? इसपर मैंने बोला, ” नहीं तुम बोलो।” दरअसल मैं उससे ही प्रपोज करवाना चाहता था।  वह बार बार बोली पहले तुम… मैं बोलता पहले तुम …… तभी उसने कहा मेरी शादी फिक्स हो गयी है।  कल सगाई है।  मैं कौन सा ड्रेस पहनू यही पूछना था।
तुम्हे तो मेरी च्वाइस पता ही है न…….यह सुनते ही मुझे ज़ोर सा झटका लगा।  ऐसा लग रहा था कि धरती फट रही है और मैं उसमें समा रहा हूँ। मैं वही बैठ गया।
तभी रागिनी ने कहा क्या हुआ? तबियत तो ठीक है न ? यह लो पानी पीओ। मैंने इंकार कर दिया।  आज पहली बार था जो मैंने उसके हाथ की दी हुई कोई चीज इंकार की हो।  नहीं तो उसके हाथ का जहर भी मैं अमृत समझ कर पी लेता।
तब उसने पूछा, “अच्छा तुम क्या बताने वाले थे ? ” मैंने खुद को संभाला और बोला कुछ नहीं।  चलो तुम्हे खरीदारी करनी है न।  हम दोनों चल दिए।  मैं बहुत ही निराश था।  सारी दुनिया सूनी  – सूनी  लग रही थी।
तभी अचानक से रागिनी ने पूछा, ” क्या हुआ लडके का नाम भी नहीं पूछा तुमने? “
तब मैंने कहा, ” छोडो जाने दो।  तुम्हे पसंद है ना बस।  “
 ” ऐसा थोड़ी होता है।  चलो ठीक है फोटो तो देख लो ” रागिनी ने कहा।
मैंने बेमन से मना कर दिया।  इधर मेरी दुनिया उजड़ी हुई थी और उसे अपनी ख़ुशी की पड़ी थी।  लेकिन मैं अपना दुःख उसके सामने नहीं बता सकता था।  क्योंकि इससे उसे दुःख होता और मैं उसे दुखी नहीं देख सकता था।
तभी बातों- बातो में उसने थोड़ा सा फोटो दिखाया।  फोटो देखकर मैं चौंका। मैंने उससे पूरा फोटो दिखाने के लिए कहा, लेकिन वह मुस्कुराते हुए ना – ना करने लगी।
इतने में मैंने उससे फोटो छीन ली। मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।  यह तो मेरी ही फोटो थी।  मैंने उससे पूछा, ” यह सच है ? “
उसने कहा, ” हमारी पसंद नापसंद, सोच सब एक – दूसरे से मिलता है तो प्यार क्यों नहीं मिलेगा।  “
मेरे आँखों में आंसूथे , लेकिन प्यार के…सच्चे प्यार के।

कहानियां बच्चों के लिए

 

२- प्यार की कहानियां यह कहानी उन दिनों की है जब मैं ८वीं में पढ़ता था. मेरा गाँव अर्धशहरी क्षेत्र में है. मतलब वहा शहर का विकास है तो गाँव की खुशबू भी है.

 

 

 

अच्छी इमारते हैं तो आम के बाग़ और फूलों की क्यारियाँ और गांव की अल्हड मस्ती भी है. मैं बहुत ही धार्मिक किस्म का था. मेरी आदत थी कि हर गुरुवार को मैं मंदिर अवश्य ही जाता था.

 

 

 

 

वैसे तो मैं घर के पास वाले भगवान नीलकंठ के मंदिर तो रोज ही जाता था, लेकिन गुरुवार के दिन शहर की बीचोबीच स्थित कान्हा के मंदिर जाना मैं कभी नहीं भूलता था.

 

 

 

एक दिन मैं साइकल से मंदिर गया और जब मैं वापस आया तो देखा कि एक लड़की जो की लगभग मेरी हमउम्र की थी वह उस साइकल पर बैठी हुई थी.

 

 

 

 

मैंने उससे कहा कि साइकल पर से उतारो मुझे जाना है….तो उसने पलट कर कहा की जाना है तो जाओ…मैं क्या करूँ…उसकी इस बात से मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे साइकल से धकेल दिया…..और तुरंत ही वहाँ से  चलता बना…मैंने यह भी नहीं देखा कि उसे चोट लगी है.

 

 

 

अगले दिन जब मैं मंदिर जा रहा था तो देखा कि वह भी अपने किसी रिश्तेदार के साथ मंदिर की तरफ जा रही थी….उसके पैर में थोड़ी चोट लग गयी थी. वह लंगडाकर चल रही थी.

 

 

 

यह देखकर मुझे बहुत ही बुरा लगा. मैंने सोच लिया कि मंदिर से लौटते समय मैं उसे अवश्य ही सॉरी बोल दूंगा. जब मैं मंदिर से वापस लौटा तो वह वहीँ शांत भाव से कड़ी थी.

 

 

 

 

मैं उसकी पास गया और उसे सॉरी बोला. उसने  सर निचे झुका लिया और कुछ नहीं बोली. मुझे लगा कि यह ज्यादा ही नाराज है…फिर मैं वहा से चला और जैसे साइकल पर बैठने गया तो देखा कि किसी इसकी हवा ही निकाल दी है.

 

 

 

 

तभी वह लड़की मेरे पास आई और बोली सॉरी….पहले तो मैं उसके तरफ आश्चर्य से देखा और फिर जोर से हँसने लगा और यह देखकर वह भी जोर से हँसाने लगी और मैं उसका चेहरा देखता रह गया.

 

 

 

फिर हम दोनों रोज मिलने लगे….खूब सारी बातें होती थी….पढ़ाई की भी बातें होती थी….मुझे उससे प्यार हो गया…..मैं मौक़ा ढूंढ रहा कि कब मैं उससे अपनी दिल की बात कहूँ.

 

 

 

 

लेकिन इसी बीच वह मंदिर आना बंद कर दी…जब मैंने उसके बारे में पता किया तो पता चला कि उसके पापा का तबादला दुसरे शहर में हो गया है और वे लोग चले गये.

 

 

 

मैं बहुत दुखी हुआ…एक दिन उसकी एक दोस्त ने एक चिट्ठी मुझी दी जो कि उसके द्वारा मुझे लिखी गयी थी…..उसने कहा कि वह भी मुझे प्यार करने लगी थी.

 

 

 

लेकिन शायद कुदरत को यह मंजूर नहीं था. तेरा इश्क मुझे हमेशा ही याद रहेगा……मैंने हलकी सी सांस ली और कहा की सच तेरा इश्क मुझे ताउम्र याद रहेगा.

 

 

 

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Kahaniyan in Hindi Written / उलझे बालों वाली लड़की की डरावनी कहानी

Kahaniyan in Hindi Written in Short  शाम के ५ बज रहे थे।  उसी वक़्त मेरा मोबाइल बज उठा सामने विक्रम था। हमेशा की तरह वो प्यार से बोला, ”  जानेमन क्या कर रही हो? ” मैंने कहा, ”  कुछ नहीं, बस अब ऑफिस से निकल कर PG जाउंगी, तुम क्या आ रहे हो? ”

 

 

 

 

लेकिन सामने से जो सुना उस पर मुझे विश्वास नहीं हुआ।  विक्रम बोला जान पैकिंग कर लो हम घूमने जा रहे है।  आज फ्राइडे है।  मंडे तक पूरा  ऑफ है और ट्यूजडे की मैं छुट्टी ले लूंगा तुम बस पैकिंग करो और रास्ते के लिए कुछ खाना पैक करवा लेना मैं जल्दी पहुचता हूँ .

 

 

 

Bhoot ki kahaniya in hindi written

 

 

 

विक्रम भी ना, सरप्राइज कर देता है कभी कभी, पिछले एक महीने से इसी बात पर हमारी बहस चल रही थी, मैं उसे कह रही थी लॉन्ग वीकेंड आ रहा है प्लान बनाओ ,पर उसने अपने घर जाने की रट लगा रखी थी .

 

 

 

हम दोनों ही गुडगाँव मैं जॉब करते थे। अलग अलग PG मैं रहते थे हफ्ते मैं ३-४ बार मिल लेते थे।  पर वीकेंड पर विक्रम का घर जाना जरुरी ही था। उसके पेरेंट्स उसका रास्ता देखते थे.

 

 

 

 

मेरा अपना कहने को कोई नहीं था.  चाचा ने पाला और पढ़ा लिखा भी दिया।  अब जब वो नहीं रहे तो मैं उनकी फैमिली में  एक बिन बुलाये मेहमान की तरह की सदस्य हो गई।  इसलिए पिछले २ साल से PG मैं रहने आ गई थी.

 

 

 

 

bacho ki kahani in hindi written
    Kahaniyan in Hindi Written

 

 

 

यही विक्रम से मुलाकात हुई और कब मुलाकाते प्यार मैं बदल गई पता ही नहीं चला। हम दोनों उम्र के ३० बसंत देख चुके थे। अब हमारे प्यार मैं लड़कपन नहीं था।  एक गंभीरता थी पर हम दोनों एक साथ लिव- इन मैं रहने की हिम्मत ना जुटा पाए .

 

 

 

 

खैर,   यह तो हुआ परिचय। अब अपनी कहानी पर आती हूँ।  उस दिन जैसे मेरे पैरो को पंख लग गए थे, मैं बहुत खुश थी विक्रम के साथ इतने दिन बिताने की कल्पना से ही मैं सिहर उठी थी .

 

 

 

मैं जल्दी से सब जरुरी चीज़े पैक की, अपने वाकिंग शूज़ कसे और रेडी थी तभी फ़ोन पर मिस्ड कॉल यानि विक्रम आ गया। मैंने जल्दी ही सामान गाड़ी मे रखा, और बैठते ही विक्रम को चुम लिया वो भी बहुत खुश हो गया। उसने कहा रुबिन be ready हम एन्जॉय करेगे.

 

 

 

हम पूरी रात ड्राइव करते रहे और जब सुबह की पहली किरण उदित हुई तो हम उत्तराखंड के एक छोटे से हिल स्टेशन पर पहुच चुके थे। वहां हमने थोड़ा घूम घाम कर देखा.

 

 

 

उलझे बालों वाली लड़की की डरावनी कहानी

 

 

 

हमे रहने के लिए नदी किनारे एक शांत सी कॉटेज मिल गई।  रूम बहुत बढ़िया था।  बड़ी बड़ी खिड़किया और सामने खूबसूरत नदी। विक्रम जानता था मुझे क्या पसंद है.

 

 

 

हमने जल्दी से फ्रेश हो कर पहले अपनी नींद पूरी करने का प्लान बनाया, पर बिस्तर पर आते ही वो रोमांटिक मूड मे आ गया और फिर जो नींद आई मेरी आँख ३ बजे के लगभग खुली विक्रम अभी भी सो रहा था.

 

 

 

 

मैंने उठ कर कपडे पहने और खाने के लिए कुछ ढूढ़ने लगी। तभी मुझे लगा जैसे कोई गुनगुना रहा हो. मैंने दरवाजा खोला तो लॉबी के आखरी हिस्से मे बड़ी सी खिड़की पर एक लड़की अपना सर टिकाये खोई हुई सी गुनगुना रही थी .

 

 

 

उसकी पीठ मेरी और थी और उसके बाल घुंगराले बिखरे हुई स्याह काले, मुझे लगा यहाँ कोई और भी है, चलो अच्छा है साथ मैं कोई अपनी उम्र का है ट्रैकिंग मे मजा आएगा। तभी विक्रम ने मुझे आवाज दी. जान कहा गई?

 

 

 

तभी उस लड़की ने मुड कर मुझे देखा वो बहुत ज्यादा गोरी थी। मुझे देख वो मुस्कुरा दी। मैंने भी मुस्कुरा कर उसका प्रतियुत्तर दिया.
हम तैयार हो कर लगभग ४ बजे के करीब कसबे की और निकले। मैं और विक्रम दोनों भूख से परेशान थे। आगे कुछ दुरी पर एक छोटा सा ढाबा दिखा. वहा हमने चाय और आलू के पराठे खाये.

 

 

 

Jadui kahaniya in hindi written

 

 

 

ढाबे का मालिक एक बूढ़ा सा आदमी था, वो कहने लगा आप लोग कहा रुके हो हम लंचबॉक्स भी भेज सकते है. जब हमने बतया हम कहा रुके है तो उस बुढे और ढाबे पर बैठे  २-३ लोगो की आँखे फ़ैल गई .

 

 

 

कोई कुछ बोला तो नहीं पर कानाफूसी होने लगी थी, मुझे थोड़ा अजीब लगा पर हम उस वक़्त वहां से निकल कर नीचे बाजार की तरफ घूमने निकल गए. आते वक़्त रात का खाना पैक करवा हम कोई ७ बजे के लगभग कॉटेज पहुचे .

 

 

 

मैन गेट पर शिब्बू मिल गया, वो काटेज का केयरटेकर था. उसने बतया यहाँ सिर्फ ब्रेकफास्ट और चाय -काफी ही मिल सकती है, पर पीछे की तरफ किचन है जहा आप खुद खाना बना सकते है.

 

 

 

विक्रम उससे आस पास घूमने की जगह पूछने लगा और मैं रूम की तरफ बढ चली। लॉबी पर पहुचते ही मुझे ठंडी हवा का एहसास हुआ. मैं चाभी अभी कीहोल मैं लगा ही रही थी .

 

 

 

मुझे साथ के कमरे से धीमे संगीत की आवाज आई। बहुत ही मधुर पर उदास सा। मुझे अचानक वो लड़की याद आ गई. पीछे पीछे विक्रम था
वो कहने लगा अंदर चलो यहाँ क्यों खड़ी हो एक राउंड और हो जाये। उसकी आँखों मैं शरारत थी. मैं बस उसकी आँखों मैं खो गई मैं उससे दीवानो की तरह प्यार करती थी। मेरे लिए सिर्फ वो ही तो था। उसका प्यार जिस शर्त पर मिले मुझे मंजूर था .

 

 

 

 

उस रात मैं बहुत सुकून से थी विक्रम की बाहो मे, बाहर किस पहर बारिश शुरू हो गई  पता ही ना चला. मुझे प्यास लगी थी। फ़ोन उठा कर देखा तो रात के २ बज रहे थे .

 

 

 

बारिश की रिमझिम और रात का सन्नाटा अलग ही दुनिया लग रही थी, मैंने विक्रम को देखा वो किसी छोटे बच्चे की तरह सो रहा था। मैंने उठ कर खिड़की खोली और बारिश की बूंदो को अपने चेहरे पर महसूस करने लगी.

 

 

 

तभी साथ वाले रूम से किसी के रोने की आवाजे आने लगी कोई आदमी जोर जोर से बोल रहा था और कोई लड़की रो रही थी उनकी आवाजे स्पष्ट नहीं थी जैसे दबी दबी सी थी .

 

 

 

खिड़की बंद करने की आवाज से विक्रम भी उठ बैठा और  कहने लगा, ”  रुबिन तुम रात को खिड़की क्यों खोल रही हो ?  यह कॉटेज नदी के पास है जंगली जानवर भी आ सकते है . ”

 

 

 

 

मैंने तब दिन मैं मिलने वाली वो बिखरे बालो वाली लड़की का जिक्र किया।  मैंने उससे कहा, ” शायद वह विदेशी है।  ” विक्रम बोला उन्हें छोड़ो, कल तुम्हे एक वाटर फॉल पर ले जाऊंगा। अभी इधर आओ और सो जाओ।

 

 

 

 

Kahaniyan in Hindi Written pdf
Kahaniyan in Hindi Written

 

 

 

सुबह बड़ा फ्रेश मूड था। हम जल्दी से नाश्ता करके वॉटरफॉल की तरफ निकल पड़े। जाते जाते शिब्बू ने कहा, ”  आप वाटर फॉल नीचे से ही देखिएगा ऊपर चोटी  पर मत जाइएगा।  उस चोटी  से फिसल कर बहुत लोग जान गवा चुके है।  ”

 

 

 

लगभग ३ किलो मीटर की ट्रैकिंग करके हम उस वाटर फॉल तक पहुचे। वहा काफी चहल पहल थी, पर्यटको के साथ साथ लोकल लोग भी थे .संडे जो था।  वाकई बहुत खूबसूरत जगह थी। हम भी वहां फोटो लेने लगे.

 

 

 

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वहा पर एक छोटा सा लड़का लगभग जला हुआ पतीला , मैग्गी और कुछ कोल्डड्रिंक की बोतले लिए बैठा था।  विक्रम ने उसे कहा, ”  मैग्गी के साथ साथ चाय पिला सकते हो ? ”  उसने हां मे सर हिलाया.

 

 

 

विक्रम उससे बाते करने मैं व्यस्त हो गया, मैं कैमरा ले थोड़ा और ऊपर को चढ़ने लगी।  एक पतली सी उबड़ खाबड़ पगडंडी सी थी जो वाटर फॉल के साथ साथ चल रही थी .

 

 

 

 

मुझे लगा जहा विक्रम बैठा है।  अगर ऊपर से फोटो लिया जाए तो पिक्चर बढ़िया आएगी। अभी थोड़ा आगे ही बड़ी थी की अचानक वो उलझे बालो वाली लड़की मुझे अपने आगे दिखाई दी .

 

 

 

 

वो बहुत तेजी से आगे बढ रही थी। मैं लगभग भागते हुए उसके पास पहुची। मैंने हाथ आगे बढ़ाया ही था कि  वो पलटी।  मैं सकपका गई मैंने कहा, ” हेल्लो ” . वो मुस्कुरा दी।  मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, ”  are you alone here ? ”

 

 

 

उसने ना मैं सिर हिलाया।  उसका चेहरा गोल और बहुत गोरा था, पर आँखे एकदम काली उसके बालो की तरह वो बेहद खूबसूरत थी. मैंने उससे पूछा, ” where are you from? ”  इस बार वो धीमी आवाज मे बोली, ”  मैं भी भारतीय ही हूँ .”

 

 

 

मैंने कहा, ”  ओह्ह्ह !  मुझे लगा आप विदेशी हो। ”  वो हलके से हँस दी। तभी मुझे ढूंढता हुआ विक्रम आ गया।  मैंने उससे विक्रम का परिचय करवाया।  उसने अपना नाम सारा बताया।

 

 

 

विक्रम ने चाय पीने का ऑफर दिया। पर उसने मना कर दिया। वो चोटी  की और बढ़ चली।  जाते – जाते विक्रम ने उसे be carefull कहा वो पलटी और मुस्कराते हुए हाथ हिला दिया .

 

 

 

हम लगभग २ घंटे वही बैठे रहे।   पर सारा वापिस नीचे की ओर नहीं आई।   मैंने कहा, ” चलो बाजार घूम आते है।   पर विक्रम का मूड कुछ और था।  हम वापिस कॉटेज पहुचे।  ”

 

 

 

 

हम लोग काफी थक गए थे सो जल्दी सो गए।  जब मेरी नींद खुली विक्रम बिस्तर पर नहीं था। मैं उसे आवाज देने लगी पर कोई जवाब नहीं आया।  विक्रम कही भी नहीं था। तभी बाहर लॉबी मैं कुछ आवाज आई मैंने दरवाजा खोला.

 

 

 

 

तो विक्रम बाहर उस खिड़की के पास खड़ा था जहा मैंने सारा को पहली बार देखा था. उसी तरह सर टिकाये हुए बाहर देखते हुए. मैंने कहा, ” जनाब कहा खो गए ? ”

 

 

 

विक्रम पलटा, और बोला मुझे कोई उदास सी धुन सुनाई दी। उसका पीछा करते करते यहाँ आ गया।  साथ वाले दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था, मुझे जिज्ञासा हुई, सारा वापिस आई की  नहीं ?

 

 

 

 

 

 

मैंने देखा तो रूम बिलकुल खाली था। पलंग पर एक भी सिलवट नहीं। परदे लगे हुए. मुझे लगा सारा शायद चली गई. हमने decide किया आज डिनर खुद ही बनाएगे.

 

 

 

विक्रम ने शिब्बू से खाना  ले आने को कहा, हमने कॉटेज के आंगन मे आग जलाई साइड मे ही चूल्हा मंगा लिया, खाना  देख शिब्बू भी हमारे साथ बैठ गया मैं खाना पकाने लगी . रात बढ़ती जा रही थी .

 

 

 

 

शिब्बू ने कहा, ” बाबु जी हमे भी दिल्ली ले चलो। अपने पास रख लेना। सेवा कर देगे. ” विक्रम उसे समझने लगा, ”  अरे तुम तो जन्नत मे रहते हो, यहाँ काम भी कम है. आराम से रहो. आज तो कॉटेज मे हम अकेले ही गेस्ट है. ”

 

 

 

 

शिब्बू ने कहा, ” साहब पिछले कुछ महीनो से आप ही अकेले गेस्ट हो.”  मैं और विक्रम एक दूसरे की शक्ल देखने लगे।  हमने कहा अच्छा एक कपल और भी था.

 

 

 

हमारे साथ वाले रूम मे आदमी को तो देखा नहीं, पर लड़की से मैं कॉटेज और फिर वाटर फॉल पर भी मिली, क्यों झूठ बोलते हो? शिब्बू का चेहरा सफ़ेद पड़ गया वो कुछ नहीं बोला।

 

 

 

 

विक्रम ने कहा, ”  क्या हुआ ? ”

 

 

 

 

शिब्बू अपना गला साफ़ करते हुए बोला, ”  साहब मैं अपनी माँ की कसम खाता हूं आप यहाँ अकेले ही गेस्ट हो। आप आ गए नहीं तो मैं खुद अपने गांव जाना वाला था. ”  मैंने कहा, ” फिर वो लड़की कौन थी ? ”

 

 

 

 

 

शिब्बू ने बतया, ”  इस कॉटेज के बारे मे बहुत कहानिया फ़ैली हुई है, यह बहुत पहले अंग्रेजो के ज़माने मे किसी साहब बहादुर का घर था , और यहाँ कुछ मौते हुई थी।  तब से आस पास के लोग यहाँ आवाजे सुनने लगे, कभी कोई उदास सी धुन तो  कभी लड़की के गाने की तो कभी रोने की।  ”

 

 

 

मेरा यह सुनकर खून जम गया था।  पर शिब्बू हमें सांत्वना देते हुए बोला, ”  साहब मैंने तो आजतक ऐसा कुछ ना तो देखा ना सुना।  मैं तो रोज़ यही रहता हूँ।  कभी कुछ नहीं देखा।  ”

 

 

 

Pariyo ki kahaniya in hindi written

 

 

 

डिनर जैसे तैसे निपटा के हम दोनों रूम मे आ गए। विक्रम मुझे ढाढस बंधाते हुए बोला, ”  इसकी बातो मैं आ रही हो ? इसे कुछ नहीं पता।  ”

 

 

 

 

पर अंदर से विक्रम  भी डरा हुआ लग रहा था. हमें नीद नहीं लग रही थी।  समय बिताने के लिए और मन से दर को निकालने के लिए हम इधर – उधर की बाते कर रहे थे।

 

 

 

अचानक बारिश शुरू हो गयी और मौसम ठंडा हो गया।  हमें कब नीद आ गयी पता ही नहीं चला।  रात को अचानक मुझे लगा जैसे मेरे ऊपर कोई झुका हुआ है।  मैंने आँखे खोली तो सारा थी. सारा कंधो से पकड़ कर मुझे उठा रही थी। मेरा नाम बार बार पुकार रही थी, उसकी आवाज किसी कुँए से आती हुई लग रही थी .

 

 

 

मैं हड़बड़ा कर उठी सारा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खिंचती हुई अपने साथ ले जाने लगी। डर के मारे मेरे गले से आवाज तक नहीं निकल रही थी। मैंने पीछे मुड़ कर देखा विक्रम बिस्तर पर ही था .

 

 

 

 

सारा मुझें साथ वाले कमरे मे ले गई, उस कमरे की शक्ल ही बदली हुई थी, हॉल के कोने मे बड़ी सी चेयर पर एक अंग्रेज रोबीला सा आदमी बैठा हुआ वायलिन बजा रहा था.

 

 

 

उदास धुन, उसकी आँखे बंद थी। सारा उसके पैरो के पास जा कर बैठ गई। वो रोने लगी . सारा ने उसका हाथ अपने हाथ मे लिया और कहने लगी , ” प्लीज अल्बर्ट डोंट गो डोंट लीव मी।  ” पर उस आदमी पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

 

 

 

Kahaniyan in Hindi Written Horror

 

 

 

सारा का चेहरा लाल हो गया था।  अचानक वो आदमी खड़ा हुआ और मेरी ओर बढने लगा। मैं जड़ थी। जैसे मेरे आँखों के सामने कोई पिक्चर चल रही थी।  तभी सारा के हाथ मे ना जाने कहा से डंडा  आ गया।

 

 

 

 

सारा फिर बोली, ”  अल्बर्ट स्टॉप. ” पर वो आदमी आगे बढ़ता ही जा रहा था. और फिर सारा ने एक डंडा अलबर्ट को मारा और तब पहली बार मेरे गले से चीख निकली। विक्रम और शिब्बू भागते हुए मेरे पास आये.

 

 

 

 

मैं उस कमरे मैं जड़ खड़ी हुई थी और लगातार चीखे जा रही थी। वहां कुछ भी नहीं था। विक्रम मुझे उठा कर अपने कमरे मे लाया।  मुझे पानी पिलाया।  मैं पसीने मैं भीगी हुई थी। वो बार बार मुझसे पूछ रहा था क्या हुआ? क्या हुआ? पर मैं कुछ बता नहीं पा रही थी, फिर कब मैं बेहोश हो गई पता नहीं लगा।  जब मेरी आँख खुली सवेरा हो गया था। विक्रम परेशान सा मेरे सिरहाने बैठा हुआ था.

 

 

 

रूम के दूसरे कोने मैं शिब्बू दिवार से सर लगा कर ऊंघ रहा था। मैंने उठने की कोशिश की तो विक्रम ने मेरी मदद की. ऐसा लग रहा था जैसे मैं सदियो से बीमार हूं. बहुत कमज़ोरी लग रही थी.

 

 

 

 

 

शिब्बू को विक्रम ने काफ़ी बना कर लाने को कहा।  फिर मुझे बाहों मे भरते हुए कहा क्या हुआ था ? रुबिन तुम रात को वहां क्यों चली गई थी ?
मैंने सारी बात बता दी। विक्रम सुन कर सन्न रह गया। उसने जैसे तैसे पैकिंग की। मुझे सहारा दे कर तैयार करवाया और हम निकल पड़े कॉटेज से। जैसे जैसे दूर जा रहे थे मेरे शरीर मे जैसे जान आती जा रही थी.

 

 

 

 

हम बाजार मे पहुच गए।  विक्रम ने उस छोटे से ढाबे पर गाड़ी रोक दी। वो बुड्डा चाय बना लाया। विक्रम और मेरी सफ़ेद शक्ल देख कर वो बोला साहब हम तो पहले ही दिन आपको बताने वाले थे.

 

 

 

पर शहर के लोग ऐसे बातो को कहा मानते  हैं।  हम नाश्ता करके वहाँ से आगे बढे।  जब गुडगाँव करीब आने लगा तो मैंने विक्रम को कहा, ”  क्या तुम भी मुझे छोड़ तो नहीं जाओगे ? हमारे रिश्ते का भी तो कोई नाम नहीं।  ” विक्रम मेरी तरफ  हैरानी से देखने लगा  . वो कुछ नहीं बोला.

 

 

 

वापिस आ कर मैं अपने कामों में फिर से  बिजी हो गई।  एक शाम मेरा फ़ोन बजा – हेल्लो जानेमन रेडी हो जाओ मम्मी पापा आ रहे है . मैं तुम्हे उनसे मिलवाना चाहता हों।  मैं बहुत खुश हुई।  उलझे बालो वाली लड़की ने मेरी जिंदगी सुलझा दी थी.

 

 

 

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Hindi Kahaniya in Written / मैं करूँ इन्तजार तेरा हिंदी प्रेम कहानी

Hindi Kahaniya in Written मेरा नाम यशवंत है और मैं भरतपुर का रहने वाला हूँ. आज मैं बहुत परेशान हूं क्याेंकि आज मेरा 12वीं का परिणाम आने वाला है.

 

 

 

मुझे यह पता कि मैं बढ़िया नंबर से पास हाेने वाला हूँ लेकिन मुझ पर बहुत ही ज्यादा दबाव है अच्छे नंबर लाने का क्याेकि मैने दसवी में अपने कालेज में सबसे ज्यादा नंबर लाये थे और कालेज टाप किया था…. इसलिए मन में थाेड़ी घबराहट थी.

 

 

 

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 यह सच्ची प्रेम कहानी कुछ समय पहले की है, तब गांव उतने विकसित नहीं हुये थे. मैं अपना रिज़ल्ट देखने पास के गांव में जाने वाला था… जहां कुछ पैसे लेकर रिजल्ट दिखाया जाता था.

 

 

 

 

क्याेकि उस समय आज की तरह स्मार्टफ़ोन और लैपटॉप बहुतायत नही हाेते थे और ना ही नेट सस्ता था. मोबाइल रहती थी लेकिन वही नाेकिया की सादा पीस.

 

 

 

 

मैं परिणाम देखने जाने की तैयारी कर ही रहा था कि राहुल जाे कि नवीं में पढ़ता था ने आकर बताया कि ट्राँसफार्मर जल गया है. अब मैं और भी परेशान हाे गया… परेशानी जायज थी क्याेंकि गांव में ट्राँसफार्मर जलना मतलब कि कम से कम एक हफ्ते के लिए बिजली गुल.
जब तक गांव के प्रभावशाली लाेग या फिर ट्यूबवैल वाले बिजली विभाग वालाें कीे फाेन नहीं करेंगे, तब तक बिजली नही आने वाली. आम लाेगाें काे क्या फर्क पड़ता है और वैसे भी ज्यादातर बिजली का बिल ताे भरते नही और जब चेकिंग आती है ताे पूरे गांव में ऐसी अफरातफरी मचती है तुफान आ गया हाे.
मैं यह साेच ही रहा था कि मेरे नाेकिया मोबाइल के सादे पीस की रिंगटोन बजी. मैने देखा तो एक अननाेन नंबर से काल था. मैंने काल रिसीव किया ताे एक लड़की की मीठी आवाज आयी हैलाे…. बधाई हाे मिस्टर यशवंत….आपने कालेज टाप किया है.
मैं खुशी के मारे चिल्लाते हुये बाेला “क्या”
मेरी आवाज़ सुनकर सुनकर मेरी जाे कि पास में ही कुछ काम कर रही थी, वह दाैड़कर मेरे पास आयी और घबरा कर पूछा क्या हुआ बेटा  “क्याे इतना तेज चिल्लाये”.

मैं करूँ इन्तजार तेरा हिंदी प्रेम कहानी

मैं थाेड़ा सिरिअस  हाेकर बाेला… कुछ नहीं मां,  मैं बाद में बताता हूं. इतना कह कर मैं अपने घर के बाहर लगे गुड़हल के पेड़ के पास आ गया. मैं उस लड़की से सीरियल आवाज में पूछा.. काैन हैं आप,  कहीं आप मजाक ताे नहीं कर रही हैं, मेरा नम्बर कैसे मिला आपकाे.
वाे हंसने लगी और बाेली बुद्धू ही रहाेगे आप, मैं आपके हर सवाल का उत्तर दूंगी…परन्तु एक सवाल काे छाेड़कर… ताे मेरा जवाब है कि मैं मजाक नही कर रही हूं. आपने सच में कालेज टाप किया है.. आपकाे विश्वास नहीं है ताे मै आपका राेल नंबर बता देती हूँ और आपका नम्बर आपके परम मित्र शरद मिश्र ने दिया है.
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रह गयी यह बात कि मैं काैन हूं ताे इसकी ज़िम्मेदारी आपकी, आप स्वत: पता लगा कि मैं काैन हूं…. फिर उसने बाय कहा और फाेन कट कर दिया.
अब मैं और भी साेच में पड़ गया… मैंने फाैरन शरद काे फाेन लगाया….लेकिन उसका नम्बर बंद था. अब मैने उसके पिता जी काे फाेन किया और शरद के बारे में पूछा ताे उन्हाेने बताया कि शरद भगवानपुर मार्केट गया है. उसकी मोबाइल चार्ज ना हाेने के कारण बंद हाे गयी… और तुमकाे ताे पता ही ट्राँसफार्मर जल गया है.
मैंने उनसे कहा सही बात है चाचा जी… अच्छा यह बताइये शरद कब से गया है मार्केट….अभी दस मिनट पहले… किसी काे फाेन कर रहा था और काेई नम्बर लिखवा रहा था… बाेल रहा था कि जल्दी लिखाे मोबाइल बंद हाेने वाली है… उन्हाने कहा.
ठीक है चाचा जी… मैंने कहा और फाेन कट कर दिया.
अब मेरा मन और परेशान हाेने लगा था. मैं घर में गया, फटाफट तैयार हाेकर भगवानपुर की ओर निकला और निकलते हुये मैने मां से कह दिया कि मैं भगवानपुर जा रहा हूँ.

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मैं जब भगवानपुर पहुंचा ताे शरद काे ढुढने में ज्यादा परेशानी नही हुई, क्याेकि भगवानपुर में मोबाइल की 5 दुकाने है और वह  श्याम मोबाइल सेंटर पर था. वह वहां मेरा रिजल्ट देखने गया था. मैने उसकाे आवाज दी. शरद और मेरे कालेज के कुछ और दाेस्ताे ने मुड़कर मुझे देखा और दौड़कर मेरे पास आ गये और मुझे खुशी से उठा लिया.
रमेश ने कहा कि तुमने कालेज टाप किया है.. लेकिन यह मैं कंफर्म हाेना चाहता था.. साे मैं श्याम भैया की दुकान पर गया और उनसे अपना रिज़ल्ट दिखाने काे कहा… उन्हाने मेरा रिजल्ट दिखाया.. मेरा 95% अंक आये था.
तब तक पंडित जी का भी आ गया जाे कि मेरे क्लासटीचर थे, उन्हाेने भी वही खुशख़बरी दी. अब मुझे यकीन हाे गया था, वैसे मुझे 90% से अधिक की उम्मीद थी, लेकिन मैं कालेज टाप करूंगा, इसकी उम्मीद नहीं थी.
सारे दाेस्त मुझसे पार्टी देने के लिए कहने लगे, फिर हम पास के एक मिठाई की दुकान पर गये, जहां हम सबने रसगुल्ले खाये. सारे दाेस्ताे से विदा लेने के बाद मैने शरद से पूछा कि तुमने मेरा मोबाइल नम्बर किसी काे दिया था क्या?
शरद तपाक से बाेला.. मतलब? मैने कहा यार मुझे एक लड़की का काल आया था और फिर मैंने सारी बातें बता दीं. शरद मुस्कराते हुये बाेला.. पागल वाे राधिका थी.
राधिका.. अनायास ही मैं बाेल पड़ा और मेरे आंखाें में आसू आ गये. शरद मुझे संभालते हुये बाेला… इतना प्रेम करते हाे ताे अलग क्याें हाे गये? मैं राेते हुये बाेला कि मैं अलग नही हुआ वरन हालात ने हमें अलग करा दिया. तब शरद ने कहा कि मुझे बताओ आखिर क्या हुआ? बाते करते करते हम एक पार्क में आ गये थे… हम दाेनाे एक पेड़ के नीचे बैठ गये… फिर मैंने बताना आरम्भ किया.
जब मैं 9वीं में था,उसी साल उसका ऐडमिशन उस कालेज में हुआ था. मैने ताे शुरूआत से ही इसी कालेज में पढ़ाई की है. उस दिन शर्मा सर की क्लास थी….उसने क्लासरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और बाेला  May I Coming Sir.
Yes Coming Beta… फिर  शर्मा सर थाेड़ा गुस्से में अन्य स्टूडेन्ट्स से मुखातिब हाेते हुये उन्हाेने कहा.. कुछ सीखाे, क्लास में कैसे प्रवेश किया जाता है, तुम लाेग  गधाें की तरह जब मन करे आ जाते हाे, जब मन करे चले जाते हाे…शर्म आनी चाहिये तुम लाेगाें काे…समझ गये ना सब लाेग.
तभी मेरे मुंह से अचानक से यस सर निकल गया.. बाकी किसी स्टूडेन्ट्स ने कुछ नहीं बाेला. वाह, क्या बात है, चलाे बढ़िया है किसी गधे काे ताे बात समझ में आयी… शर्मा सर ने कहा. इस पर सारे स्टूडेन्ट्स बसने लगे… राधिका भी मुस्कुरा दी… वैसे मुझे अभी तक उसका नाम नही पता था.
शर्मा सर पढ़ाने लगे.. लेकिन मेरा मन ताे कहीं और खाेया हुआ था. जब राधिका क्लास में आयी ताे ऐसा लगा जैसे अमावस  की काली घनेरी रात काे चांद ने अपनी  आभा से अलंकृत कर दिया है.
उसकी खूबसूरती का वर्णन करने के लिये शब्दों की श्रिंखला भी कम पड़ जायेगी….यूं कहाे कि आज तक ऐसा काेई शब्द नही बना जिससे उस परी की तुलना की जा सके.
मैं ताे उसकी आंखाें की गहराईयाें में खाे गया था कि घंटे की आवाज सुनाई दी… शर्मा सर की क्लास खत्म हाे चुकी थी और लंच का समय हाे गया था.
क्लास खत्म हाते ही सारे स्टूडेन्ट्स बाहर आ गये और मैं भी अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया… कुछ स्टूडेन्ट्स इधर उधर घूम रहे थे ताे कुछ लंच कर रहे थे लेकिन मेरा दिल नहीं लग रहा था.

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रघु ने मुझसे कहा कि खाना खा लाे… लेकिन मैंने मना कर दिया… इस पर रीतिक ने कहा कि कालेज में माडल आयी है इसलिए यशवंत काे भूख नहीं है… इसपर मैं रीतिक पर गुस्सा हाे गया.
मेरे नयन हर पल राधिका काे ढूढ रहे थे…तभी मैंने देखा कि एक 50 वर्षीय आदमी जाे कि उसके पापा लग रहे थे के साथ वह प्रिन्सिपल सर के कक्ष में जा रही थी.
कुछ देर के बाद तीनाे लाेग बाहर आये. राधिका के पिताजी ने प्रिन्सिपल सर ले हाथ मिलाकर विदा ली और अपनी कार में आकर बैठ गये,  राधिका फिर क्लासरूम में आ गयी.
सबकुछ ऐसे ही चलता रहा लेकिन मेरे अंदर एक बड़ा बदलाव आया, मेरी पढ़ाई बहुत अच्छी हाे गयी.  मुझे किसी भी कीमत पर राधिका के नजराें में आना था और यह सबसे बढ़िया तरीका था.
यह बदलाव सबने महसूस किया. मैं 9वीं में पूरे क्लास में सबसे ज्यादा नंबर पाया. उस दिन पहली बार राधिका ने मुझसे बात की और सबसे ज्यादा नंबर लाने की बधाई दी.
गर्मियाें की छुट्टियाँ प्रारम्भ हाेने वाली थीं. यह छुट्टी के पहले का हमारा आखिरी दिन था. हम दाेनाे बढ़िया दाेस्त बन चुके थे. राधिका ने बिना मेरे कहे अपना माेबाइल नम्बर मुझे दिया और फिर मैंने भी उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया.
फिर हम दाेनाे ने विदा ली, लेकिन हमारी आंखों में बिछड़न का दर्द साफ नजर आ रहा था, जाे कुछ ही समय में माेतियाें की लड़ी की टूटन के समान बिखरना लगा.
अचानक से राधिका रुकी और उसी पल मेरे भी पांव ठहर गये, हम एक साथ मुड़े और राधिका दाैड़कर मेरे पास आयी और मुझसे लिपटकर राेने लगी, मेरे भी आंखों से अश्रुपात हाने लगा. यह अश्रुमाेती इस बात को प्रमाण थे कि यह एक पवित्र प्रेम था… निस्वार्थ… निश्छल…पावन.
अब मुझे समझ आ गया था कि यह प्रेमअगन दाेनाे तरफ लगी थी… किसी तरह हमने अपनेआप काे संभाला और विदा ली. मैं कुछ ही दूर गया था कि राधिका का काल आ गया और पूरे रास्ते वह बातें करती रही.
यह गर्मी की छुट्टियाँ तिहाड़ से कम ना थी…. बातें ताे हाती लेकिन मुलाकाताें के लिये हम तरस जाते… सबसे बड़ी बात यह थी कि हम दानाे के घर वालाें कीे हम पर शक हाेने लगा…. फिर क्या तमाम तरह की बंदिशें…. और वैसे भी प्यार में बंदिशें ना हो ताे प्यार का मजा अधूरा रह जाता है.
किसी तरह गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हुई और कालेज के पहले दिन ही मै कॉलेज पहुंच गया, जैसा हमारा वादा था, लेकिन राधिका नही आयी, मेरी निगाहें उसे चाराे ओर ढुढने लगीं, मेरा मन अधीर हाेने लगा कि तभी उसका मैसेज आया कि उसकी तबीयत खराब है और वह कल आयेगी, लेकिन यह मैसेज हमारे प्यार का ग्रहण साबित हुआ.
अगले दिन भी राधिका नहीं आयी,मैने उसे काल किया, पर उसका नम्बर बंद था. मैं परेशान हाे गया. किसी अनहाेनी की आशंका से मेरा मन घबराना लगा.
दोपहर एक बजे राधिका के साथ उसके पिता जी और 10 अन्य लाेग धड़धड़ाते हुये क्लासरूम में घुस आये और मुझे घसीटकर बाहर ले गये, शर्मा सर ने राेने का प्रयास किया तो उनके साथ भी बेहूदगी की.
तब तक अन्य टीचर और स्टूडेन्ट्स आ गये,. उन्हाेने मुझे छुड़ा लिया. प्रिन्सिपल सर ने गुस्से से राधिका के पिता जी से का कि सर आप इस कॉलेज काे डाेनेशन देते हैं ताे इसका मतलब यह नहीं कि आप ऐसी बेहूदगी करेंगे. इतने बड़े बिजनेसमैन हाेने पर भी ऐसी घिनाैनी हरकत करते हुये आपकाे शर्म नही आयी.
इस पर राधिका के पिता जी ने झल्लाते हुये गुस्से से कहा आप लाेग इस यहां शिक्षा देते हैं या फिर यह कालेज आवारा लाेगाें का अड्डा है. शर्म मुझे नही शर्म आपकाे आनी चाहिये, देखिये आपका छात्र क्या गुल खिलाता है.

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फिर उन्हाेने सारे मैसेज प्रिन्सिपल सर काे दिखा दिया…. हांलाकि ज्यादातर मैसेज काे राधिका ने डिलिट अवश्य कर दिया था, लेकिन उसमें माैजूद मैसेज हमारी प्रेम कहानी की दास्तान कहने काे पर्याप्त थे.
यह देखने के बाद प्रिन्सिपल सर ने मुझे सबके सामने जाेरदार थप्पड़ लगाया और मुझे कैरेक्टर लेस करके कालेज से निकालने की धमकी दी, हांलाकि उनरी बाताे में राधिका के पिता जी का दबाव साफ झलक रहा था.
उसी क्षण राधिका ने कहा कि यशवंत काे कालेज से निकालने की काेई आवश्यकता नही है.  मैं खुद अब इस कालेज में नही पढुंगी. मैं नही चाहती  कि मेरे वजह से मेरे प्यार काे काेई तकलीफ हाे.
मैं भगवान काे साक्षी मानकर कहती हूं कि हमारा प्यार राधा-कृष्ण की तरह पवित्र है और हे प्रभु अगर हमारा प्यार पावन है.. सच्चा है… निश्छल है मुझे  पति को रूप में यशवंत ही मिले.

 

 

 

इतना कहकर वह चली गयी. उसकी सिसकियां आज भी मेरे कानाे में सुनाई देती हैं और मेरे दिल काे तड़पाती हैं. मैने उसकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बना लिया और पढ़ाई में दिन रात एक कर दिया.
मेरी यह प्रेमकहानी कई लाेगाें के द्वारा अलग अलग तरीकाें से कही गयी… मुझ पर तमाम फब्तियां कसी गयी…. लेकिन यह मेरे साहस काे नही डिगा सकी ना ताे डिगा पायेंगी.
सही कहा तुमने… ऐसी ही कुछ गलत कहानियां मैने भी सुनी थी… लेकिन मुझे कभी यकीन नही हुआ…. शरद ने कहा. लेकिन तुम्हें राधिका का नम्बर कहां से मिला, कैसी है वाे, शायद मुझे भूल गयी हाेगी….मैने शरद से पूछा.
ना.. ना.. यशवंत तुमने ताे उनकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बनाया लेकिन उन्हाेने ने ताे तुम्हें अपना भगवान बना लिया हर पल सिर्फ तुम्हारे नाम की माला जपती है.

यह उनके प्यार की ताकत थी जाे तुमने यह मुकाम हासिल किया… उनके पिता जी काे भी इस पवित्र प्रेम का एहसास हाे गया.

तुम्हें शायद पता नहीं परसों वे प्रिन्सिपल सर ले मिले थे, तुम्हारे घर का पता मांग रहे थे,  लेकिन सर ने उन्हे वापस लाैटा दिया…. फिर राधिका के कहने पर उन्हाेने पता दिया. आज वे लाेग तुम्हारे घर जाने वाले हैं… चलाे अब तक पहुंच भी गये होंगे.


हम दाेनाे वहां से तुरंत ही घर की तरफ निकले, सचमुच वहां पर प्रिन्सिपल सर, शर्मा सर, राधिका, उसके पिता जी और गांव के कई गणमान्य लाेग माैजूद थे.
मैने नमस्कार किया… तभी सबके सामने राधिका के पिता जी मुझसे हाथ जाेड़कर माफी मांगने लगे. मैंने तुरंत उनका हाथ पकड़ और कहा कि यह क्या कर रहे हैं… आप हमसे बड़े हैं… हमें शर्मिंदा ना करें.
फिर उन्हाेने कहा कि मैने तुम्हारे माता पिता से बात कर ली है जल्द ही तुम दाेनाे की सगाई हाे जायेगी, लेकिन एक शर्त है तुम लाेगाें काे आगे पढ़कर डाक्टर बनना है और गांव का नाम राेशन करना है. इस तरह से इस प्रेम कहानी का सुखद अंत हो गया.

 

 

 

 

 

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2- प्यार का तोहफा :-

 

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3-  Short Love Story In Hindi   बाहों का हार:- दोस्तों मैं अनीता आज अपने प्यार की सच्ची कहानी को आप लोगों के बीच रख रही हूँ. मैं हमेशा चाहती थी कि मेरा पति एक आदर्श पति हो, जिम्मेदार हो, मेरी हर ख्वाहिस को पूरी करे.

 

 

 

 

प्यार के मामले में बिलकुल सच्चा हो और यह सिर्फ मेरी ही नहीं बल्कि हर लड़की की सोच होती है. कोई भी लड़की यह कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति निकम्मा हो.

 

 

 

 

मैं भी उन्हीं में से एक  थी और मैं भगवान  की  शुक्रगुजार हूँ कि उन्होने मेरी बात सुन ली और मुझे एक अच्छा और सच्चा पति मिला. जो मुझे बेहद प्यार करते हैं. मेरी हर सुबह उनकी मुस्कान के साथ होती है.

 

 

 

 

मैं आज भी उस पल को याद करते हुए प्यार के गहरे सागर में डूब जाती हूँ , जब मैं उनसे पहली बार मिली. मैं और मेरी सहेली एक बस में यात्रा कर रहे थे. ट्रेन में बहुत भीड़ थी.

 

 

 

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मैं बीच में फंसी हुई थी.जैसे ही मेरी सहेली ने  धूप से बचने के लिए खिड़की बंद की. वैसे ही वो मेरे तरफ देखकर मुस्कुराया…..वैसे तो मैं अनजान लोगों की तरफ देखना भी पसंद नहीं करती  हूँ, लेकिन उसकी  उस मुस्कान में ना जाने क्या आकर्षण था कि मैंने भी मुस्कुरा दिया.

 

 

 

 

इसके बाद बातों का सिलसिला शुरू हो गया और कुछ ही समय में हम घुल मिल गए.  कुछ देर में हमारा स्टॉप आ गया. मैंने उसे बाय कहा….फोन नम्बर्स का आदान-प्रदान पहले ही हो चुका था.

 

 

 

 

 

बस से उतरते ही मेरी सहेली ने इठलाते हुए  कहा ” क्या बात है अनीता जी….अरे उस बस में तो हम भी थे…हमसे तो ना बातें हुई…सारी बातें तो उन मिस्टर से ही हो गयीं ”

 

 

 

 

यह बात मुझे लग गयी. मैंने भी सोच लिया कि मैं उन्हें फोन नहीं करुँगी…..तीन दिन बाद उनका फोन आया…..लेकिन वे तीन दिन ३०० साल के बराबर थे….हर पर मेरी निगाह मोबाइल पर ही रहती थी.

 

 

 

कोई भी फोन आने पर मैं झट से फोन देखती कि कहीं उनका ही तो नहीं है. खैर फोन पर सारे गिले सिकवे दूर हो गए…..अब तो फोन का आना-जाना शुरू हो गया….मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि यूँ ही सफ़र के दौरान इतने अच्छे इंसान से मुलाक़ात हो जायेगी.

 

 

 

 

ओ अक्सर मुझसे कहता है कि तुमको तो भरा पूरा परिवार मिला था लेकिन मुझे  ज़िन्दगी ने  कभी अपनी  ख़ुशी की रोशनी से रौशन नहीं किया था.

 

 

 

 

मेरे  पिता की मृत्यु बहुत  जल्द हो गयी थी. उसके बाद  मां भी अक्सर बीमार ही रहती थी. तुमने जो यह बाहों का हार मेरे गले में डाला है न…..मैं समझता हूं कि भगवान ने सारी खुशियाँ मुझे सूद समेत वापस दे दी हैं.

 

 

 

 

 

आज हमारी शादी हो चुकी है, लेकिन मेंजब भी उस सफ़र को याद कराती हूँ…..प्रेम के गहरे सागर में डूब जाती हूँ.

 

 

 

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Hindi Stories / भारतीय सेना के इस जनरल के सामने रोने लगे थे पाकिस्तानी जनरल

Hindi Stories Written पाकिस्तान और भारत के बीच हुये १९७१ के युद्ध में बांग्लादेश जीत के कई दावेदार थे। उन्ही में से एक हैं जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा।

 

 

 

उस समय के थल सेनाध्यक्ष रहे मानेक  शॉ ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि  जगजीत सिंह अरोड़ा  १९७१ के युद्ध के नायक थे। इसके लिए जगजीत सिंह अरोड़ा को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

 

 

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हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें और भी पुरस्कारों से सम्मानित करना चाहिए था।  २३ नवंबर को भारतीय सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में एक आपेरशन किया था और इस दौरान जब जनरल अरोड़ा युद्ध का जायजा लेने युद्ध क्षेत्र में गए तभी पाकिस्तानी सैबर जेट्स ने उनपर हमला कर दिया।

 

 

 

रिटायर्ड जनरल मोहिंदर सिंह के मुताबिक़ जब पाकिस्तानी सेबर जेट्स ने हमारे हेलीकाप्टर पर हमला किया तो वह हेलीकाप्टर पर नहीं लगी इसे ह बनकर के अंदर चले गए।

 

 

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वहीँ जनरल अरोड़ा ने मेरे सामने थल सेनाध्यक्ष जनरल मानेक शॉ से फोन पर उस आपरेशन के लिए वायुसेना के इस्तेमाल की अनुमति मांगी।  इसपर मानेक शॉ ने कहा, ” अभी हम युद्ध के लिए तैयार नहीं हैं। ”

 

 

 

इसपर जनरल अरोड़ा ने कहा, ” यह बात आप दिल्ली में बैठे राजनीतिज्ञों से सुन सकते हैं, लेकिन मैं यह अपने सैनिकों को नहीं बता सकता। “इसके बाद एक घंटे के अंदर अनुमति मिल गयी और उसके बाद भारत ने अपने नैट विमान भेजे और उन्होंने पाकिस्तान के तीन सेबर जेट्स को नष्ट कर दिया।

 

 

 

 

भारतीय सेना के इस जनरल के सामने रोने लगे थे पाकिस्तानी जनरल

 

 

 

 

१९७१ युद्ध के दौरान जनरल अरोड़ा १८  से २० घंटे तक काम करते थे।  वे रोज युद्ध के किसी ना किसी मोर्चे पर जाते थे।  एडमिरल कृष्णन ने अपनी आत्मकथा ” ए सेलर्स स्टोरी ” में लिखा है कि, ” १९७१ में जब पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया तब ढाका के रेसकोर्स मैदान में एक छोटी सी मेज और दो कुर्सियां राखी गयी थीं।  जिन पर जनरल अरोड़ा और पाकिस्तानी सेना के जनरल नियाज़ी बैठे थे।  आत्मसमर्पण की ६ प्रतियां थीं जिन्हे मोठे सफ़ेद कागज़ पर टाइप किया गया था। ”

 

 

 

एडमिरल कृष्णन के अनुसार पहले पाकिस्तानी जनरल नियाज़ी ने उस कागज़ पर दस्तख़त किये और उसके बाद जनरल अरोड़ा ने उस पर दस्तख़त किया।

 

 

 

पाकिस्तानी जनरल ने दस्तख़त के दौरान भी चालबाज़ी करते हुए केवल ” ऐके निया ” ही लिखा था।  इसपर जनरल अरोड़ा ने उनसे  पूरा दस्तखत करने के लिए कहा और दस्तख़त होते ही आज़ाद बांग्लादेश विश्व के मानचित्र पर उभरा।

 

 

 

एडमिरल कृष्णन की आत्मकथा  में इसका वर्णन है कि उस समय जनरल नियाज़ी के आखों में आंसू आ गए थे।  उन्होंने अपने बिल्ले उतारे और अपना सिर जनरल अरोड़ा के समक्ष झुकाया और माथे को जनरल अरोड़ा के माथे से छुआ मानो वह अधीनता स्वीकार कर रहे हों।  साल १९७३ में जनरल अरोड़ा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए।

 

 

 

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2- आज हम  वीर भारतीय सैनिक मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित सेकेण्ड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके वीरता की गाथा दुश्मन देश पाकिस्तान भी सुनाता है।

 

 

 

 

अरुण को परमवीर चक्र का सम्मान १९७१ के भारत – पाकिस्तान के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ वीरता से लड़ने के लिए दिया गया था।

 

 

 

हर भारतीय को यह कसक है उस युद्ध में हमने भारत मां वीर सपूत को खो दिया लेकिन जीते जी उस वीर बहादुर ने पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए थे।

 

 

 

पाकिस्तान के ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर ( जो कि उस जंग में परमवीर अरुण खेत्रपाल का सामना कर रहे थे ) ने यह बात बहुत दिन बाद २००१ में अरुण के पिता ब्रिगेडियर एम एल खेत्रपाल को बताई।

 

 

 

ब्रिगेडियर मोहम्मद नसीर ने कहा उस युद्ध में  मैंने ही आपके बेटे को मारा था।  उस समय ऐसी स्थित हो गयी थी जब या तो वह बचते या फिर मैं। यह बात कहते हुए ब्रिगेडियर ख्वाजा उदास हो गए और वे शर्मिंदा भी हो रहे थे।

 

 

 

तब ब्रिगेडियर ने उनसे जो बात कही वह एक फौजी ही कह सकता है।  उन्होंने ब्रिगेडियर ख्वाजा से कहा, ” आप अपना फ़र्ज़ निभा रहे थे और वह अपना।  आप शर्मिन्दा ना हों। ” अरुण की बहादुरी पाकिस्तान में भी बहुत प्रसिद्द है।  पाकिस्तान के डिफेन्स वेबसाइट पर अरुण की कथा को भी जगह दी गयी है।

 

 

 

 

” बदलूराम का बदन ” गीत के बारे में जाने, असम रेजिमेंट का गीत

 

 

 

जब अमेरिका के वाशिंगटन में भारत और अमेरिका के सयुंक्त युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सैनिक इस गीत ” बदलूराम का बदन ” पर थिरकते नजर आये तब इस गीत ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

 

 

 

यह वाशिंगटन के ज्वाइंट बेस लुईस मैककोर्ड में भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच १५ वां संयुक्त युद्धाभ्यास था। ५ से १८ सितम्बर तक चलने वाली इस एक्सरसाइज का नाम ” युद्धाभ्यास ” ही है।

 

 

 

इस युद्धाभ्यास का मकसद किसी भी आपात स्थित के दौरान होने वाली कार्यवाही में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल बिठाना है।

 

 

 

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इसी दौरान भारतीय सेना की तरफ से असम  रेजिमेंट के सैनिकों ने अपने गीत ” बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है, लेकिन उसका राशन हमको मिलता है ” के बोल अपने चिरपरिचित सीटी के साथ गुनगुनाया और थिरकने लगे।  इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने भी साथ निभाया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया।

 

 

 

आइये इस गीत के पीछे की कहानी को जानते हैं 

 

 

 

असम  रेजिमेंट की पासिंग आउट परेड हो या कोई अन्य आयोजन वह तब तक पूरा नहीं होता जब तह गाना ना बजा लिया जाए और उसपर सैनिक थिरक ना लें।

 

 

 

बदलूराम की यह कहानी द्वितीय विश्व युद्ध की है और यह परम्परा तभी से चली आ रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान असम रेजिमेंट ब्रिटिश सेना का हिस्सा थी और उत्तर पूर्व के राज्यों में जापानी सेना के आक्रमण से लड़ रही थी।

 

 

 

उसी दौरान असम रेजिमेंट के एक सैनिक  हवलदार बदलूराम वीरगति को प्राप्त हो गये।  उनके साथियों ने उनके शव को युद्ध के मैदान में ही दफ़न कर दिया, लेकिन उनकी मृत्यु को क्वार्टर मास्टर हवलदार बदलूराम की मृत्यु को अपने रजिस्टर पर चढ़ाना भूल गया।

 

 

 

इससे हुआ यह कि युद्ध के दौरान यूनिट को बदलूराम का राशन मिलता रहा और इस तरह से यूनिट के पास राशन रिजर्व हो गया। कुछ समय बाद बदलूराम के यूनिट को जापानी सेना ने चारो तरफ से घेर लिया।

 

 

 

कई दिनों दिनों तक दोनों तरफ से युद्ध चलता रहा।  चारो तरफ से घिरे होने के कारण यूनिट को राशन नहीं मिल पा रहा था। लेकिन उनके पास बदलूराम का रिजर्व राशन था और उसी राशन की वजह से वे जापानी सेना से युद्ध लड़ते रहे अन्यथा भूख से उनकी मौत भी हो सकती थी और युद्ध तो वे लड़ ही नहीं पाते।

 

 

 

बाद में जापानी सैनिक  हार मान गए तब ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने असम रेजिमेंट की बहादुरी को सलाम किया और बिना राशन के युद्ध लड़ने के बारे में पूछा।  तब सैनिकों ने बदलूराम के शहीद होने और उनके राशन मिलने की कहानी बताई।

 

 

 

उसी दौरान ” बदलू राम का बदन ” गीत लिखा गया।

 

 

 

 

रणछोड़ भाई रबारी की कहानी।  जब सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़ा एक हिन्दुस्तानी आम आदमी Hindi Story Books For Kids

 

 

 

 

आपने युद्ध के कई किस्से कहानियां पढ़ीं होंगी।  सैनिको की वीरगाथाएं पढ़ी होंगी।  आज हम एक ऐसे आम आदमी की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने १९६५ और १९७१ के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय पक्ष के लिए बहुत ही अहम् योगदान दिया।

 

 

 

उनका नाम रणछोड़ भाई रबारी था।  जनवरी २०१३ में ११२ वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके सम्मान में उत्तर गुजरात के सुईगांव अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की एक पोस्ट को रणछोड़दास पोस्ट नाम दिया गया है।

 

 

 

रणछोड़ भाई रबारी ने १९६५ और १९७१ के युद्ध में भारतीय सेना के लिए ” मार्गदर्शक ” जिसे आम बोलचाल की भाषा में ” पगी ” कहा जाता है का काम किया।

 

 

 

पगी वह होता है जो दुर्गम क्षेत्र में पुलिस और सेना के लिए रास्ता दिखाने का काम करते हैं।  सुरक्षाबल की कई पोस्ट मंदिर, दरगाह और जवानों के नाम पर हैं, लेकिन रणछोड़ भाई पहले ऐसे आम इंसान हैं जिनके नाम पर पोस्ट का नामकरण किया गया है।

 

 

 

रणछोड़भाई रबारी अविभाजित भारत के पेथापुर गथडो गाँव के मूल निवासी थे। यह क्षेत्र विभाजन के बाद पाकिस्तान चला गया।  रणछोड़ भाई पाकिस्तानी सैनिकों की प्रताड़ना से तंग आकर बनासकांठा ( गुजरात )  में आकर बस गए।

 

 

 

१९६५ के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने भारत के कच्छ सीमा स्थित विद्याकोट थाने पर कब्ज़ा कर लिया था।  इसमें १०० भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

 

 

 

वहाँ सेना की दूसरी टुकड़ी ( १० हजार सैनिक ) को तीन दिन में छारकोट तक पहुँचना अनिवार्य हो गया था।  ऐसे में रणछोड़दास ने सेना की दूसरी टुकड़ी का मार्गदर्शन किया और सेना निर्धारित समय पर मौके पर पहुँच गयी।

 

 

 

इस रणक्षेत्र से पूरी तरह से वाकिफ रणछोड़दास ने इलाके में छुपे लगभग १२०० सैनिकों की लोकेशन भी पता कर ली थी और इसके साथ ही उन्होंने पोआकिस्तानी सेना की नज़रों से बचते हुए कई अहम् जानकारी भारतीय सेना तक पहुंचाई जो सेना के लिए अहम् साबित हुई।  सेना उसपर हमला कर विजय प्राप्त की।

 

 

 

उसके बाद १९७१ के युद्ध में भी उन्होंने भारतीय सेना के लिए अहम् योगदान दिया।  उन्होंने घोरा क्षेत्र में छुपे हुए पाकिस्तानी सैनिकों की सटीक जानकारी भारतीय सेना को दी।

 

 

 

उसके साथ ही जंग के दौरान सेना के युद्ध सामग्री ख़त्म  होने पर उन्होंने सामग्री भी पहुंचाई।  उन्हें इसके लिए राष्ट्रपति मैडल के साथ ही कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।  ऐसे जाबांज हिन्दुस्तानी को नमन है।

 

 

 

इस पोस्ट के माध्यम से हमारा यही प्रयास है कि ऐसे वीरों को जिन्होंने हमारे लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया उन्हें सदैव याद किया जाए।  जय हिन्द।

 

 

 

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